बी के झा
NSK

पटना, 5 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान गुरुवार को होना है, और उससे ठीक पहले आए IANS-MATRIZE ओपिनियन पोल ने सियासी हलचल मचा दी है।
सर्वे के अनुसार, एनडीए (भाजपा-जदयू-हम-वीआईपी गठबंधन) एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए को 153 से 164 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-माले) को 76 से 87 सीटों तक सीमित बताया गया है।लेकिन इस सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खुद को “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान” कहने वाले चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के लिए नतीजे निराशा जनक हो सकते हैं।सिर्फ 4-5 सीटों का
अनुमान —
स्ट्राइक रेट पर खतरा सर्वे के अनुसार, एलजेपी को इस चुनाव में केवल 4 से 5 सीटें ही मिल सकती हैं।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि एनडीए के सीट बंटवारे में चिराग पासवान की पार्टी को 29 सीटें मिली हैं। ऐसे में अगर नतीजे सर्वे जैसे रहते हैं, तो एलजेपी का स्ट्राइक रेट बेहद कमजोर —
मात्र 15 प्रतिशत के आसपास रहेगा।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह पासवान के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है,
क्योंकि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन के आधार पर विधानसभा में अधिक सीटों की मांग की थी।
जीतनराम मांझी की पार्टी के लिए अच्छी खबर वहीं सर्वे में हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) प्रमुख जीतनराम मांझी के लिए राहत की खबर है।
उनकी पार्टी को 4 से 5 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि उन्हें कुल 6 सीटों पर मौका मिला है।यदि ऐसा हुआ तो उनकी पार्टी का स्ट्राइक रेट करीब 90 फीसदी रहेगा, जो किसी छोटे दल के लिए बड़ी सफलता मानी जाएगी।
महागठबंधन में सीट बंटवारे पर उठे सवाल
सर्वे में यह भी इशारा किया गया है कि आरजेडी को कांग्रेस को अधिक सीटें देना भारी पड़ सकता है।कांग्रेस ने इस चुनाव में 62 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि सर्वे के मुताबिक उसे सिर्फ 7 से 9 सीटें ही मिल सकती हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह वही गलती है जो अखिलेश यादव ने 2017 में यूपी चुनाव में की थी, जब उन्होंने कांग्रेस को 100 सीटें दी थीं और वह सिर्फ 7 सीटों पर सिमट गई थी।“
ऊपर आसमान, नीचे पासवान” —
बयान बना सिरदर्द
एक स्थानीय शिक्षाविद और एक वरिष्ठ पत्रकार ने, नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि चिराग पासवान की चुनावी सभाओं में भीड़ देखकर अतिउत्साहित बयानबाज़ी ने उनके अभियान को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि चिराग का प्रसिद्ध नारा “ऊपर आसमान, नीचे पासवान” जनता में अहंकार की छवि छोड़ गया, जो कई पारंपरिक समर्थकों को भी खटक गया।इसके अलावा, एलजेपी जिन अधिकांश सीटों पर लड़ रही है, वे महागठबंधन के मजबूत गढ़ों में हैं, जहां जातीय समीकरण उनके पक्ष में नहीं हैं। यही वजह है कि सर्वे में उनकी संभावनाएं कमजोर बताई गई हैं।
एनडीए को बढ़त लेकिन चुनौतियां बरकरार सर्वे
के मुताबिक एनडीए को बहुमत मिलने के आसार तो हैं, लेकिन उसके भीतर असंतोष और सहयोगी दलों के बीच खींचतान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एनडीए के मजबूत प्रदर्शन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, केंद्र की योजनाओं के प्रचार और नीतीश कुमार के प्रशासनिक अनुभव को दिया जा रहा है।हालांकि, जमीनी स्तर पर बेरोजगारी, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दे अब भी मतदाताओं को बेचैन कर रहे हैं।
विश्लेषण
बिहार चुनाव के इस ओपिनियन पोल ने स्पष्ट कर दिया है कि मुकाबला एकतरफा नहीं बल्कि जटिल राजनीतिक संतुलन का खेल है।जहां एनडीए सत्ता वापसी की ओर बढ़ता दिख रहा है,
वहीं चिराग पासवान जैसी युवा नेतृत्व वाली पार्टियों को अपने “अति आत्मविश्वास” और अति व्यक्तिगत प्रचार शैली पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर नतीजे पोल जैसे रहे, तो यह संदेश जाएगा कि “मोदी का हनुमान भी अकेले चुनाव नहीं जीत सकता।
”ओपिनियन पोल भले कुछ भी अनुमान लगाए लेकिन असली फैसला 14 नवंबर को सबके सामने आ जाएगा
