बी के झा
NSK

नई दिल्ली/मथुरा, 11 दिसंबर
गुरुवार सुबह मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र के तीन गांव— देवसेरस, मालीपुरा और नगला अतिया— में अचानक पुलिस बल की भारी तैनाती देख ग्रामीण स्तब्ध रह गए। देखते ही देखते करीब चार IPS अधिकारियों, कई थानों की पुलिस, दर्जनों गाड़ियों और 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने गांवों को चारों दिशाओं से घेर लिया। इसके बाद शुरू हुआ तेज़-तर्रार छापेमारी अभियान।पुलिस और PAC जवानों ने गांवों के अंदर घुसकर दौड़ा-दौड़ाकर लोगों को पकड़ा। इस कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।
अचानक इतनी बड़ी संख्या में फोर्स देखकर गांवों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया।आधी रात के बाद शुरू हुई तैयारी, सुबह 4 बजे ‘ऑपरेशन टटलू’ शुरू बुधवार की देर रात जैसे ही तारीख बदलने को हुई, पुलिस ने तीनों गांवों के लिए गुप्त रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया।अधिकांश ग्रामीण गहरी नींद में थे कि सुबह होते-होते गांवों के बाहर पुलिस की बसें और दर्जनों गाड़ियां आ खड़ी हुईं।सुबह 4 बजे के आसपास चारों IPS अधिकारी और भारी पुलिस बल ने संकेत मिलते ही एक साथ तीनों गांवों में प्रवेश किया।
घेराबंदी इतनी सघन थी कि गांव की एक भी गली-चौराहे से कोई बिना जांच बाहर नहीं जा सकता था।गांवों में हड़कंप: पुलिस को देखते ही कई लोग भागने लगे, दौड़ा-दौड़ाकर पकड़ा गया जैसे ही ग्रामीणों की नींद टूटी और उन्होंने चारों तरफ बंदूकें लिए पुलिस कर्मियों को देखा, गांवों में हलचल मच गई।कई संदिग्ध घरों से निकलकर भागने लगे, लेकिन पुलिस और PAC की संयुक्त टीमों ने उन्हें दौड़ाकर दबोच लिया।कई घरों में अचानक तलाशी हुई।कुछ लोग छतों के रास्ते भागने की कोशिश करते पकड़े गए।एक दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।
क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
साइबर ठगी का गढ़ बने थे ये गांव पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह अचानक की गई धरपकड़ साधारण छापेमारी नहीं, बल्कि एक बड़े अभियान का हिस्सा थी।मथुरा के ये तीन गांव पिछले कुछ समय से साइबर अपराधियों का हॉटस्पॉट बनते जा रहे थे—जहाँ से देशभर मेंऑनलाइन KYC फ्रॉड,बैंकिंग ठगी,नकली ऐप के जरिए वसूली जैसे अपराध संचालित हो रहे थे।इसी वजह से जिला पुलिस ने इस अभियान का नाम दिया— ‘
ऑपरेशन टटलू’,
जिसका अर्थ है ‘ठगों की धरपकड़’।चार IPS की संयुक्त कमान, कई जिलों की पुलिस शामिल इस विशेष अभियान का नेतृत्व कर रहे थे—एसपी देहात,एसपी क्राइम,साथ ही दो अन्य आईपीएस अधिकारी।पूरा ऑपरेशन अत्यंत गुप्त रखा गया ताकि कोई भी संदिग्ध पहले से सतर्क न हो सके।पुलिस ने तीनों गांवों को “टैक्टिकल सर्किल” की तरह घेरकर बिना किसी चूक के छापेमारी की।मिलें सबूत: मोबाइल फोन, फर्जी सिम, हथियार और डिजिटल ठगी के उपकरण छापेमारी में हिरासत में लिए गए लोगों से कई मोबाइल फोन,फर्जी सिम कार्ड,संदिग्ध बैंक खातों के विवरण,इंटरनेट राउटर और डिवाइस,तथा कुछ असलहे भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस का अनुमान है कि ये गैंग कई राज्यों में फैले ठग नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।पुलिस की चेतावनी: अब बड़े नेटवर्क पर होगी बड़ी कार्रवाई जिला पुलिस ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई सिर्फ पहला चरण है।साइबर ठगी से जुड़े पर्दे के पीछे के लोग, फर्जी कॉल सेंटर और पैसों को आगे बढ़ाने वाले “म्यूल” भी पुलिस के रडार पर हैं।
ग्रामीणों में दहशत, पर ईमानदार नागरिकों ने राहत की सांस ली एक तरफ पुलिस की इतनी बड़ी कार्रवाई से सुबह-सुबह गांवों में दहशत फैल गई,वहीं दूसरी तरफ स्थानीय ईमानदार किसानों और परिवारों ने राहत की सांस ली किअब साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर लगाम लगेगी।
निष्कर्ष
मथुरा के तीन गांवों में किया गया ‘ऑपरेशन टटलू’ सिर्फ एक छापेमारी नहीं, बल्कि यह संदेश है किउत्तर प्रदेश पुलिस अब साइबर अपराध के खिलाफ जमीनी स्तर पर निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार है।इस अभियान ने यह भी दिखा दिया कि अपराध चाहे डिजिटल दुनिया से जुड़ा हो,लेकिन इसकी जड़ें अक्सर गांवों की गलियों तक फैली होती हैं—
जिन्हें उखाड़ फेंकने की जरूरत है।
