बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ वाशिंगटन, 12 दिसंबर
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी अब खुलकर दुनिया के सामने आ गई है। शपथ ग्रहण दिवस से ही इस युद्ध को “24 घंटे में खत्म करवाने” का दावा करने वाले ट्रंप अब मान रहे हैं कि हालात उनके नियंत्रण से तेजी से बाहर जा रहे हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने जो चेतावनी दी, उसने वैश्विक कूटनीति और सामरिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
ट्रंप का स्पष्ट बयान—“अगर इस तरह हालात बिगड़ते रहे, तो तीसरा विश्व युद्ध अब दूर नहीं। पिछले महीने 25,000 लोग मारे गए—ज्यादातर सैनिक, कुछ आम लोग भी। मैं चाहता हूँ कि यह खून-खराबा रुके।”उनका यह बयान न सिर्फ अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रहा है बल्कि यूरोप, NATO और एशिया के रणनीतिक विश्लेषकों के लिए भी खतरे की घंटी है।
ट्रंप की निराशा: जंग को रोकने के प्रयासों का विफल होनाट्रंप ने कड़ा लहजा अपनाते हुए कहा कि अमेरिका युद्ध का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं है, पर दोनों पक्ष—यूक्रेन और यूरोप—वॉशिंगटन की मध्यस्थता चाहते हैं। इसके बावजूद समाधान फिसलता जा रहा है।उन्होंने वित्तीय सहायता को लेकर पुरानी नाराजगी दोहराई—“
हमने यूक्रेन को 300–350 अरब डॉलर दिए और बदले में हमें कुछ नहीं मिला।”यह सीधा संकेत है कि ट्रंप प्रशासन युद्ध जारी रहने के लिए जिम्मेदारी यूक्रेन और यूरोपीय साझेदारों पर डाल रहा है।रक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
1. “ट्रंप की चेतावनी महज बयान नहीं, खतरे का संकेत है”—डॉ. रिचर्ड होलमैन, अमेरिकी रक्षा रणनीति विशेषज्ञहोलमैन कहते हैं कि पिछले दो महीनों में रूसी हमलों की तीव्रता बढ़ी है और यूक्रेनी रक्षा तंत्र पर भारी दबाव है। इस स्थिति में अमेरिका की हिचकिचाहट युद्ध को लंबा कर रही है, जिससे रूस और NATO की सीधी भिड़ंत की संभावना बढ़ जाती है।“युद्ध का दायरा बढ़ा तो यह यूरोप से एशिया तक फैल सकता है।
2. “ट्रंप की भाषा बताती है कि अमेरिका रणनीतिक पीछे हटने की तैयारी में है”—एंड्रयू मिशेल, यूरोपीय भू-राजनीतिक विश्लेषक मिशेल का मानना है कि ट्रंप यूक्रेन को दिए जा रहे फंड से खुद को धीरे-धीरे अलग करने का आधार बना रहे हैं।वे कहते हैं,“अगर NATO की सप्लाई कमजोर हुई तो यूक्रेन की लड़ाई महीनों में नहीं, हफ्तों में बदल जाएगी।”
3. “अगर अमेरिका पीछे हटता है तो चीन और रूस आगे बढ़ेंगे”—जनरल हरुतो नाकामुरा, एशियाई सैन्य विशेषज्ञ नाकामुरा चेतावनी देते हैं कि अमेरिका के पीछे हटते ही रूस-चीन धुरी मजबूत होगी और इससे ताइवान, दक्षिण चीन सागर और यूरोप सभी क्षेत्रों में टकराव की आशंका बढ़ेगी।“तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हमेशा किसी एक मोर्चे से नहीं होती, वह कई मोर्चों के धधकने से होती है।”
यूक्रेन की नाराजगी: मदद कम, उम्मीदें टूटीं यूक्रेन
का मानना है कि ट्रंप के आते ही सैन्य सपोर्ट की गति कम हुई है। रूस के लगातार हमलों के बीच मिसाइल रक्षा प्रणाली, गोला-बारूद और हथियारों की उपलब्धता उसकी सबसे बड़ी चुनौती है।यूक्रेनी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप की “थकान वाली राजनीति” युद्ध को रूस के पक्ष में मोड़ सकती है।
युद्ध कब रुकेगा?
विशेषज्ञों के 3 संभावित परिदृश्य
1. अमेरिका मध्यस्थ बने और रूस-यूक्रेन को मजबूरन बातचीत करनी पड़ेलेकिन यह तभी संभव है जब दोनों पक्ष युद्धविराम के लिए तैयार हों—जो फिलहाल नहीं दिख रहा।
2. अमेरिका सैन्य सहायता कम करे और यूक्रेन पीछे हटने को मजबूर होइस स्थिति में रूस रणनीतिक बढ़त हासिल कर लेगा।
3. NATO की सीधी दखल से युद्ध यूरोप तक फैलेयही वह खतरा है जिसे “तीसरे विश्व युद्ध” की चेतावनी माना जा रहा है।
निष्कर्ष:
ट्रंप की चेतावनी हकीकत के और करीब?
ट्रंप का बयान किसी राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा एक वास्तविक खतरे की ओर इशारा करता है।रूस-यूक्रेन युद्ध अपनी चरम स्थिति में है, अमेरिका राजनीतिक दबाव में है, यूरोप थक चुका है और यूक्रेन कमजोर पड़ रहा है।ऐसे में विशेषज्ञों की राय एक ही दिशा में इशारा करती है—
अगर हालात नहीं सुधरे तो यह संघर्ष सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा…
दुनिया एक बड़े भू-राजनीतिक भूचाल की कगार पर खड़ी है।
