गंदी हूं, गंदी किडनी लगवाई… मेरी जैसी गलती कोई बेटी न करे, रोहिणी आचार्या के भावुक पोस्ट ने लालू परिवार में मचा दिया तूफ़ान

बी के झा

पटना , 16 नवंबर

बिहार की राजनीति में लंबे समय बाद ऐसा भावनात्मक विस्फोट देखने को मिला है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या के लगातार सामने आ रहे तीखे और दर्दभरे पोस्ट ने न केवल राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि लालू परिवार की कथित अंदरूनी कड़वाहट को भी पहली बार इतने खुले रूप में सामने ला दिया है।

चुनावी हार के बाद पहले ही दवाब में चल रहे आरजेडी खेमे को रोहिणी के पोस्ट ने और मुश्किल में डाल दिया है।“मुझे गंदी कहा गया, मेरी किडनी को गंदा बताया गया” — रोहिणी

रोहिणी ने अपने नवीनतम पोस्ट में चौंकाने वाले आरोप लगाए—उन्होंने लिखा:मुझे गालियां दी गईं। कहा गया कि मैं गंदी हूं और मैंने अपने पिता को ‘गंदी किडनी’ लगवाई। कहा गया करोड़ों रुपये लेकर टिकट के बदले यह किया।यह आरोप न सिर्फ राजनीतिक रूप से विस्फोटक हैं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहद दर्दनाक हैं—क्योंकि वह किडनी वही है जिसने वर्षों पहले लालू यादव का जीवन बचाया था।

“मेरी जैसी गलती कोई बेटी न करे” — एक दर्दभरी अपीलरोहिणी ने अपने शब्दों में एक ऐसी चुभन रखी है जो किसी भी बेटी के दिल को बिखेर सकती है।उन्होंने शादीशुदा बेटियों से अपील की:जब आपके मायके में बेटा-भाई मौजूद हो, तो भूलकर भी अपने पिता को बचाने मत जाना… अपने भाई या उसके किसी हरियाणवी दोस्त की किडनी लगवा देना।उन्होंने यह भी लिखा कि आज की राजनीति में एक बेटी का त्याग भी जांच, तंज और आरोपों के तराजू में तौल दिया जाता है।

“अपने परिवार, बच्चों, ससुराल को देखा नहीं… इसे गुनाह बना दिया गया”एक अन्य पोस्ट में रोहिणी ने स्पष्ट कहा कि—मैंने अपने पिता को बचाते समय अपने तीनों बच्चों, पति, ससुराल—किसी के बारे में नहीं सोचा। यह मेरा त्याग था, लेकिन आज इसे मेरे ही खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है।रोहिणी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में चुनावी हलचल अब भी धीमी नहीं पड़ी और राजनीतिक गलियारों में कयासों की लहरें जारी हैं।

“चप्पल उठाकर मारने की कोशिश हुई”— एयरपोर्ट वाला विवाद शनिवार को एक और बड़ा आरोप सामने आया था।रोहिणी ने दावा किया था:हार का कारण पूछने पर मेरे ऊपर चप्पल उठाई गई। गंदी-गंदी गालियां दी गईं। अपमानित किया गया।

इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि इस अपमानजनक माहौल में उन्हें मजबूर होकर अपने बूढ़े माता-पिता का घर छोड़ना पड़ा।परिवार से संबंध तोड़े, राजनीति छोड़ी

चुनावी परिणाम के अगले ही दिन रोहिणी ने:राजनीति छोड़ने परिवार से नाता तोड़नेकी घोषणा कर दी थी।उनके शब्दों ने सभी को झकझोर दिया:मैं अब टूट चुकी हूं। मेरे जैसी कोई बेटी न हो।”

लालू परिवार में दरार या चुनावी तनाव? सवाल कई… जवाब कोई नहींअब तक लालू यादव या तेजस्वी यादव की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि:यह सिर्फ चुनावी हार का झटका नहींबल्कि परिवार के भीतर वर्षों से उभरते तनाव का विस्फोट हैऔर पहली बार इस कदर खुला, सार्वजनिक और तीखा

लालू परिवार में चल रही इस उथल-पुथल ने आरजेडी की राजनीतिक भविष्य-यात्रा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।एक राजनीतिक परिवार की सबसे निजी पीड़ा सार्वजनिक हो चुकी है

रोहिणी की पोस्टों में एक बेटी की कड़वाहट से ज्यादा, एक थका हुआ हृदय है।एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसने राजनीति की चमक-दमक में निजी भावनाओं का भी मूल्य तय कर दिया

।निष्कर्ष:

त्याग जब तिरस्कार बन जाए, परिवार तब टूटता है… राजनीति नहींयह घटना यह साफ कर रही है कि—

जब राजनीति परिवार पर हावी हो जाती हैजब त्याग को सौदेबाज़ी बताकर कुचला जाता हैं जब सम्मान की जगह आरोप ले लेते हैंतो रिश्तों में बचता है केवल अभिमान और अविश्वास।रोहिणी की पीड़ा सिर्फ एक बेटी की कहानी नहीं—यह उन लाखों बेटियों की भी कहानी है जो अपने मायके, अपने पिता, और अपने परिवार के लिए सबकुछ न्योछावर कर देती हैं—और बदले में सवाल, तंज और अपमान पाती हैं।

NSK

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