अजित पवार के निधन पर सियासत गरमाई: फडणवीस और शिंदे का तीखा संदेश—‘शोक के क्षणों में राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण’

बी के झा

मुंबई/बारामती। नई दिल्ली, 29 जनवरी

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की आकस्मिक मृत्यु ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। बुधवार सुबह बारामती में उनका चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी पाँच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद देश भर में शोक की लहर दौड़ गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं, मुख्यमंत्रियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हस्तियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की।हालांकि, इस त्रासदी के बीच राजनीति के सुर भी तेज़ हो गए हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दुर्घटना को लेकर साज़िश की आशंका जताए जाने के बाद सियासी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसे बयानों को “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया है।

ममता बनर्जी के बयान से भड़की सियासत

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अजित पवार के निधन को लेकर संदेह जताते हुए कहा कि यह महज़ दुर्घटना नहीं हो सकती। उनका दावा था कि अजित पवार, शरद पवार के संपर्क में थे और भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ने की तैयारी में थे, ऐसे में विमान दुर्घटना की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हुए केंद्रीय एजेंसियों पर अविश्वास भी जताया।ममता बनर्जी के इस बयान को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दलों का समर्थन मिला। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने विमान संचालित करने वाली कंपनी के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल उठाए और कहा कि 2023 में हुई एक अन्य दुर्घटना की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई।

वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि इतने बड़े नेता की मौत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फडणवीस का तीखा पलटवार—‘मृत्यु पर राजनीति अस्वीकार्य’

इस पूरे घटनाक्रम पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ममता बनर्जी को आड़े हाथों लेते हुए कहा—“किसी की मृत्यु पर राजनीति करना ठीक नहीं है। ऐसे गंभीर आरोप लगाने से पहले ममता दीदी को कम से कम शरद पवार की बात सुननी चाहिए।”फडणवीस ने याद दिलाया कि स्वयं शरद पवार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह एक दुर्घटना थी और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के बयान न केवल शोकाकुल परिवार को ठेस पहुँचाते हैं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की भावनाओं को आहत करते हैं।

एकनाथ शिंदे बोले—‘दुख की घड़ी में संदेह फैलाना पीड़ादायक’

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी ममता बनर्जी के बयान पर तीखी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा—“जब ऐसी दुखद घटनाएं होती हैं, तब राजनीति करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। साज़िश की बात करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शरद पवार साहब ने स्वयं स्पष्ट कर दिया है कि यह एक दुर्घटना थी।”शिंदे ने बताया कि अजित पवार के अंतिम दर्शन के दौरान जिस तरह से हज़ारों-लाखों लोग ‘अजित दादा, अजित दादा’ के नारे लगाते हुए भावुक हो उठे, वह दर्शाता है कि महाराष्ट्र इस समय गहरे शोक में डूबा हुआ है। ऐसे समय में संदेह और आरोप लगाना जनता और परिवार—दोनों के लिए पीड़ादायक है।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि राजनीति करने के लिए समय और मंच दोनों मिल जाते हैं, लेकिन शोक की घड़ी में राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश नैतिक रूप से गलत है।

शोक बनाम सियासत: महाराष्ट्र की भावनात्मक अपील

अजित पवार का निधन न केवल एक राजनीतिक शून्य छोड़ गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर गया है कि

क्या भारत की राजनीति में शोक और संवेदना के लिए कोई अराजनीतिक स्पेस बचा है?

महाराष्ट्र की जनता इस समय दुख के सागर में डूबी है और राज्य नेतृत्व की यह अपील है कि इस त्रासदी को राजनीतिक हथियार न बनाया जाए।

शरद पवार द्वारा दुर्घटना को लेकर स्पष्ट बयान दिए जाने के बाद भी सियासत का जारी रहना, भारतीय राजनीति की संवेदनशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।

NSK

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