पहले 60 करोड़ जमा करो, तब जाओ लंदन: शिल्पा शेट्टी-राज कुंद्रा को बॉम्बे हाई कोर्ट का सख्त संदेश

बी के झा

NSK

मुंबई / नई दिल्ली, 13 दिसंबर

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति, कारोबारी राज कुंद्रा को बड़ा झटका देते हुए साफ कर दिया है कि कानून के सामने नाम और शोहरत कोई ढाल नहीं बन सकते। 60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के गंभीर मामले में फंसे इस हाई-प्रोफाइल दंपति की विदेश यात्रा की राह अदालत ने कड़ी शर्तों के साथ ही खोली है। अदालत का दो टूक संदेश है—

पहले 60 करोड़ रुपये नकद जमा करो या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से उतनी ही राशि की बैंक गारंटी दो, तभी लुकआउट सर्कुलर (LOC) हटेगा और विदेश जाने की इजाजत मिलेगी।मेडिकल इमरजेंसी की दलील, लेकिन कोर्ट सख्त शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने राज कुंद्रा के पिता की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए लंदन जाने की अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया कि कुंद्रा के पिता दुर्लभ आयरन की कमी से पीड़ित हैं, जिसके चलते उन्हें आंतरिक रक्तस्राव और सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही है।

डॉक्टरों ने अत्याधुनिक जांच के लिए दोबारा कैप्सूल एंडोस्कोपी या डबल-बैलून एंटरोस्कोपी की सलाह दी है, जो लंदन में कराई जानी है। दंपति ने आग्रह किया था कि 20 जनवरी 2026 से पहले उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति दी जाए।हालांकि, अदालत ने मानवीय पहलू को समझते हुए भी आर्थिक शर्तों में कोई ढील देने से इनकार कर दिया।

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि मेडिकल कारण सहानुभूति का आधार हो सकता है, लेकिन जांच एजेंसियों और शिकायतकर्ता के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

60 करोड़ की शर्त पर कोई समझौता नहीं दंपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने पूरी 60 करोड़ रुपये की राशि जमा करने की शर्त का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि इतनी बड़ी रकम जमा करना अव्यावहारिक है और इसके बदले जमानत या कोई अन्य वैकल्पिक सुरक्षा ली जा सकती है।

लेकिन अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि जब आरोप ही 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का है, तो उतनी ही राशि की सुरक्षा स्वाभाविक और न्यायसंगत है।क्या है पूरा मामला इस मामले की जड़ 2015 से 2023 के बीच का कथित निवेश घोटाला है। शिकायतकर्ता दीपक कोठारी का आरोप है कि शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने उन्हें अपनी कंपनी ‘बेस्ट डील टीवी प्राइवेट लिमिटेड’ में निवेश के लिए उकसाया।

कोठारी के मुताबिक, करीब 60 करोड़ रुपये का निवेश कराया गया, लेकिन उस धन का इस्तेमाल कंपनी के कारोबार के बजाय निजी लाभ और आलीशान जीवनशैली पर किया गया।वहीं, दंपति का दावा है कि यह पूरा मामला व्यावसायिक विवाद का है, जिसे आपराधिक रंग देकर पैसा वसूलने की नीयत से FIR दर्ज कराई गई है। उनका कहना है कि निवेश में हुआ नुकसान कारोबारी जोखिम का हिस्सा है, न कि किसी धोखाधड़ी या आपराधिक साजिश का परिणाम।

FIR रद्द करने की भी मांग

गौरतलब है कि पिछले महीने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने इस FIR को रद्द करने के लिए भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि अंतिम सुनवाई तक पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने या किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से रोका जाए।

हालांकि, कोर्ट का ताजा रुख बताता है कि वह इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

हाई-प्रोफाइल नाम, लेकिन सख्त कानून

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आदेश एक मजबूत संदेश देता है कि आर्थिक अपराधों के मामलों में अदालतें अब और सख्त रुख अपना रही हैं। चाहे आरोपी फिल्मी दुनिया का बड़ा नाम हो या प्रभावशाली कारोबारी, न्यायिक प्रक्रिया में सब बराबर हैं।

फिलहाल, शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के सामने दो ही रास्ते हैं—

या तो 60 करोड़ रुपये जमा करें अथवा बैंक गारंटी दें, या फिर विदेश यात्रा का इरादा छोड़कर भारत में ही कानूनी लड़ाई का सामना करें। यह मामला आने वाले दिनों में न सिर्फ फिल्मी गलियारों, बल्कि कारोबारी और कानूनी जगत में भी चर्चा का केंद्र बना रहने वाला है।

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