बी के झा
NSK

नई दिल्ली/बेंगलुरु , 29 नवंबर
कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई दिनों से चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व विवाद के बीच शनिवार को एक बड़ा राजनीतिक संकेत मिला। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DKS) ने अपने घरों में बैठकर साथ ब्रेकफास्ट किया, और उसके बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ किया कि पार्टी में “कोई मतभेद नहीं” है। यह बैठक कांग्रेस हाईकमान के विशेष निर्देश पर हुई, ताकि दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी को कम किया जा सके।ब्रेकफास्ट मीटिंग की खुशबू से निकला ‘एकता का संदेश’सिद्धारमैया ने पत्रकारों से कहा—“ब्रेकफास्ट अच्छा था। हमने वहां किसी के बारे में बात नहीं की, सिर्फ खाना खाया। हम साथ हैं, आगे भी रहेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी तरह का कोई भ्रम नहीं होगा।साफ कहा—“हम हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने बेवजह भ्रम पैदा किया है।”सिद्धारमैया ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा पर भी तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी–जेडीएस की संख्या इतनी नहीं है कि कांग्रेस सरकार को चुनौती दे पाए।कहा—“हमारे 140 विधायक हैं, वे सिर्फ 78 लेकर क्या कर लेंगे?”
शिवकुमार बोले—CM के साथ थे, हैं और रहेंगे उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी बेहद सहज अंदाज में कहा—“हम दोनों कांग्रेस के सिपाही हैं। कर्नाटक के लोगों ने हम पर भरोसा किया है। हम उनके वादों को पूरा करेंगे।”उन्होंने यह भी कहा कि“कोई ग्रुपबाजी नहीं है… हम साथ मिलकर 2028 के चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।”शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा।कहा कि केंद्र ने गन्ना, मक्का और राज्य से जुड़े कई वादों को पूरा नहीं किया है, इसलिए कर्नाटक के सांसदों को एकजुट होकर राज्य का पक्ष रखना चाहिए।सत्ता-साझेदारी का विवाद: असली वजह क्या थी?कर्नाटक में विवाद की जड़ 2023 से ही है, जब सत्ता मिलने के बाद एक “अनौपचारिक समझौते” की चर्चा चली कि—
2.5 साल सिद्धारमैया CM
2.5 साल डीके शिवकुमार CM सिद्धारमैया का आधा कार्यकाल 20 नवंबर 2025 को पूरा हो चुका है। इसी के बाद शिवकुमार के समर्थक सक्रिय हो गए। हाल ही में मैसूर—जो सिद्धारमैया का गृह जिला है—में शिवकुमार को CM बनाने की मांग वाली रैली भी हुई।लेकिन दोनों नेता लोगों को शांत कर रहे हैं।
सिद्धारमैया बोले—“मेरे पूरे पांच साल पूरे करने में मुझे कोई दिक्कत नहीं। पर अंतिम फैसला हाईकमान लेगा।”शिवकुमार ने भी अपने समर्थकों से कहा—“धैर्य रखें, पार्टी का जो आदेश होगा, वह स्वीकार होगा।”क्या कांग्रेस में अब सुकून लौट आया है?इस संयुक्त ब्रेकफास्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस ने एक संकेत जरूर दिया है—
कांग्रेस फिलहाल खुली लड़ाई नहीं चाहती।कर्नाटक उसके लिए केंद्र की राजनीति में अहम राज्य है, इसलिए हाईकमान हर कीमत पर एकता बनाए रखना चाहता है।दोनों नेताओं ने चुनाव रणनीति, लोकल बॉडी चुनाव, और 2028 में सरकार दोहराने पर चर्चा की।यानी कांग्रेस अपनी ऊर्जा आंतरिक लड़ाई नहीं, बल्कि चुनावी तैयारी पर लगाना चाहती है।
निष्कर्ष:
ब्रेकफास्ट ने बिगड़ी बातों को ‘पचाकर’ ठीक किया?
कर्नाटक में पिछले महीनों से कांग्रेस में तनाव था, लेकिन यह ब्रेकफास्ट मीटिंग पार्टी के लिए राहत की खबर लाती है। दोनों शीर्ष नेता कैमरे के सामने साथ दिखे, एक-दूसरे की तारीफ की और कहा कि—“कोई मतभेद नहीं…जो भी होगा, हाईकमान तय करेगा।हम 2028 में भी साथ रहेंगे।”राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तालमेल शायद स्थायी न हो, लेकिन फिलहाल कांग्रेस के लिए यह राहत की सांस है—और कर्नाटक की सत्ता सुचारु रूप से चलने के लिए ज़रूरी भी।
