बी.के. झा
NSK

नई दिल्ली/पटना, 12 नवंबर
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को दहलाने वाले कार ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला है — और साथ ही उतनी ही गंभीर चिंता भी।सूत्रों के मुताबिक, भारत में अब भी 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट मौजूद है, जो अब तक बरामद नहीं हो पाया है।
देशभर में एजेंसियां 24 घंटे की सघन छापेमारी में जुटी हैं, लेकिन यह विस्फोटक अब तक उनकी पकड़ से बाहर है।
फरीदाबाद मॉड्यूल से अब तक 2900 किलो बरामद — पर 300 किलो लापता फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी मॉड्यूल से जुड़ी जांच में अब तक एजेंसियों ने करीब 2900 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया है।हालांकि, यह भी पुष्टि हुई है कि कुल 3200 किलो की खेप भारत में दाखिल हुई थी।यानी अब भी कम से कम 300 किलो विस्फोटक सामग्री देश के किसी हिस्से में छिपी हुई है, और यही फिलहाल एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में —हमारे लिए हर मिनट कीमती है। यह 300 किलो अमोनियम नाइट्रेट गलत हाथों में न पहुंचे, इसके लिए देशभर में एक साथ तलाशी अभियान चल रहा है।
सीमा पार से आया विस्फोटक
बांग्लादेश से नेपाल, फिर भारत में दाखिल
जांच में सामने आया है कि यह विस्फोटक बांग्लादेश के रास्ते नेपाल होकर भारत पहुंचा।कथित तौर पर यह सामग्री किसी फर्टिलाइज़र कंपनी से चोरी या अवैध रूप से खरीदी गई थी।अब नेपाल और बांग्लादेश दोनों देशों के सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा जांच तंत्र तैयार किया जा रहा है।
सीमाई निगरानी विशेष रूप से सीतामढ़ी, मधुबनी, सहरसा और अररिया जिलों में बढ़ाई गई है, जहां से नेपाल-भारत आवागमन सबसे सहज है।
अयोध्या, वाराणसी और दिल्ली के धार्मिक स्थल थे टारगेट पर जांच एजेंसियों को मिले डिजिटल डेटा और दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ है कि गिरफ्तार आतंकी मॉड्यूल अयोध्या और वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक नगरों को निशाना बनाने की साजिश में जुटा था।गिरफ्तार आरोपी शाहीन ने कथित तौर पर अयोध्या के स्लीपर मॉड्यूल को सक्रिय कर रखा था।
हिट लिस्ट में शामिल थे —लाल किला और इंडिया क्लब और गौरी शंकर मंदिर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और प्रमुख शॉपिंग मॉल्स
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह साजिश जनवरी 2025 से सक्रिय थी और धार्मिक स्थलों पर हमला कर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की जा रही थी।
200 से ज्यादा IED बनाने की थी योजना एजेंसियों के अनुसार, आतंकी नेटवर्क ने 200 से अधिक IED (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार करने की योजना बनाई थी।
इन विस्फोटों का लक्ष्य था — दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के हाई-प्रोफाइल इलाकों को एक साथ दहलाना, ताकि 26/11 जैसे समानांतर हमलों की स्थिति पैदा हो सके।
सीमांचल पर बढ़ा शक — विशेषज्ञों ने दी गंभीर चेतावनी
बिहार के मधुबनी निवासी एक वरिष्ठ शिक्षाविद, जिन्होंने अपना नाम उजागर न करने का अनुरोध किया, ने कहा —केंद्र सरकार को सबसे पहले मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्रों में गहन जांच करनी चाहिए। नेपाल और बंगाल सीमा से सक्रिय अवैध घुसपैठियों का नेटवर्क भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।”
उन्होंने आगे कहा —सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा , सहरसा जैसे सीमाई जिलों से विदेशी तत्वों का प्रवेश आसान हो गया है। इन्हें स्थानीय स्तर पर कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों का संरक्षण भी मिलता है, जो देश की सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक है।”शिक्षाविद के अनुसार,नेपाल-बिहार सीमा पर कठोर निगरानी और रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठियों के ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई अब अपरिहार्य है। यही देश की सुरक्षा का स्थायी समाधान है।”
गृहमंत्रालय की अगली रणनीति पर देशभर की निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम ने सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तरी भारत की सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया है।गृह मंत्रालय ने NIA, RAW, IB और राज्य पुलिस बलों को मिलाकर एक संयुक्त स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित की है।आज शाम राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की मौजूदगी में गृह मंत्री अमित शाह की उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है, जिसमें अगला कदम तय किया जाएगा।
खतरा टला नहीं — बदले हुए रूप में लौट सकता है सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जब तक लापता 300 किलो विस्फोटक का पता नहीं चलता, खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड और ओडिशा में हाई अलर्ट जारी है।रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, धार्मिक स्थल और भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा चाक-चौबंद है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा —यह केवल आतंकी वारदात नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक चेतना को डराने की सुनियोजित मनोवैज्ञानिक साजिश है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि धमाका कैसे हुआ — बल्कि यह है कि वह 300 किलो विस्फोटक आखिर कहां है?इस सवाल का जवाब ही तय करेगा कि भारत ने इस साजिश को कितना गहराई से समझा — और कितनी मजबूती से जवाब दिया।
