बी के झा
NSK

नई दिल्ली , 9 अक्टूबर
राजधानी दिल्ली की प्रशासनिक तस्वीर जल्द ही बदल सकती है।दिल्ली सरकार ने सभी विभागों को एक छत के नीचे लाने और कामकाज की गति बढ़ाने के लिए एक नया, आधुनिक और भव्य सचिवालय कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना तैयार कर ली है।लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसके लिए छह संभावित स्थानों को चिन्हित किया है। इनमें से किसी एक जगह को अंतिम मंजूरी के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सामने पेश किया जाएगा।क्यों जरूरी हो गया नया सचिवालयदिल्ली का मौजूदा सचिवालय, जो ITO स्थित ‘प्लेयर्स बिल्डिंग’ के नाम से जाना जाता है, अब सरकार की बढ़ती जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं रहा।करीब चार एकड़ में फैले इस भवन में मुख्यमंत्री कार्यालय, वित्त, शहरी विकास और PWD जैसे प्रमुख विभाग तो हैं,लेकिन अन्य कई विभाग अब भी किराए के भवनों या दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फैले दफ्तरों में काम कर रहे हैं।PWD के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार —लक्ष्य यह है कि सभी सरकारी विभाग एक ही जगह काम करें, ताकि समन्वय बढ़े और जनता को सेवाएं समय पर मिलें।”इन 6 जगहों पर है सरकार की नजर1. गुलाबी बाग – सबसे बड़ा और प्रमुख विकल्पकरीब 80 एकड़ सरकारी भूमि के साथ गुलाबी बाग इस रेस में सबसे आगे है।यहां मौजूद पुराने सरकारी क्वार्टर अब जर्जर हो चुके हैं। इनके पुनर्विकास से विशाल सचिवालय परिसर तैयार किया जा सकता है।रिंग रोड, मेट्रो और सिविक सुविधाओं की निकटता इसे सबसे व्यवहारिक विकल्प बनाती है।2. खैबर पास – विधानसभा के नजदीकसिविल लाइन्स के पास स्थित 40 एकड़ जमीन हाल ही में खाली हुई है।दिल्ली विधानसभा, नॉर्थ दिल्ली जिला कार्यालय और मंत्री निवासों के पास होने से यह स्थान रणनीतिक रूप से उपयुक्त है।हालांकि यह दिल्ली रिज जोन के हिस्से में आता है, जिससे पर्यावरणीय मंजूरी एक चुनौती बन सकती है।3. राजघाट पावर प्लांट – यमुना किनारे का शानदार लोकेशन2015 में बंद हुआ राजघाट कोयला आधारित पावर प्लांट (45 एकड़) भी विकल्पों में शामिल है।यह रिंग रोड और यमुना नदी के किनारे स्थित है, जिससे कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा दोनों ही बेहतरीन हैं।पर्यावरणीय अनुमति यहां भी मुख्य अड़चन साबित हो सकती है।4. IPGCL गैस टरबाइन प्लांट, इंद्रप्रस्थकरीब 30 एकड़ क्षेत्र में फैला यह बंद हो चुका गैस-आधारित पावर स्टेशनअब प्रशासनिक उपयोग के लिए रूपांतरित किया जा सकता है।सेंट्रल दिल्ली और मेट्रो की नजदीकी इसे एक सेंट्रली कनेक्टेड सचिवालय कॉम्प्लेक्स बनाने के लिहाज से उपयुक्त बनाती है।5. ITO बस डिपो – पुरानी इमारत के बगल में17.5 एकड़ में फैले ITO बस डिपो को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है।इसमें 10 एकड़ डिपो, 2.5 एकड़ स्कूल परिसर और 5 एकड़ खुली जगह शामिल है।मौजूदा सचिवालय के ठीक पास होने से शिफ्टिंग और प्रशासनिक संचालन आसान होगा।6. ट्विन टावर्स कॉम्प्लेक्स – वर्टिकल रिडेवलपमेंट की संभावनाITO स्थित विकास मीनार और DUSIB-DDA कार्यालय परिसर को भी ‘वर्टिकल डेवलपमेंट’ के तहत जोड़ा जा सकता है।यह क्षेत्र मात्र 4.5 एकड़ में फैला है, लेकिन यदि इसे बस डिपो से मिलाया जाए, तो 22 एकड़ का केंद्रीय सचिवालय परिसर तैयार हो सकता है —जिसे दिल्ली सरकार का “नया प्रशासनिक हब” कहा जाएगा।क्या होगा आगे?PWD अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बादचुनी गई जगह का विस्तृत सर्वेक्षण और तकनीकी आकलन (Feasibility Study) किया जाएगा।अगले दो सप्ताह में एक प्रेजेंटेशन तैयार कर उसे दिल्ली कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।इसके बाद डिजाइन, लागत अनुमान और टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —हमारा उद्देश्य केवल एक नया भवन नहीं, बल्कि ऐसा सचिवालय बनाना है जो आने वाले 50 वर्षों की प्रशासनिक जरूरतों को पूरा कर सके।”संभावित विशेषताएं (फीचर्स)हर विभाग के लिए मॉड्यूलर ऑफिस स्पेसCM और मंत्रियों के लिए समर्पित ब्लॉकग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन (Net-Zero Energy Concept)सोलर रूफटॉप, रेन वाटर हार्वेस्टिंगडिजिटल दस्तावेज़ केंद्र और स्मार्ट मॉनिटरिंग रूमजनता के लिए ओपन विजिटर सेंटर और grievance hallविश्लेषण: दिल्ली की शासन व्यवस्था का नया चेहराविशेषज्ञों का मानना है कि नया सचिवालय बनने से न केवलप्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी बल्किराजधानी की नौकरशाही संरचना भी आधुनिक स्वरूप लेगी।शहरी नियोजन विशेषज्ञ प्रो. अमित वर्मा के अनुसार —अगर यह परियोजना सही ढंग से लागू हुई, तो दिल्ली सरकार का नया सचिवालय भारत में सबसे उन्नत प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स बन सकता है — ठीक मुंबई के ‘मंत्रालय’ या गांधीनगर के ‘सचिवालय भवन’ की तरह।”संपादकीय टिप्पणीयह परियोजना न केवल दिल्ली के प्रशासन को केंद्रीकृत और प्रभावी बनाएगी, बल्कि यह राष्ट्रीय राजधानी के बिखरे हुए शासन ढांचे को एकीकृत स्वरूप देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।
