बी के झा
NSK

प्रयागराज ( यूपी ) / न ई दिल्ली 2 फरवरी
प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में ललिता जयंती के अवसर पर आयोजित धार्मिक आयोजन और दूसरी ओर एक स्कूल में सामने आया गबन का मामला—ये दोनों घटनाएं अलग-अलग प्रतीत होती हैं, लेकिन समाज, नैतिकता, आस्था और कानून के बड़े प्रश्नों को एक साथ सामने रखती हैं। एक ओर सनातन चेतना, गौ-रक्षा और राष्ट्र निर्माण की बात हो रही है, तो दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था में विश्वास के टूटने का मामला प्रशासन और समाज को झकझोर रहा है।
ललिता जयंती और सनातन चेतना का उद्घोष
माघ मेला क्षेत्र में युवा चेतना के शिविर में ललिता जयंती के अवसर पर श्रीविद्या लक्षार्चन महायज्ञ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने कुमकुम से श्रीललिता सहस्त्रनाम के मंत्रों के साथ देश की प्रगति, विश्व शांति और गरीब कल्याण के लिए आहुतियां दीं।इस अवसर पर स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि “देश में सनातन धर्म का डंका बज रहा है। आने वाले दस वर्षों में देश के प्रत्येक गांव में माता ललिता का महायज्ञ आयोजित करना हमारा लक्ष्य है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अब बंगाल और केरल में गौ-रक्षा और गौ-संरक्षण के लिए संगठित संघर्ष की आवश्यकता है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने माता ललिता से सर्वकल्याण की कामना करते हुए युवा चेतना और स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी के सामाजिक कार्यों की सराहना की।
आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक उपेन्द्र भाई त्यागी ने कहा कि भारत तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है, जबकि युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा कि “सनातन के ध्वज के साथ आज देश का हर वर्ग खड़ा है। वर्ष 2047 से पहले भारत को विश्वगुरु बनाना ही हमारा संकल्प है।”
राजनीतिक विश्लेषक: आस्था और राजनीति का संगम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गौ-रक्षा और सनातन चेतना के ऐसे आह्वान अब केवल धार्मिक नहीं रह गए हैं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं। उनका कहना है कि “बंगाल और केरल का उल्लेख यह संकेत देता है कि यह आंदोलन राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति से भी जुड़ा है।”
हिंदू संगठन और धर्मगुरु: सांस्कृतिक पुनर्जागरण की बात
विभिन्न हिंदू संगठनों और धर्मगुरुओं ने इस आह्वान को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में जरूरी कदम बताया। उनका कहना है कि गौ-रक्षा केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा है।
विपक्षी दल: धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण का आरोप
विपक्षी दलों ने इस आयोजन और बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “धार्मिक मंचों से राजनीतिक संदेश देना सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है।” विपक्ष का आरोप है कि गौ-रक्षा जैसे मुद्दों का इस्तेमाल चुनावी ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।
मुस्लिम मौलानाओं की प्रतिक्रिया: संवाद और कानून की जरूरत
मुस्लिम धर्मगुरुओं और मौलानाओं ने कहा कि गौ-रक्षा या किसी भी धार्मिक मुद्दे को संविधान और कानून के दायरे में रहकर उठाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि “भारत की ताकत उसकी विविधता और आपसी संवाद में है, न कि टकराव में।
”शिक्षा में विश्वासघात: स्कूल गबन का मामला
इसी बीच प्रयागराज के नेवादा अशोक नगर स्थित एक स्कूल में सामने आया गबन का मामला समाज के दूसरे चेहरे को उजागर करता है। स्कूल प्रबंधक आकाश गुप्ता की तहरीर पर लेखाकर्मी करन के खिलाफ कैंट थाने में गबन और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया है।आरोप है कि लेखाकर्मी ने अभिभावकों से स्कूल शुल्क अपने और परिजनों के खातों में यूपीआई के जरिए जमा कराया, नकली रसीदें दीं और स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड में कूट रचना की। बाद में वह बिना सूचना दिए फरार हो गया।
कानूनविद: कड़ी सजा और निगरानी जरूरी
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि विश्वासघात और धोखाधड़ी का गंभीर उदाहरण है। “ऐसे मामलों में कड़ी सजा और स्कूलों में वित्तीय ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए,” एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा।
शिक्षाविद: पारदर्शिता के बिना शिक्षा संभव नहीं
शिक्षाविदों का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं होगी तो अभिभावकों का भरोसा टूटेगा। उन्होंने निजी स्कूलों में डिजिटल भुगतान और थर्ड-पार्टी ऑडिट को अनिवार्य बनाने की मांग की।
निष्कर्ष:
आस्था, आचरण और कानून का संतुलनप्रयागराज की ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि समाज के सामने दोहरी चुनौती है—
एक ओर सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का उभार, दूसरी ओर संस्थागत नैतिकता और कानून के पालन की आवश्यकता।
यदि आस्था को कानून, संवाद और पारदर्शिता से जोड़ा जाए, तभी समाज संतुलित और मजबूत बन सकता है।
