बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 19 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच एक बार फिर धर्म और राजनीति का समीकरण गर्मा गया है।केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के “मुसलमान नमकहराम” वाले बयान ने राज्य के सियासी माहौल में आग लगा दी है।जहां विपक्षी दलों ने इस बयान को “चुनावी ध्रुवीकरण की साजिश” बताया है, वहीं जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने गिरिराज के बयान को “भाषाई संदर्भ में सही” ठहराते हुए समर्थन दिया है।
गिरिराज सिंह का विवादित बयान — “जो उपकार नहीं माने, वही नमकहराम है”नवादा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा —मोदी सरकार आयुष्मान भारत, मुफ्त अनाज, किसान सम्मान निधि और जनधन योजनाओं का लाभ हर धर्म और जाति के लोगों को देती है।मुसलमान समाज भी इन योजनाओं का फायदा उठा रहा है, लेकिन नरेंद्र मोदी को वोट नहीं देता।जो उपकार नहीं माने, उसे नमकहराम ही कहा जाएगा।इस बयान के बाद चुनावी बिहार में बवाल मच गया।गिरिराज सिंह इससे पहले भी अपने बयानों से कई बार विवादों में रहे हैं।उन्होंने कहा था —देश के विभाजन के समय हमारे पूर्वजों से गलती हुई।
अगर उस वक्त सारे मुसलमान पाकिस्तान चले गए होते, तो आज भारत में इतनी समस्याएँ नहीं होतीं।”
JDU के नीरज कुमार ने गिरिराज के बयान का बचाव कियागिरिराज के बयान पर जब विवाद बढ़ा तो जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने सामने आकर कहा —मैंने गिरिराज सिंह का पूरा भाषण सुना है। उन्होंने जो कहा है, वह भाषाई तौर पर कहा है।जब नरेंद्र मोदी की योजनाओं का लाभ सबको मिल रहा है, तो राजनीतिक मजदूरी भी बनती है।हर किसी को अपने भाव व्यक्त करने का अधिकार है।
नीरज कुमार के इस बयान ने न केवल विपक्ष को हमलावर बना दिया,बल्कि जेडीयू के भीतर भी विचारों का मतभेद उजागर कर दिया।
जेडीयू नेता मनीष कुमार पहले ही गिरिराज को प्रधानमंत्री मोदी से “संवेदनशीलता” सीखने की नसीहत दे चुके हैं।
विपक्ष का पलटवार — “बिहार में सांप्रदायिक कार्ड खेल रही है BJP”महागठबंधन ने गिरिराज सिंह पर धर्म के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाया है।आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा —जब भी प्रधानमंत्री मोदी चुनावी मैदान में उतरने वाले होते हैं, अमित शाह और उनके सिपाही जानबूझकर नफरत का माहौल बनाते हैं।गिरिराज सिंह का यह बयान उसी स्क्रिप्ट का हिस्सा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुमार आशीष ने कहा —जो मंत्री संविधान की शपथ लेकर बैठे हैं, वे अगर धर्म के आधार पर नागरिकों को ‘नमकहराम’ कहें,तो यह सिर्फ बयान नहीं, भारत के लोकतंत्र का अपमान है।”
मुस्लिम समुदाय में नाराजगी, माहौल तनावपूर्ण
श्री गिरिराज सिंह के बयान के बाद मुस्लिम समाज में गहरी नाराजगी है।
दरभंगा, नवादा और सीतामढ़ी जैसे इलाकों में कई संगठनों ने इसकी निंदा की है।
मौलाना सैफुद्दीन रहमानी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा —हम किसी योजना का लाभ लेते हैं तो वह हमारा हक है, किसी का एहसान नहीं।इस देश का टैक्स हर नागरिक देता है — चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान।”
BJP के लिए फायदा या उल्टा असर?
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि गिरिराज सिंह का बयान ध्रुवीकरण की कोशिश तो है,लेकिन यह बिहार की मिश्रित सामाजिक बनावट में उल्टा असर भी डाल सकता है।
पटना विश्वविद्यालय के राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अमरेश तिवारी कहते हैं गिरिराज सिंह ऐसे बयान देकर अपने कोर वोट बैंक को जरूर साधते हैं,पर बिहार की जनता अब धर्म के नाम पर नहीं, काम और उम्मीदवार की विश्वसनीयता पर वोट देती है।
NDA और JDU के रिश्तों में फिर दरार?
जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —नीरज कुमार का यह बयान अनावश्यक था।जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर चुप्पी साधी थी, तो व्यक्तिगत राय देने की कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन उनके बड़ बोले बयान से NDA के भीतर अनकहे तनाव को फिर सतह पर ले आया है।
गिरिराज सिंह बीजेपी के “फायरब्रांड हिंदुत्व चेहरा” माने जाते हैं,जबकि नीतीश कुमार हमेशा “समावेशी और सेक्युलर छवि” पेश करने की कोशिश करते रहे हैं।
निष्कर्ष:
बिहार की सियासत में “धर्म बनाम विकास” की जंग तेज एक ओर गिरिराज सिंह की तल्ख जुबान, दूसरी ओर जेडीयू की असहज स्थिति —बिहार की राजनीति एक बार फिर धर्म बनाम विकास की बहस में उलझ गई है
जैसे-जैसे चुनावी तारीखें करीब आ रही हैं,वैसे-वैसे नेताओं के शब्द और बयान और ज्यादा धारदार होते जा रहे हैं।अब सवाल यह है —क्या गिरिराज सिंह जैसे बयान से एनडीए को चुनावी फायदा होगा,या बिहार की जनता “नमकहरामी के नारे” से आगे बढ़कर काम और विकास को वोट देगी?
ग्राउंड नोट
:बिहार की जनता राजनीति की नब्ज़ पहचानती है।वह जानती है कि कब बात “धर्म की आड़ में सत्ता की भूख” की होती है।इसलिए इस बार के चुनाव में गिरिराज का बयान या तो एनडीए के लिए हथियार बनेगा,या बूमरैंग — फैसला जनता के हाथ में है।
