पटना एयरपोर्ट पर साथ दिखे रवि किशन और तेज प्रताप यादव: राजनीति में नए समीकरणों के संकेत?

बी के झा

NSK

पटना/गया/मोतिहारी, 8 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच शुक्रवार को पटना एयरपोर्ट पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने चुनावी माहौल में नई हलचल पैदा कर दी। भाजपा सांसद रवि किशन और जेजेडी नेता तेज प्रताप यादव को आपस में बातचीत करते हुए देखा गया।

दोनों नेताओं की यह मुलाकात सिर्फ संयोग थी या किसी बड़े राजनीतिक संकेत का हिस्सा —

इसे लेकर सियासी गलियारों में अब तीखी चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।तेज प्रताप गया ज़िले में अपनी पार्टी उम्मीदवारों की सभाएँ कर लौट रहे थे, जबकि रवि किशन पूर्वी-पश्चिमी चंपारण में भाजपा की रैलियाँ संबोधित करके पटना पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर दोनों का इस अंदाज़ में दिख जाना राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर रहा है।

चुनाव बाद समर्थन पर अटकलें तेज — क्या तेज प्रताप बदल सकते हैं पाला?कई राजनीतिक टिप्पणीकारों ने दावा किया कि चुनाव के बाद तेज प्रताप NDA को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि यह सिर्फ अनुमान हैं, क्योंकि तेज प्रताप ने अब तक अपनी मंशा स्पष्ट नहीं की है।लेकिन उनकी टोन और बॉडी लैंग्वेज ने महागठबंधन खेमे में बेचैनी जरूर बढ़ा दी है।

रवि किशन बोले — “तेज प्रताप निस्वार्थ सेवक हैं, ऐसे लोग भाजपा में स्वागत योग्य”पत्रकारों ने जब रवि किशन से दोनों की मुलाकात पर सवाल किया, तो उनका जवाब बेहद दिलचस्प था।

उन्होंने कहा—“तेज प्रताप के दिल में सबके लिए प्रेम है। ये भोलेनाथ के भक्त हैं। भाजपा में तो स्वयं प्रधानमंत्री मोदी जी भी भोलेनाथ के भक्त हैं। जो व्यक्ति सेवा की भावना रखता है और बिना किसी निजी एजेंडा के काम करता है — भाजपा उसका हमेशा स्वागत करती है।”इसके बाद से इस बयान को राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।यह भी चर्चा है कि रवि किशन ने अप्रत्यक्ष रूप से तेज प्रताप के लिए पार्टी के दरवाज़े खुले होने का संदेश दिया है।

“बिहार अब पहले से अधिक अद्भुत” — रवि किशन का चुनावी बयानतेज प्रताप के साथ हो रही संभावित “राजनीतिक नाइंसाफी” पर पूछे गए सवाल पर रवि किशन ने बयान को चुनावी मौसम में सीमित करते हुए कहा—“यह चुनाव का समय है। कुछ भी गलत-सही बोलना उचित नहीं। जनता सब जानती है, जनता आत्मा पढ़ लेती है। बिहार अब पहले से ज्यादा अद्भुत हो गया है।”रवि किशन का यह जवाब एक तरफ सतर्कता वाला था, वहीं दूसरी तरफ जनता के निर्णय को सर्वोपरि बताने की रणनीति भी साफ दिखी।

तेज प्रताप बोले — “जो रोजगार देगा, हम उसका साथ देंगे”तेज प्रताप यादव ने भी इस मुलाकात को महज संयोग बताया, लेकिन उनके बयान ने कई राजनीतिक कयासों को हवा दे दी।

उन्होंने कहा—“पहली बार मुलाकात हुई। ये (रवि किशन) भी भोलेनाथ के भक्त हैं, हम भी हैं। जहां भगवान जोड़ दें, वहां कोई दूरी नहीं रहती।”और सबसे महत्वपूर्ण बयान—“हमने पहले ही कहा है — जो बेरोज़गारी मिटाएगा, जो रोजगार देगा, हम उसके साथ जाएंगे।”यह वाक्य महागठबंधन कैंप के लिए सबसे असहज साबित हो सकता है।“

प्रशंसा क्यों नहीं करेंगे? ये भी टीका लगाते हैं, हम भी” — तेज प्रताप की चुटकीजब उनसे पूछा गया कि भाजपा के नेता उनकी प्रशंसा क्यों कर रहे हैं, तो तेज प्रताप ने मुस्कुराते हुए कहा—“प्रशंसा क्यों नहीं करेंगे? ये भी टीका लगाते हैं, हम भी टीका लगाते हैं।”उनकी यह बात राजनीतिक हल्कों में एक प्रतीक के रूप में देखी जा रही है — कि तेज प्रताप भाजपा के सांस्कृतिक विमर्श से खुद को दूर नहीं रखना चाहते।

महागठबंधन में बेचैनी — विश्लेषकों ने निकाला बड़ा

निष्कर्ष

पटना एयरपोर्ट पर हुई यह मुलाकात सिर्फ तस्वीर भर नहीं रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे बड़े घटनाक्रम का संकेत मान रहे हैं।

एक विश्लेषक ने कहा—“तेज प्रताप ने यह साफ संदेश दिया है कि सत्ता और सम्मान की राजनीति में वे तेजस्वी से कम नहीं। उन्होंने लालू परिवार और महागठबंधन को दिखा दिया कि वे भी अकेले राजनीतिक समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।”

एक अन्य विश्लेषक के शब्द और अधिक तीखे थे—“अगर तेज प्रताप दूसरे चरण के मतदान से पहले भाजपा नेताओं के साथ दिखते रहे, तो महागठबंधन विशेषकर RJD को भारी नुकसान होगा। यह सिर्फ प्रतीकात्मक मुलाकात नहीं — यह पावर प्ले है।”

RJD कैंप में खामोशी — भीतरखाने बढ़ी बेचैनीतेज प्रताप की इस मुलाकात पर RJD नेता फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी के भीतर इस मुलाकात को लेकर गंभीर चिंता है, क्योंकि चुनाव के इस दौर में तेज प्रताप का यह कदम वोटर्स का रुख बदल सकता है।महागठबंधन में यह भय भी है कि तेज प्रताप कहीं “किंगमेकर” बनने की कोशिश में NDA के लिए बैकडोर सपोर्ट न दे दें।

आगे क्या?

तेज प्रताप ने भले ही मुलाकात को सामान्य बताया हो, लेकिन रवि था किशन की मुस्कान, तेज प्रताप की सहजता और दोनों के बीच चर्चा का सहज वातावरण — यह संकेत देता है कि बिहार की राजनीति अगले कुछ दिनों में और रोचक मोड़ ले सकती है।

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