बी के झा
NSK

नई दिल्ली/पटना, 18 दिसंबर
बिहार के कोसी–सीमांचल क्षेत्र के लिए एक बड़ी बुनियादी सौगात की घोषणा ने उम्मीदों को नया पंख दे दिया है। खगड़िया से पूर्णिया तक 143 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क के निर्माण का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। करीब 4000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है और अब केवल नरेंद्र मोदी कैबिनेट की औपचारिक स्वीकृति का इंतजार है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही अगले एक से डेढ़ महीने में निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।संसद में उठा मुद्दा, सदन से आई राहत की खबर यह मुद्दा लोकसभा में उस वक्त उठा, जब लोजपा (रामविलास) के सांसद राजेश वर्मा ने प्रश्नकाल में खगड़िया–पूर्णिया मार्ग की बदहाल स्थिति का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि बेगूसराय तक फोरलेन है, लेकिन उसके आगे खगड़िया से पूर्णिया तक अब भी सिंगल लेन सड़क है, जहां आए दिन सड़क हादसे होते हैं। वर्षों से एनएच-31 को फोरलेन बनाने की मांग लंबित है।जवाब में नितिन गडकरी ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा,143 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना को 4000 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी जा चुकी है। कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा गया है और 10–15 दिनों में अप्रूवल मिल जाएगा। टेंडर तैयार है, काम जल्द शुरू होगा।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि फोरलेन बनने के बाद इस रूट पर दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।महेशपुर–पूर्णिया सड़क पर देरी का सचइसी दौरान सांसद ने एनएच-107 (महेशपुर–सोनबरसा–सहरसा–मधेपुरा–मुरलीगंज–पूर्णिया) सड़क परियोजना में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। यह 177 किलोमीटर लंबी सड़क 2018 में स्वीकृत हुई थी और 2020 तक पूरी होनी थी, लेकिन समयसीमा बार-बार बढ़ती गई।इस पर गडकरी ने साफ शब्दों में कहा कि देरी के पीछे कई कारण रहे—
राज्य सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण में विलंब,अलाइनमेंट में बदलाव,ठेकेदार की वित्तीय स्थिति खराब होना,रेलवे से आरओबी (रेल ओवर ब्रिज) डिजाइन की मंजूरी में देरी।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि पैकेज-1 मार्च 2026 तक और आरओबी अगस्त 2026 तक पूरा हो जाएगा, जबकि पैकेज-
2 का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, खगड़िया–पूर्णिया फोरलेन केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि कोसी–सीमांचल के लिए राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अहम कदम विश्लेषक प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार मानते हैं,यह इलाका लंबे समय से विकास के मामले में हाशिए पर रहा है। अगर यह सड़क समय पर बनती है, तो यह केंद्र सरकार के ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर फोकस’ को जमीन पर उतारने का मजबूत उदाहरण बनेगी।”स्थानीय लोगों में उम्मीद और सतर्कता
स्थानीय लोगों में खुशी तो है, लेकिन अनुभव के चलते सतर्कता भी दिख रही है। खगड़िया के व्यवसायी राजेश साह कहते हैं,अगर फोरलेन बन गई तो पूर्णिया, सहरसा और दरभंगा तक व्यापार आसान हो जाएगा। लेकिन हम चाहते हैं कि काम सिर्फ घोषणा तक सीमित न रहे।पूर्णिया के एक छात्र नेता का कहना है कि बेहतर सड़क से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी जरूरी है।विपक्ष का सवाल: घोषणा या ज़मीनी हकीकत?
विपक्षी दलों ने इस घोषणा को लेकर सरकार पर सवाल भी खड़े किए हैं। राजद नेताओं का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही बड़ी परियोजनाओं की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने में देर होती है।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी के कारण पहले भी कई सड़क परियोजनाएं लटकी रहीं।
निष्कर्ष:
विकास की सड़क, सियासत की परीक्षा
खगड़िया–पूर्णिया फोरलेन परियोजना अगर तय समय पर शुरू होकर पूरी होती है, तो यह कोसी–सीमांचल के लिए ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है। लेकिन देरी और अड़चनों का पिछला अनुभव यह भी याद दिलाता है कि घोषणाओं से आगे बढ़कर अब क्रियान्वयन की परीक्षा शुरू होने वाली है। जनता की निगाहें अब कैबिनेट की मंजूरी और जमीन पर उतरते बुलडोज़रों पर टिकी हैं—
क्योंकि इसी से तय होगा कि यह सड़क विकास की रफ्तार बनेगी या फिर एक और अधूरी कहानी।
