बी के झा
वॉशिंगटन/बैंकॉक/फ्नॉम पेन्ह, 15 नवंबर
दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी देश—कंबोडिया और थाईलैंड—के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर युद्ध का खतरा पैदा कर दिया था। सीमावर्ती इलाकों में गोलीबारी और झड़पों के बीच यह संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा था कि तभी अमेरिका ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने का दावा किया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति टल गई।एयर फ़ोर्स वन में मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा,“मैंने आज ही एक जंग रोक दी। दोनों देशों के नेताओं से बात की। पहले वे बिल्कुल ठीक नहीं थे, लेकिन अब लगता है वे ठीक रहेंगे।”ट्रंप का दावा है कि अमेरिका की “टैरिफ पॉलिसी” और कूटनीतिक दबाव ने कंबोडिया और थाईलैंड को सीजफ़ायर टूटने से रोकने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि कड़े टैरिफ हथियार के तौर पर अमेरिका के पास असरदार कूटनीतिक साधन साबित हो रहे हैं।पुराना विवाद, नई चिंगारी कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद कोई नई बात नहीं है।
1907 में फ्रांसीसी शासन के दौरान बने नक्शे पर दोनों देशों की व्याख्या अलग-अलग है। यही मतभेद पिछले कई दशकों से बीच-बीच में हिंसक रूप लेता रहा है।जुलाई के अंत में दोनों देशों की सेनाओं के बीच पांच दिन तक घमासान लड़ाई चली थी जिसमें कई सैनिकों और आम लोगों की मौत हुई थी। मलेशिया में हुए आसियान सम्मेलन के दौरान दोनों सरकारों ने एक अस्थायी युद्धविराम को मजबूती दी थी, लेकिन यह समझौता ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाया।
इस हफ्ते फिर फूटा तनाव
ताज़ा तनाव की शुरुआत उत्तर-पश्चिम कंबोडिया के बांते मीनचेय प्रांत के प्रेय चान गांव में हुई गोलीबारी से हुई। कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेत ने आरोप लगाया कि थाई सैनिकों की फायरिंग में एक ग्रामीण मारा गया और तीन लोग घायल हुए।सितंबर में भी इसी गांव में दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, हालांकि तब कोई जनहानि नहीं हुई थी।थाई सेना ने आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा दावा किया कि गोलीबारी कंबोडियाई सैनिकों ने थाई सीमा के सा काएओ प्रांत में की, और उनकी ओर कोई हताहत नहीं हुआ।दोनों देशों के बयानों में आए इस तीखेपन ने संघर्ष विराम की डोर को फिर कमजोर कर दिया था।
अमेरिकी हस्तक्षेप— तनाव कम, भरोसा अभी बाकीअमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, अमेरिका ने दोनों सरकारों से तत्काल बातचीत कर उन्हें शांति बनाए रखने के लिए राजी किया।
ट्रंप का कहना है कि आर्थिक दबाव और राजनयिक चेतावनी ने काम किया और स्थिति “कंट्रोल से बाहर जाने से बच गई।
”हालांकि क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और 1907 के विवादित नक्शे पर दोनों देशों के बीच स्पष्ट सहमति न बनने तक यह तनाव पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद कम है।
क्या फिर लौटेगी शांति ?
सीमा पर बहु-दिवसीय झड़पों, ग्रामीणों की मौत और दोनों सेनाओं के दावों ने हालात को नाजुक बना दिया है। अमेरिका भले ही अपनी मध्यस्थता को सफल बता रहा हो, लेकिन जमीन पर शांति कितने दिनों तक कायम रहती है, यह देखना बाकी है।
फिलहाल दोनों देशों की सरकारों ने संयम बरतने का आश्वासन दिया है। इस क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के लिए यही उम्मीद की जाए कि यह विवाद किसी बड़े संघर्ष में न बदले।
NSK

