जापान में भूकंप से कांपी धरती: पश्चिमी प्रांतों में दहशत, अगले कई दिनों तक झटकों की चेतावनी

बी के झा

NSK

टोक्यो/शिमाने, 6 जनवरी

भूकंप संभावित देशों की सूची में शीर्ष पर रहने वाले जापान में एक बार फिर धरती की बेचैनी ने लोगों की धड़कनें बढ़ा दीं। स्थानीय समयानुसार मंगलवार तड़के पश्चिमी जापान के शिमाने और पड़ोसी तोटोरी प्रांत में एक के बाद एक कई भूकंप आए, जिनमें सबसे शक्तिशाली झटके की तीव्रता 6.2 मापी गई। तेज झटकों के कारण लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए, जबकि कई इलाकों में लंबे समय तक धरती के कंपन को महसूस किया गया।जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार पहला और सबसे तीव्र भूकंप सुबह 10 बजकर 18 मिनट (जापान मानक समय) पर आया। इसका केंद्र शिमाने प्रांत के निकट लगभग 6 मील (करीब 10 किलोमीटर) की उथली गहराई पर स्थित था। जापान के भूकंपीय तीव्रता पैमाने पर इसकी तीव्रता 5 से अधिक दर्ज की गई, जो इमारतों और बुनियादी ढांचे को हिला देने के लिए पर्याप्त मानी जाती है।पहले झटके के तुरंत बाद एक और भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 5 से कम आंकी गई। इसके बाद भी देर सुबह तक कई हल्के और मध्यम झटके दर्ज किए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता और भय का माहौल बना रहा।

सुनामी का खतरा नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरीभूकंप के बाद राहत की बात यह रही कि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इन झटकों के कारण किसी भी प्रकार की सुनामी का खतरा नहीं है। हालांकि एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दो से तीन दिनों में, और संभवतः लगभग एक सप्ताह तक, 5 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप दोबारा आ सकते हैं।अधिकारियों ने विशेष रूप से पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भूकंप के बाद भूस्खलन, चट्टानों के गिरने और कमजोर इमारतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से पहाड़ी इलाकों की यात्रा न करें और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।जनजीवन पर असर, लेकिन जान-माल की बड़ी क्षति नहींअब तक किसी के घायल होने या जान-माल के बड़े नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई है। दो क्षेत्रीय बिजली कंपनियों ने भी कहा है कि बिजली आपूर्ति और परमाणु अथवा अन्य महत्वपूर्ण संयंत्रों में किसी प्रकार की असामान्य स्थिति नहीं पाई गई है।हालांकि एहतियात के तौर पर कुछ इलाकों में बुलेट ट्रेन (शिंकानसेन) सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई थीं, जिन्हें सुरक्षा जांच के बाद धीरे-धीरे बहाल किया गया। कई इमारतों पर लगे निगरानी कैमरों में तेज कंपन के दृश्य कैद हुए, जो भूकंप की तीव्रता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।भूकंपों की धरती जापान गौरतलब है कि जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। यह देश ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की निरंतर गतिविधि के कारण अक्सर भूकंपीय घटनाएं होती रहती हैं।

जापान ने आधुनिक तकनीक, सख्त निर्माण मानकों और आपदा प्रबंधन प्रणालियों के जरिए भूकंप से होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित करना सीख लिया है, फिर भी हर बड़ा झटका लोगों को प्रकृति की शक्ति का अहसास करा देता है।फिलहाल प्रशासन हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और नागरिकों से शांत रहते हुए सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

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