बी के झा
NSK

किशनगंज ( बिहार ) 1 दिसंबर
बिहार के किशनगंज में पुलिस ने रविवार देर रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गोल्ड तस्करी के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया। सीमा से सटे रामपुर चेकपोस्ट पर वाहन जांच के दौरान एक कार से 1 किलो 400 ग्राम सोना बरामद किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये आंकी गई है।बरामदगी के बाद पुलिस ने वाहन में मौजूद युवक को हिरासत में ले लिया है, जिसकी पहचान कोलकाता निवासी मिलिंद सामंतों के रूप में की गई है। प्रारंभिक जांच में यह मामला पूर्वोत्तर मार्ग से संचालित एक बड़े गोल्ड तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा हुआ लग रहा है।कोलकाता से सिलीगुड़ी जा रहा था सोना, सीमा क्षेत्र बना पसंदीदा रूप पुलिस के अनुसार जब्त सोना कोलकाता से सिलीगुड़ी ले जाया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियाँ मानती हैं कि भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट मौजूद जिले तस्करों के लिए लंबे समय से सुरक्षित ट्रांजिट पॉइंट बने हुए हैं।
किशनगंज, इस रूट का सबसे सक्रिय हिस्सा माना जाता है—जहाँ से विदेशी सोने की खेप अक्सर उत्तर बंगाल और उसके बाद देश के बड़े बाजारों तक पहुँचाई जाती है।
एसपी बोले—“बड़ा नेटवर्क हो सकता है सक्रिय
”किशनगंज पुलिस अधीक्षक सागर कुमार ने बताया कि रात में चेकिंग के दौरान संदिग्ध कार को रोका गया। तलाशी में भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ।
उन्होंने कहा:“मामले में बड़ी साजिश की संभावना है। आरोपी के मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल्स और आवागमन के पूरे रूट की जांच की जा रही है।”पुलिस का मानना है कि यह बरामदगी किसी संगठित गोल्ड तस्करी रैकेट की एक कड़ी भर है, जिसके तार बंगाल, उत्तर-पूर्व और पड़ोसी देशों तक फैले हो सकते हैं।आयकर विभाग को जानकारी, संयुक्त जांच शुरू बरामदगी के बाद पुलिस ने तुरंत इसकी सूचना इनकम टैक्स विभाग को दी। विभाग की टीम कटिहार से किशनगंज पहुंच चुकी है और सदर थाना में आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं।जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि—
सोने की मनी-ट्रेल कहाँ से शुरू हुई,खेप का अंतिम ठिकाना कौन सा था,कार और आरोपी से जुड़े अन्य लोग कौन हैं,और क्या यह नेटवर्क पहले भी इस मार्ग का उपयोग कर चुका है।मोबाइल और डिजिटल ट्रेल से बड़े खुलासों की उम्मीद सुरक्षा एजेंसियाँ अब आरोपी के मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री, पैमेंट ट्रांजैक्शन और लोकेशन डेटा की तकनीकी जांच कर रही हैं।अधिकारियों का मानना है कि इससे तस्करी नेटवर्क में शामिल मास्टरमाइंड, कूरियर चैन, और फंडिंग लिंक का पता चल सकता है।यह भी आशंका है कि बरामदगी महज एक छोटी खेप है और इससे कई गुना बड़ी मात्रा में सोना अन्य वाहनों के माध्यम से पार किया जाता रहा है।
सीमा सुरक्षा पर उठे सवाल हालिया बरामदगियों के बीच यह घटना दोबारा इस बात को रेखांकित करती है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सोना, ड्रग्स और फॉरेन गुड्स की तस्करी लगातार बढ़ रही हैऔर तस्कर रोज नए तरीके अपना रहे हैं।सुरक्षा एजेंसियाँ मानती हैं कि इस क्षेत्र में कस्टम, एसएसबी, पुलिस और इंटेलिजेंस यूनिट्स को मिलकर कार्रवाई तेज करनी होगी।
