नए साल की सुबह लहूलुहान मिली कमाई करने वाले बेटे की लाश* औरंगाबाद में गला रेतकर हत्या, जमीन विवाद और कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल

बी के झा

NSK

औरंगाबाद, 1 जनवरी

नए साल की पहली सुबह जहां जश्न, उम्मीद और मंगलकामनाओं के संदेशों से भरी होती है, वहीं बिहार के औरंगाबाद जिले के सिंदुरिया गांव में यह सुबह एक परिवार के लिए अंतहीन अंधकार लेकर आई। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या–19 के किनारे एक गड्ढे में 41 वर्षीय दिलीप सिंह उर्फ मिरिंडा का गला रेता हुआ शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। दिलीप अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था।सुबह शव मिलने की खबर फैलते ही गांव में अफरातफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए और आक्रोश में सड़क जाम की कोशिश की गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, एसडीपीओ, अंचलाधिकारी और बारुण थानाध्यक्ष भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया।रात को घर से निकला, फिर लौटकर नहीं आया मृतक के पिता रमेश सिंह के अनुसार, दिलीप रात में खाना खाकर घर में सोया था। देर रात किसी का फोन आने पर वह बाहर निकला, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। सुबह घर के पास ही उसका शव मिलने से परिवार पर मानो वज्रपात हो गया। दिलीप अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गया है।

जमीन विवाद की आशंका गहराई

परिजनों ने हत्या के पीछे तीन बीघा जमीन को लेकर पिछले पांच वर्षों से चल रहे गोतिया विवाद की ओर इशारा किया है। इस विवाद से जुड़ा मुकदमा अदालत में लंबित है और अगली सुनवाई दो फरवरी को होनी है। गांव में अधिकांश लोग इस हत्या को उसी विवाद से जोड़कर देख रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में जमीन विवाद आज भी हत्या का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. (डा.) अरविंद कुमार कहते हैं—“जब न्याय की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है, तब लोग कानून को अपने हाथ में लेने लगते हैं। यह हत्या उसी सामाजिक विफलता का परिणाम हो सकती है।”

हिरासत में तौफीक, कई एंगल से जांच पुलिस ने सड़क किनारे स्थित एक टायर दुकान के संचालक मोहम्मद तौफीक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, शव उसी दुकान के पास गड्ढे में मिला था। मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर अंतिम संपर्कों की जांच की जा रही है।बारुण थानाध्यक्ष ने बताया कि कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं और पुलिस कई बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है। गुप्तचरों को भी सक्रिय किया गया है।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

इस निर्मम हत्या ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाजसेवी संगठनों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह की वारदात होना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक को दर्शाता है।

वरिष्ठ समाजसेवी शिवनाथ प्रसाद कहते हैं—

“नया साल अपराध के डर के साथ शुरू होना राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।”

एक मौत, कई सवाल

दिलीप सिंह की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह न्यायिक देरी,ग्रामीण भूमि विवाद,और कमजोर सामाजिक सुरक्षा तंत्रकी भयावह तस्वीर पेश करती है।आज एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया है, दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है और गांव के लोगों के मन में यह सवाल गूंज रहा है—

क्या कानून समय पर न्याय दे पाता तो यह हत्या रोकी जा सकती थी?

पुलिस जांच जारी है, लेकिन नए साल की पहली सुबह सिंदुरिया गांव में जो खून बहा, उसने जश्न के शोर के बीच बिहार की एक कड़वी सच्चाई को फिर उजागर कर दिया है।

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