अमेरिका से हरी झंडी: जैवलिन मिसाइल और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल्स के साथ और घातक होगी भारतीय सेना

बी के झा

NSK

नई दिल्ली , 20 नवंबर

भारत की सैन्य ताकत अब नई ऊँचाइयों को छूने जा रही है। अमेरिका ने भारत को अपनी दो अत्याधुनिक और अत्यधिक सटीक सैन्य प्रणालियाँ—जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर 155 mm प्रिसिजन-गाइडेड प्रोजेक्टाइल्स—बेचने की अनुमति दे दी है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दी गई यह मंज़ूरी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) की आधिकारिक अधिसूचना के बाद सामने आई है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी का स्पष्ट संकेत है।जैवलिन मिसाइल सिस्टम: दुश्मन के टैंकों का काल

अमेरिका ने भारत को जैवलिन मिसाइल सिस्टम की बिक्री पर सहमति जताई है। इस सौदे की अनुमानित कीमत 45.7 मिलियन डॉलर है, जिसमें शामिल हैं—जैवलिन मिसाइलेंलॉन्च यूनिट्स सहायक उपकरण तकनीकी एवं लॉजिस्टिक सहायता जैवलिन क्यों है युद्धक्षेत्र की गेम-चेंजर मिसाइल?फायर-एंड-फॉरगेट क्षमता—लॉन्च के बाद ऑपरेटर को मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं टॉप-अप ऐक प्रोफाइल—टैंकों की सबसे कमजोर छत पर वार

थर्मल गाइडेंस—रात, धुंध और प्रतिकूल मौसम में भी सटीक निशाना पोर्टेबल और तेज़ तैनाती योग्यइस मिसाइल प्रणाली के शामिल होने से भारतीय सेना की इन्फैंट्री को अत्याधुनिक एंटी-आर्मर शक्ति मिलेगी, जो किसी भी आधुनिक सैन्य संघर्ष में निर्णायक साबित हो सकती है।एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल्स: भारतीय आर्टिलरी को देगी 50 किमी दूर तक ‘एक ही वार में सफलता’

जैवलिन के साथ ही अमेरिका ने Excalibur 155mm प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल्स की बिक्री को भी हरी झंडी दे दी है। इस सौदे की प्रस्तावित कीमत 47.1 मिलियन डॉलर है।एक्सकैलिबर की जानदार खूबियाँGPS-गाइडेड अल्ट्रा-प्रिसिजन स्ट्राइक40–50 किमी की मारक क्षमता2 मीटर से कम CEP—यानी लक्ष्य से केवल 1–2 मीटर की त्रुटिन्यूनतम कोलेटरल डैमेजयह प्रोजेक्टाइल

भारतीय सेना की M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर जैसी आधुनिक तोपों के साथ पूरी तरह संगत है। इससे दूर-दराज के दुश्मन ठिकानों पर surgical precision के साथ वार करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।भारत–अमेरिका रक्षा संबंधों में नया अध्यायइन दोनों अहम सौदों को मंज़ूरी मिलना इस बात का संकेत है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग अब केवल लेनदेन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रणनीतिक भरोसे और दीर्घकालिक साझेदारी में बदल रहा है।

इस मंज़ूरी के व्यापक प्रभावभारत की सीमाई रक्षा क्षमता में बड़ा इज़ाफ़ाआधुनिक युद्धक्षेत्र में सटीक, तीव्र और लक्षित कार्रवाई की क्षमता में बढ़ोतरी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति-संतुलन को मजबूती

चीनी गतिविधियों और किसी भी क्षेत्रीय चुनौती के विरुद्ध भारत की स्थिति अधिक सशक्त

यह ध्यान देने योग्य है कि यह मंज़ूरी अंतिम अनुबंध नहीं है। भारत और अमेरिका के बीच अब औपचारिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ही सौदा पूर्ण माना जाएगा।

निष्कर्ष

जैवलिन मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल्स का भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होना देश की सैन्य शक्ति को गुणवत्तापूर्ण तरीके से बढ़ाएगा। यह केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि भारत की रक्षा रणनीति में सटीकता, चपलता और आधुनिकता को नए स्तर पर ले जाने वाला कदम है।

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