बी के झा
NSK

नई दिल्ली/नूंह, 26 नवंबर
दिल्ली ब्लास्ट की जांच के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हरियाणा के नूंह जिले में एक और सख़्त कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील रिज़वान को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से संपर्क और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।नूंह के तावड़ू खंड के गांव खरखड़ी में रहने वाले रिज़वान की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और लोग पूछ रहे हैं—
“देश के भीतर आखिर कितने पाकिस्तान समर्थक छिपे बैठे हैं?
”इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों ने “साजिश के बड़े नेटवर्क की कड़ी” बताया है।पाकिस्तानियों से डिजिटल संपर्क और संदिग्ध लेन-देन जांच एजेंसी के मुताबिक,रिज़वान ने पाकिस्तान में मौजूद कुछ व्यक्तियों से ऑनलाइन संपर्क साधा था और उनके साथ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किए थे।NIA को उसके मोबाइल फोन से मिले—व्हाट्सऐप चैटकॉल डिटेल डिजिटल ट्रांसफर रिकॉर्ड विदेशी नंबरों से बातचीत ने उसके पाकिस्तान-लिंक पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “डिजिटल साक्ष्य शुरुआती स्तर पर भी बेहद गंभीर प्रतीत होते हैं।”
परिवार का दावा—“बेकसूर है, रिश्तेदारी के कारण होती है बात”वहीँ, रिज़वान के पिता जुबैर ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा—पाकिस्तान में हमारे रिश्तेदार हैं, सामान्य बातचीत होती रहती है। बेटा किसी भी देशविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं है। पुलिस अचानक उठाकर ले गई।”गांव के सरपंच अशफाक ने भी रिज़वान को “काबिल और सम्मानित वकील” बताया और कहा कि आज तक उसके खिलाफ कोई नकारात्मक शिकायत नहीं आई।
लेकिन NIA का कहना है कि पाकिस्तान यात्रा, वहां से संपर्कों और बाद में ISI लिंक पर ठोस सुराग मिले हैं।घर से मिले दस्तावेज़—जांच का दायरा और फैलादो दिन तक चली पूछताछ के बाद बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने रिज़वान के घर पर छापेमारी की।सूत्रों ने बताया—कमरे से कुछ संवेदनशील दस्तावेज़ विदेशी संपर्क वाले नोट्स इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्सरामदेव किए गए हैं।इसके बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।इसी मॉड्यूल के तार?—
इससे पहले शोएब की गिरफ्तारी दिल्ली में 10 नवंबर को लालकिले के पास हुए हमले की जांच में NIA पहले ही फरीदाबाद के धौज से शोएब को गिरफ्तार कर चुकी है।शोएब, हमलावर डॉ. उमर उन नबी का सहयोगी बताया जा रहा है, जिसने—उसे छिपाने उसे रसद दिलानेऔर उपकरण उपलब्ध कराने में मदद की थी।अब रिज़वान की गिरफ्तारी से यह शक और मजबूत हुआ है कि दिल्ली-एनसीआर में कोई गुप्त मॉड्यूल सक्रिय हो सकता है।समाजसेवियों और स्थानीय लोगों की चिंता—“अब कौन भरोसेमंद?”
नूंह के एक वरिष्ठ समाजसेवी ने कहा—देश के अंदर कितने पाकिस्तान समर्थक छिपे हुए हैं, अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। NIA और सुरक्षा बलों ने देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है।उन्होंने कहा कि जब तक—भारतीय सेना सीमा परऔर NIA-IB जैसे जांबाज़ अधिकारी देश के भीतर तैनात हैं, तब तक किसी भी दुश्मन की हिम्मत नहीं कि भारत को नुकसान पहुंचा सके।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि हाल के दिनों में “आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर केंद्र सरकार ने कठोर और निर्णायक रुख” अपनाया है।
विशेषज्ञों की राय—क्या बढ़ रहा है स्थानीय नेटवर्क का खतरा?राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ कर्नल (सेवानिवृत्त) एस. के. सांगवान का कहना है—पाकिस्तान की ISI लंबे समय से अदालतों, वकालत, परिवहन और वित्त के क्षेत्रों में अपने ‘स्लीपर एलिमेंट’ बिठाने की कोशिश करती रही है। रिज़वान की गिरफ्तारी इसी पैटर्न की तरफ संकेत देती है।”
वरिष्ठ खुफिया अधिकारी (पूर्व) विपिन माथुर कहते हैं—ISI का नया तरीका डिजिटल फंडिंग और सोशल मीडिया ब्रिज के जरिए भारत में रिश्ता-जुड़े लोगों को उपयोग में लाना है। यह नेटवर्क छोटा दिखता है लेकिन बेहद खतरनाक हो सकता है।
”निष्कर्ष
रिज़वान की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा एजेंसियाँ दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए लगातार सक्रिय हैं।यह भी स्पष्ट है कि देश के भीतर छिपे संभावित ISI लिंक को लेकर अब जांच और तेज होगी।नूंह जैसी संवेदनशील जगह से एक वकील का पकड़ा जाना कई सवाल खड़े कर रहा है—और सुरक्षा एजेंसियों की अगली रिपोर्ट में कई और खुलासों की उम्मीद है।
