बी के झा
NSK


पटना, 2 जनवरी
बिहार में अपराध पर नियंत्रण के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर डरावनी तस्वीर पेश कर रही है। पटनासिटी के आलमगंज थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े एक युवक पर सरेआम गोली चलाकर अपराधियों ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि राजधानी के हृदय में अपराधी कितने बेखौफ हो चुके हैं।
युवक को बनाया निशाना, बाल-बाल बची जान
मामला आलमगंज थाना क्षेत्र का है, जहां दादरमंडी निवासी उवैश कुमार पर जानलेवा हमला किया गया। पीड़ित के अनुसार, खाजेकलां इलाके के रहने वाले एक युवक ने उस पर सीधे फायरिंग की। गोली उवैश के शरीर को छूते हुए निकल गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल तो हुआ, लेकिन उसकी जान बच गई।घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवक को तुरंत नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है। अस्पताल परिसर में ही पुलिस ने पीड़ित का बयान दर्ज किया।
पुलिस की नाक के नीचे वारदात, फिर भी हमलावर फरार
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी और नियमित गश्त वाले इलाके में हुई। आलमगंज थानाध्यक्ष ने आरोपी की पहचान हो जाने की बात स्वीकार की है और दावा किया है कि गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।लेकिन सवाल यह है कि—जब पहचान हो चुकी है, तो आरोपी अब तक कानून की पकड़ से बाहर क्यों है?
जांच के घेरे में हमले की मंशा
पुलिस का कहना है कि फिलहाल हमले की वजह स्पष्ट नहीं है। क्या यह आपसी रंजिश का मामला है, वर्चस्व की लड़ाई या फिर संगठित अपराध की कड़ी—इस पर जांच जारी है। पुलिस मानती है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठ पाएगा।
राजनीतिक तूफान:
विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
इस घटना के बाद बिहार की सियासत में भी भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार सरकार के दबंग उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोला है।
एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने कहा—“यह घटना सिर्फ एक गोलीकांड नहीं है, यह बिहार सरकार की कानून-व्यवस्था पर करारी चपत है। गृहमंत्री सम्राट चौधरी के नाक के नीचे बदमाशों का नंगा तांडव हो रहा है और सरकार कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है।”
राजद और कांग्रेस नेताओं ने इसे ‘महाजंगल राज 2.0’ करार देते हुए कहा कि बिहार में आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है।
कानूनविदों की राय:
दंडहीनता अपराध को बढ़ावा दे रही
प्रसिद्ध कानूनविद एडवोकेट राजीव रंजन का कहना है—“जब अपराधी खुलेआम गोली चलाकर फरार हो जाते हैं और गिरफ्तारी में देरी होती है, तो यह दंडहीनता की भावना को जन्म देता है। इससे अपराधियों के हौसले और बुलंद होते हैं।”उनका मानना है कि त्वरित गिरफ्तारी और फास्ट-ट्रैक ट्रायल के बिना ऐसे मामलों पर रोक लगाना असंभव है।
शिक्षाविदों का विश्लेषण:
सामाजिक ताने-बाने पर असर
पटना विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार कहते हैं—“जब राजधानी में ही लोग खुद को असुरक्षित महसूस करें, तो यह पूरे समाज के मनोविज्ञान को प्रभावित करता है। अपराध का यह भय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है।”बिहार में अपराध का बढ़ता ग्राफ, सवालों के घेरे में सरकार
पटना सिटी की यह घटना कोई अपवाद नहीं, बल्कि उस श्रृंखला की एक कड़ी है, जिसमें हाल के महीनों में हत्या, लूट, गोलीबारी और रंगदारी की घटनाएं लगातार सामने आई हैं।चारों तरफ बदमाशों का बोलबाला, गुंडा-रंगदारों की गुंडागर्दी और पुलिस-प्रशासन की लाचार तस्वीर—यही आज के बिहार की पहचान बनती जा रही है।
जनता पूछ रही है सवाल
क्या राजधानी भी अब सुरक्षित नहीं रही?
क्या कानून का डर अपराधियों के मन से खत्म हो चुका है?
और क्या बिहार सरकार सच में अपराध नियंत्रण को लेकर गंभीर है?
इन सवालों के जवाब अब सिर्फ बयानों से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से ही मिलेंगे।
