नीतीश कुमार की ऐतिहासिक वापसी: 10वीं बार बिहार की कमान, गांधी मैदान बना सियासी शक्ति-प्रदर्शन का केंद्र

बी के झा

NSK

पटना/ न ई दिल्ली, 20 नवंबर

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान ने गुरुवार को एक बार फिर इतिहास रचा—

जब बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी और लंबी पारी खेलने वाले नेता नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।गिरते-संभलते, साथ बदलते और लौटते हुए—

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफ़र भारतीय लोकतंत्र की उन अनोखी यात्राओं में से है, जो उतार-चढ़ाव से भरी होने के बावजूद निरंतरता का नया प्रतिमान रच देती हैं।दो दशक, तीन गठबंधन, और सत्ता में वापसी की अनोखी क्षमता74 वर्षीय नीतीश कुमार पहली बार वर्ष 2000 में मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वह सरकार आठ दिनों में गिर गई—

हालांकि यही आठ दिन भविष्य की लंबी पारी की नींव बने।इसके बाद 2005 से 2014 तक उनका अजेय शासन चला। 2014 के लोकसभा चुनावों में जेडीयू के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्होंने नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया, पर कुछ ही महीनों में वापसी कर राजनीतिक बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।

जनवरी 2024 में उन्होंने एनडीए में फिर से घर वापसी की—और अब 2025 के चुनावों के बाद वे पुनः बिहार की बागडोर संभाल रहे हैं। इस लिहाज से उनका यह शपथ ग्रहण सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक जीवटता और रणनीतिक कौशल का प्रमाण है।डिप्टी सीएम: सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा फिर से दूसरी कमान परनीतीश कुमार के साथ मंच पर दो नाम एक बार फिर डिप्टी सीएम के रूप में उभरे—

सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, जो पिछली सरकार में भी इसी पद पर थे। बीजेपी के इन दोनों नेताओं की भूमिका आगामी सरकार में अहम मानी जा रही है।नए मंत्रिमंडल में युवाओं, अनुभवी चेहरों और जातीय-सामाजिक संतुलन का मिश्रणश्रशपथ ग्रहण में जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया, उनकी सूची संतुलित राजनीति का इशारा करती है।

इनमें शामिल हैं—लेसी सिंह, श्रेयसी सिंह, नितिन नबीन, रामकृपाल यादव, संजय कुमार, दीपक प्रकाश, मोहम्मद जमा खान, संतोष सुमन, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता समेत कई अन्य।वहीं, अनुभवी चेहरों में विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, मंगल पांडे, अशोक चौधरी जैसे नेता फिर से कैबिनेट में लौटे।

गांधी मैदान बना राष्ट्रीय सियासत का संगमशपथ मंच सिर्फ बिहार की राजनीति का दर्पण नहीं बना, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए की शक्ति का प्रदर्शन भी रहा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री—

योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, पुष्कर सिंह धामी, भूपेंद्र पटेल, प्रमोद सावंत, चंद्रबाबू नायडू, भजनलाल शर्मा और देवेंद्र फडणवीस—

सभी इस समारोह के साक्षी बने।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी इस मंच पर मौजूद रहीं। इतने बड़े पैमाने पर देशभर के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति इस समारोह को महज़ शपथ नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति-संकेत में बदल देती है।

निशांत कुमार की भावुक प्रतिक्रिया—“जनता ने उम्मीद से ज्यादा दिया”समारोह में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी मौजूद रहे। पिता के 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने पर वह बोले—“

मैं अपने पिता को बधाई देता हूं। जनता ने हमें उम्मीद से ज्यादा दिया है। हम जनता के विश्वास पर खरा उतरेंगे।”उनके सरल मगर प्रभावी शब्दों में इस चुनाव के बाद एनडीए की जीत का जनविश्वास साफ झलकता है।

दसवीं पारी—चुनौतियों का दशक, उम्मीदों का नया अध्याय जैसे-जैसे नीतीश के हाथ में फिर सत्ता आई है, वैसे-वैसे चुनौतियों की फेहरिस्त भी सामने खड़ी है——

युवाओं की बेरोज़गारी— कानून व्यवस्था— विकास की गति— केंद्र–राज्य सहयोग— सामाजिक समीकरणों का संतुलन लेकिन नीतीश कुमार का राजनीतिक अनुभव, गठबंधन प्रबंधन की अनूठी क्षमता और उनकी बार-बार की वापसी दर्शाती है कि वह मुश्किल रास्तों में भी नई दिशा खोज लेना जानते हैं।

निष्कर्ष

गांधी मैदान में हुआ यह शपथ समारोह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं—राज्य के राजनीतिक इतिहास का एक नया अध्याय है।नीतीश कुमार ने 10वीं बार शपथ लेकर यह साफ कर दिया कि वे अभी भी बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली, अनुभवी और निर्णायक नेता हैं।

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