दरभंगा में मासूम की हत्या, सड़कों पर गुस्सा और सत्ता की परीक्षा रेप-मर्डर के बाद उपद्रव , गिरफ्तारियाँ और एसएसपी हटाने की मांग ने हिला दिया प्रशासन

बी के झा

NSK

दरभंगा ( बिहार )10 फरवरी

छह वर्षीया बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद नृशंस हत्या ने दरभंगा ही नहीं, पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध के बाद जो कुछ सड़कों पर फूटा, वह सिर्फ आक्रोश नहीं था — वह व्यवस्था के प्रति टूटता भरोसा था। पुलिस ने उपद्रव के आरोप में छह युवकों को गिरफ्तार किया है और 43 नामजद तथा 40–50 अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी से न्याय की पीड़ा कम हो पाएगी?

घटना और कार्रवाई: अपराध से उपद्रव तक

विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में बच्ची की हत्या के बाद रविवार को कादिराबाद, बाघ मोड़ और बेला दुर्गा मंदिर के पास उग्र प्रदर्शन हुआ।पुलिस के अनुसार:सरकारी काम में बाधासड़क जामआगजनी तोड़फोड़ के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

गिरफ्तार किए गए युवकों में श्रवण साह, विकास सहनी, उमेश राम, राहुल सहनी, परशुराम सहनी और नंदलाल सहनी शामिल हैं।मुख्य अभियुक्त विकास महतो को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।थानाध्यक्ष सुधीर कुमार का कहना है कि“वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

”शहर शांत, लेकिन भीतर उबाल

सोमवार को शहर की सड़कें शांत दिखीं, लेकिन माहौल में डर और गुस्सा साफ झलक रहा था। मधुबनी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। हर चौक पर निगरानी बढ़ाई गई।

एक स्थानीय पत्रकार कहते हैं:“दरभंगा में शांति पुलिस से नहीं, थकान से आई है। लोगों का आक्रोश अभी भी भीतर सुलग रहा है।”

लहेरियासराय में छात्रों का ऐलान: सड़क से सदन तक

मिथिला स्टूडेंट यूनियन के बैनर तले छात्रों नेदोषी को फांसीएसएसपी की बर्खास्तगीकी मांग को लेकर प्रदर्शन किया।जिलाध्यक्ष नीरज क्रांतिकारी ने कहा:“यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की लड़ाई है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं जागी, तो आंदोलन और तेज होगा।”छात्र नेताओं ने साफ संकेत दिया कि

यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही का बन चुका है।

कानूनविदों की राय:

गुस्सा समझ में आता है, लेकिन…वरिष्ठ कानूनविद मानते हैं किअपराध “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी का है फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई जरूरी है लेकिन उपद्रव से न्याय कमजोर होता है एक आपराधिक कानून विशेषज्ञ कहते हैं:“आक्रोश स्वाभाविक है, पर अगर भीड़ कानून हाथ में लेती है तो असली अपराधी को फायदा मिलता है।”

कांग्रेस और विपक्ष का हमला

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मिलकर

स्पीडी ट्रायल10 लाख मुआवजा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरकी मांग की।

जिलाध्यक्ष दयानंद पासवान ने कहा:“बेटी बचाओ का नारा खोखला साबित हो रहा है। गोद में खेलने वाली बच्ची तक सुरक्षित नहीं है।”अन्य विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार पर👉

कानून व्यवस्था फेल होने👉

अपराधियों को राजनीतिक संरक्षणका आरोप लगाया।

शिक्षाविदों की चेतावनी:

राजनीति, अपराध और जातीय आग

एक वरिष्ठ स्थानीय शिक्षाविद ने नाम न छापने की शर्त पर बेहद तीखी टिप्पणी की:“आज दरभंगा नहीं, पूरा बिहार राजनीतिक पोषित अपराधियों के हवाले है। गृहमंत्रालय की भूमिका पर गंभीर सवाल हैं।”उन्होंने यह भी कहा कि“राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए समाज में जातीय उन्माद फैलाया जा रहा है, जो भविष्य में विस्फोटक साबित हो सकता है।”

हिंदू संगठनों और समाजसेवियों की प्रतिक्रिया

कुछ हिंदू संगठनों ने इसे सामाजिक नैतिक पतन परिवार और समाज की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि“सिर्फ कानून नहीं, सामाजिक चेतना भी जरूरी है।”स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं ने पीड़ित परिवार के लिए काउंसलिंग आर्थिक सहायता कानूनी मददकी पहल की घोषणा की है।

मीडिया की भूमिका पर भी सवाल

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि अपराध के बाद प्रशासन हरकत में आता है लेकिन पहले से चेतावनियों को नजरअंदाज किया जाता है

पुलिस–प्रशासन और राजनीति के गठजोड़ पर सवाल उठाना अब जोखिम भरा हो गया है

निष्कर्ष:

यह सिर्फ दरभंगा नहींयह मामला अब

बच्ची की हत्या का नहीं

उपद्रव का नहीं

गिरफ्तारी का नहींयह सवाल है:क्या बिहार में बच्चियां सुरक्षित हैं?क्या पुलिस जवाबदेह है?और क्या सत्ता सचमुच न्याय चाहती है?

जब तक इन सवालों के ईमानदार जवाब नहीं मिलते,तब तक हर गिरफ्तारीएक अधूरा आश्वासन ही मानी जाएगी।

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