पाकिस्तान का झूठ फिर बेनकाब भारत ने श्रीलंका के राहत प्लेन को मंजूरी देने में नहीं की देरी, 60 घंटे वाला दावा निकला फरेब

बी के झा

नई दिल्ली, 2 दिसंबर

चक्रवात ‘दित्वा’ से जूझ रहे श्रीलंका में हालात बेहद भयावह हैं। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने अब तक 334 से अधिक लोगों की जान ले ली है, जबकि हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। ऐसे गंभीर मानवीय संकट के बीच पाकिस्तान ने श्रीलंका तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र के उपयोग की अनुमति मांगी।लेकिन राहत से ज्यादा राजनीति करते हुए पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह झूठ फैलाना शुरू कर दिया कि भारत ने 60 घंटे की देरी की, जिससे उनकी मानवीय मदद समय पर श्रीलंका नहीं पहुँच पाई।भारत ने इस दावे को तथ्यों सहित सिरे से खारिज किया है।

भारत का पलटवार: “पाक का बयान हास्यास्पद, झूठा और दुष्प्रचार”विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के आरोपों को “हास्यास्पद और बेबुनियाद दुष्प्रचार” बताया।उन्होंने स्पष्ट किया:पाकिस्तान का अनुरोध 1 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजे भारतीय उच्चायोग इस्लामाबाद को मिला।भारत ने उसी दिन शाम 5:30 बजे अनुमति दे दी।यह अनुमति ठीक उसी समय सीमा के भीतर दी गई, जो पाकिस्तान के स्वयं के प्रस्तावित उड़ान कार्यक्रम के अनुकूल थी।यानी भारत की ओर से किसी भी प्रकार की देरी हुई ही नहीं।इसके बावजूद पाकिस्तान ने राहत कार्य को भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर विक्टिम कार्ड की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की।मानवीय संकट को भी राजनीति से जोड़ना—

पाकिस्तान की पुरानी आदतयह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने गलत बयानबाज़ी से भारत को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की हो।परंतु इस बार मामला अत्यंत संवेदनशील था—श्रीलंका जैसे पड़ोसी और मित्र देश में जीवन-मृत्यु की परिस्थिति, और राहत कार्य की तात्कालिकता।भारत की तरफ से यह भी कहा गया कि—हमारे पड़ोसी देशों में किसी भी मानवीय संकट के समय भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट है—राहत और सहयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है, राजनीति नहीं।”

श्रीलंका में भयावह हालात,

भारत लगातार सहायता मोड मेंश्रीलंका, जो पहले ही आर्थिक संकट से उभरने की कोशिश कर रहा था, इस प्राकृतिक आपदा से गहरे मानवीय संकट में फंस गया है।ऐसे समय में भारत ने न केवल श्रीलंका के अनुरोधों पर तुरंत कार्रवाई की, बल्कि स्वयं भी सहायता भेजने की तैयारियाँ तेज़ की हैं।भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रिश्तों को देखते हुए, दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मानवीय सहायता का नेतृत्व करने में भारत हमेशा अग्रणी रहा है।

सवाल बड़ा है: मानवीय त्रासदी के बीच भी झूठ क्यों?

पाकिस्तान के आरोपों के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह प्रश्न उठ रहा है कि—क्या पाकिस्तान ने वास्तव में उड़ान कार्यक्रम तय होने के बाद जानबूझकर गलत समय-रेखा प्रचारित की?क्या मानवीय संकट का उपयोग भारत-विरोधी नैरेटिव गढ़ने के लिए किया गया?और सबसे महत्वपूर्ण—क्या ऐसी झूठी दलीलें श्रीलंका जैसी त्रासदी से जूझ रहे देश के साथ अन्याय नहीं हैं?

निष्कर्ष

झूठ चाहे कितना भी प्रचारित क्यों न हो, तथ्य अंततः सामने आ ही जाते हैं।श्रीलंका मदद के लिए भारत की तत्परता और पाकिस्तान की बयानबाज़ी के बीच का फर्क दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को एक बार फिर स्पष्ट कर गया है—**भारत मानवीय नेतृत्व निभाता है,पाकिस्तान राजनीतिक नौटंकी में उलझा रहता है।

NSK

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