तारापुर में पहली बार ताज की आस में सम्राट चौधरी, RJD-जनसुराज ने मुकाबले को बनाया टफ

बी के झा

NSK

मुंगेर‌ , तारापुर / नई दिल्ली, 27 अक्टूबर

मुंगेर जिले की तारापुर विधानसभा सीट इस बार पूरे बिहार की सियासत का केंद्र बनी हुई है।

वजह भी खास है — बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहली बार अपने गृह जिले से चुनाव मैदान में हैं।अब तक वे खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अपने पिता-माता की राजनीतिक विरासत वाले क्षेत्र से किस्मत आज़माने का बड़ा दांव खेला है।

सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी ने लगभग 23 वर्षों तक तारापुर का प्रतिनिधित्व किया था। वे कई दलों से, यहाँ तक कि निर्दलीय भी चुनाव लड़कर जीत चुके हैं। वहीं, उनकी माता स्वर्गीय पार्वती देवी भी तीन वर्षों तक विधायक रही थीं। इसलिए इस बार न सिर्फ जीत, बल्कि परिवार की साख बचाने की चुनौती भी सम्राट चौधरी के कंधों पर है।

RJD और जनसुराज ने बनाया मुकाबला दिलचस्पमहागठबंधन की ओर से राजद ने असरगंज निवासी अरुण कुमार साव को मैदान में उतारा है। वैश्य समाज से आने वाले अरुण साव ने 2021 के उपचुनाव में जदयू प्रत्याशी को कांटे की टक्कर दी थी और मात्र 4 हजार मतों के अंतर से हार गए थे।इस बार मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी, जिसने स्थानीय चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है।डॉ. सिंह की स्थानीय पहचान और जनसंपर्क उन्हें मजबूत उम्मीदवार बना रही है।

30 साल बाद कमल का निशान फिर ईवीएम परकरीब तीन दशक बाद तारापुर की ईवीएम पर भाजपा का कमल निशान दिखने जा रहा है।वर्ष 1995 के बाद यह सीट समता पार्टी और फिर जदयू के खाते में जाती रही, जिस कारण भाजपा का प्रतीक यहाँ नहीं दिखता था। लेकिन इस बार एनडीए की तरफ से उपमुख्यमंत्री के उतरने के बाद भाजपा कार्यकर्ता पूरे जोश में हैं।

मुद्दों और समीकरणों का नया संग्राम तारापुर का चुनाव परिणाम हमेशा से कुशवाहा, यादव, बिन्द, वैश्य और अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं पर निर्भर रहा है।कुशवाहा समाज यहाँ संगठित और निर्णायक माना जाता है।जहां एनडीए विकास कार्यों की उपलब्धियां गिना रहा है, वहीं राजद रोजगार और “हर परिवार से एक नौकरी” के वादे पर जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहा है।

जनसुराज पार्टी ने इस बीच युवाओं को पलायन से मुक्ति और स्थानीय रोजगार के अवसर देने का वादा कर चुनाव को तीन-कोने की टक्कर बना दिया है।

स्थानीय मुद्दे अब भी जस के तस

1. नगर पंचायत क्षेत्र में नाला और सड़कों की बदहाल स्थिति

2. हरपुर पश्चिमी बहियार में जलजमाव की गंभीर समस्या

3. डांढ़ के अतिक्रमण से कई गांवों में सिंचाई का संकट“

कोई चमत्कार ही सम्राट चौधरी को बचा सकता है” –

स्थानीय मतदाता

स्थानीय मतदाताओं में माहौल दिलचस्प होता जा रहा है।

एक वरिष्ठ समाजसेवी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा –

यदि बिहार में लालू यादव पर जंगलराज का आरोप लगता है, तो तारापुर में डर का दूसरा नाम चौधरी परिवार रहा है। जनता अब बदलाव चाहती है। कोई चमत्कार ही सम्राट चौधरी को जीत दिला सकता है, नहीं तो इस बार जनसुराज के डॉ. संतोष सिंह ही जनता की पसंद बनते दिख रहे हैं।

6 नवंबर को मतदान,

सियासी प्रतिष्ठा दांव पर इस बार 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन असली लड़ाई एनडीए के सम्राट चौधरी, राजद के अरुण साव और जनसुराज के डॉ. संतोष कुमार सिंह के बीच सिमट गई है।

6 नवंबर को मतदान होगा और नतीजे यह तय करेंगे कि तारापुर चौधरी परिवार की विरासत को संभाले रखता है या कोई नई सियासी कहानी लिखी जाएगी।

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