बी के झा
इस्लामाबाद / त्रिपोली / न ई दिल्ली, 23 दिसंबर
आर्थिक बदहाली, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय अलगाव से जूझ रहे पाकिस्तान के सैन्य शासक-सरीखे जनरल फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक बार फिर भड़काऊ और खतरनाक बयान देकर सुर्खियों में हैं। अफ्रीकी और अरब देशों के दौरे पर निकले मुनीर ने लीबिया में दिए भाषण में मुस्लिम देशों से तथाकथित “अल्लाह के दुश्मनों” के खिलाफ एकजुट होने की अपील कर न सिर्फ धार्मिक उन्माद को हवा दी, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान किसी धार्मिक चिंता से अधिक पाकिस्तानी सेना की वैचारिक कुंठा, असफल विदेश नीति और घरेलू विफलताओं को ढकने की कोशिश है।
क्या कहा आसिम मुनीर ने?
लीबिया में अंग्रेज़ी में दिए गए अपने भाषण में मुनीर ने कहा—“अगर हम आज की दुनिया देखें, तो मुस्लिम दुनिया बेहद दर्द और मुश्किल में है। पिछले 20 वर्षों में सात या आठ शानदार मुस्लिम देश एक-एक करके तबाह कर दिए गए।”उन्होंने आगे दावा किया कि मुस्लिम देशों का पतन “साजिशों और धोखेबाज़ ताकतों” की वजह से हुआ है, जो इस्लामी दुनिया को कमजोर करना चाहती हैं।लेकिन असली विवाद तब खड़ा हुआ जब मुनीर ने सीधे-सीधे धार्मिक युद्ध जैसी भाषा का इस्तेमाल किया।‘अल्लाह के दुश्मनों’ से डर फैलाने की अपील मुनीर ने कहा—“हमें मुसलमानों के तौर पर आदेश दिया गया है कि हम अपनी पूरी ताकत के साथ तैयार रहें, ताकि उन लोगों के दिलों में दहशत पैदा की जा सके जो अल्लाह के दुश्मन हैं, हमारे दुश्मन हैं—जिन्हें हम नहीं जानते, लेकिन अल्लाह जानता है।
”विश्लेषकों के मुताबिक यह बयान धार्मिक उग्रवाद की खुली वकालत हैअंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के खिलाफ हैऔर वैश्विक आतंकवाद के पुराने नैरेटिव की याद दिलाता है
पाकिस्तान को ‘मसीहा’ बताने की कोशिश
आसिम मुनीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम देश इसलिए कमजोर हैं क्योंकि उनसे तकनीक “चुरा ली गई”, जबकि पाकिस्तान के पास हर जरूरी उपकरण और तकनीक मौजूद है।“पाकिस्तान से आपको जो भी मदद चाहिए, वह आपके दरवाज़े पर उपलब्ध होगी।”यह बयान ऐसे समय आया है जब—पाकिस्तान अरबों डॉलर के कर्ज में डूबा है
IMF के सहारे देश की अर्थव्यवस्था चल रही है विदेशी मुद्रा भंडार खतरनाक स्तर तक गिर चुका हैऔर खुद पाक सेना के बजट पर सवाल उठ रहे हैं
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस दावे को “खोखला आत्ममुग्धता भाषण” करार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषण: असफलताओं से ध्यान भटकाने की रणनीति वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि“जब भी पाकिस्तान आंतरिक संकट में फंसता है, उसकी सेना धार्मिक उन्माद और इस्लामी एकजुटता का कार्ड खेलती है।”उनके अनुसार—पाकिस्तान आज वैश्विक मंच पर हाशिये पर है
FATF की निगरानी की छाया अभी पूरी तरह हटी नहीं हैआतंकी नेटवर्क को लेकर उसकी साख बेहद खराब है ऐसे में मुनीर का यह बयान कट्टरपंथ को निर्यात कर अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
रक्षा और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों ने इस बयान को“वैचारिक आतंकवाद” बताया है।एक सुरक्षा विश्लेषक के अनुसार—“जब किसी देश का सैन्य प्रमुख खुले मंच से धार्मिक दुश्मनों की बात करता है, तो यह केवल बयान नहीं, बल्कि संभावित हिंसा का संकेत होता है।”विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान अफ्रीका और पश्चिम एशिया में पहले से अस्थिर क्षेत्रों को और भड़का सकते हैंआतंकी संगठनों को वैचारिक खाद मिलती हैऔर भारत सहित दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर भी असर पड़ता है
भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
हालांकि भारत सरकार की ओर से इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि“भारत ऐसे किसी भी धार्मिक-आधारित सैन्य आह्वान को क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा मानता है।”अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले ही पाकिस्तान को धर्म आधारित राजनीति और सेना-केंद्रित सत्ता संरचना के लिए आलोचना के घेरे में रखता है।
निष्कर्ष:
शांति नहीं, टकराव की भाषाआसिम मुनीर का यह बयान शांति का संदेश नहीं सहयोग की अपील नहीं बल्कि टकराव, डर और विभाजन की भाषा है जब एक देश का सैन्य प्रमुख धर्म को हथियार और खुद को मसीहा बताने लगे,तो यह न सिर्फ उसके अपने देश, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी होती है।
आज सवाल यह नहीं है कि मुस्लिम दुनिया किस दर्द में है,बल्कि यह है कि क्या पाकिस्तान की सेना उस दर्द का इलाज है—या खुद उसकी सबसे बड़ी वजह?
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