नए साल की सुबह अर्धनग्न युवती की लाश, गले-चेहरे पर जख्म दरभंगा में रेप-मर्डर की आशंका, बिहार की कानून-व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल

बी के झा

NSK

दरभंगा, 1 जनवरी

नववर्ष की पहली सुबह बिहार के लिए शुभ संकेत लेकर नहीं आई। दरभंगा जिले के मनीगाछी थाना क्षेत्र में गुरुवार को सड़क किनारे एक 25 वर्षीय महिला की अर्धनग्न लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। विशौल और कमलाबाड़ी गांव के बीच सूनसान स्थान पर पड़ी लाश की खबर जंगल की आग की तरह फैली और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जुट गई।प्रथम दृष्टया शव की स्थिति, कपड़ों की अवस्था और गले-चेहरे पर मिले गहरे जख्मों ने दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका को बल दिया है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राज्य सरकार लगातार “सुशासन” के दावे कर रही है।

फोरेंसिक टीम सक्रिय, तकनीकी जांच शुरू

सूचना मिलते ही मनीगाछी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू की। ग्रामीण एसपी और डीएसपी बेनीपुर वासुकी नाथ झा भी घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक टीम और टेक्निकल सेल को भी बुलाया गया, जिसने मृतका के कपड़े, शरीर पर मौजूद जख्मों और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित किया।पुलिस के अनुसार, सुबह करीब 8 बजे अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली थी। जांच के दौरान महिला की उम्र लगभग 25 वर्ष आंकी गई।

मृतका की पहचान, नवजात बच्ची की मां थी

शव की पहचान मधुबनी जिले के भैरव स्थान थाना क्षेत्र के लालगंज गांव निवासी उपेंद्र मुखिया की पत्नी के रूप में हुई है। मृतका की सास गीता देवी ने बताया कि उनके पुत्र उपेंद्र दिल्ली में मजदूरी करते हैं और बहू उनके साथ ही रहती थी। शादी को दो वर्ष हुए थे और मृतका की एक-दो महीने की नवजात बच्ची भी है।

गीता देवी ने बताया कि 31 दिसंबर को वह अपने मायके झंझारपुर गई थीं। जब अगली सुबह लौटीं तो घर खुला मिला और बहू गायब थी। कुछ ही देर में सड़क किनारे लाश मिलने की सूचना मिली, जिसके बाद वह थाने पहुंचीं।

मोबाइल गायब, आखिरी कॉल से खुलेगा राज?

पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतका का मोबाइल फोन गायब है और उसका नंबर बंद आ रहा है। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिरी बार किससे बात हुई थी और किन इलाकों में फोन सक्रिय रहा।थानाध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि सभी बिंदुओं—व्यक्तिगत संबंध, आवाजाही, मोबाइल लोकेशन और संभावित अपराध स्थलों—पर जांच की जा रही है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:

“यह केवल अपराध नहीं, व्यवस्था की विफलता है”नए साल के पहले ही दिन बिहार में दो-दो हत्याओं की घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाएं आकस्मिक नहीं, बल्कि व्यवस्थागत शिथिलता का परिणाम हैं।राजनीतिक विश्लेषक डॉ. शशिकांत मिश्र कहते हैं—“जब शासन कागजों में सुशासन और जमीन पर असुरक्षा दिखाए, तो ऐसी घटनाएं केवल अपराध नहीं बल्कि सत्ता की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न होती हैं।”

कानूनविदों की राय

वरिष्ठ कानूनविद एडवोकेट संजय कुमार के अनुसार—“रेप-मर्डर जैसे मामलों में शुरुआती 48 घंटे निर्णायक होते हैं। अगर सबूतों की कड़ी टूटी, तो न्याय की उम्मीद भी कमजोर पड़ जाएगी। राज्य को केवल बयान नहीं, परिणाम देने होंगे।

”विपक्ष का हमला

विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजद और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “सुशासन बाबू” के शासन में महिलाओं की सुरक्षा केवल नारे तक सीमित रह गई है।एक विपक्षी नेता ने कहा—“जब राष्ट्रीय राजमार्ग और गांव की सड़कें भी सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार के दावे खोखले लगते हैं।”

समाजसेवियों की चिंता

महिला अधिकारों से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता अनीता वर्मा कहती हैं—“एक नवजात बच्ची की मां का इस तरह मारा जाना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज की असफलता है।”

सुशासन बनाम जमीनी हकीकत

दो दशक से अधिक समय से बिहार की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार “सुशासन बाबू” के नाम से जाने जाते हैं, वहीं राज्य के गृह विभाग की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है। लेकिन साल के पहले ही दिन हुई इन घटनाओं ने सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई को उजागर कर दिया है।यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बिहार में “जंगलराज” शब्द भले ही राजनीतिक नारा बन गया हो, लेकिन लगातार हो रही हत्याएं, महिलाओं के खिलाफ अपराध और कमजोर होती सुरक्षा व्यवस्था यह संकेत देती है कि कानून का भय अपराधियों में कम होता जा रहा है।

एक लाश, कई सवाल

दरभंगा की यह घटना केवल एक रेप-मर्डर की आशंका नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है—

क्या महिलाएं आज भी सुरक्षित हैं?

क्या पुलिसिंग व्यवस्था समय से पहले अपराध रोकने में सक्षम है?

और क्या सुशासन केवल फाइलों में ही सिमट कर रह गया है?

जांच जारी है, लेकिन नए साल की पहली सुबह जो तस्वीर सामने आई, उसने बिहार की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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