बयान से उफान पर सियासत कैबिनेट मंत्री के पति की टिप्पणी ने छेड़ी* *महिला सम्मान, सत्ता की संवेदनशीलता और नैतिक जिम्मेदारी पर बहस

बी के झा

NSK

देहरादून / पटना, 2 जनवरी

उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर तीखे विवाद के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला किसी सरकारी फैसले का नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के उस बयान का है, जिसने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि समाज की सोच और सत्ता से जुड़े लोगों की मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में गिरधारी लाल साहू को यह कहते सुना जा रहा है—“अगर शादी नहीं हो रही है तो 20–25 हजार में बिहार से लड़की खरीद लो।”वीडियो सामने आते ही यह बयान राजनीतिक तूफान का कारण बन गया।विपक्ष का तीखा हमला: ‘यह सिर्फ जुबान नहीं, मानसिकता है’कांग्रेस ने इस बयान को महिला विरोधी, अमानवीय और शर्मनाक करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला है।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पाल ने कहा—“जिस सरकार में महिला सशक्तिकरण की जिम्मेदारी संभालने वाली मंत्री के परिवार से इस तरह की भाषा निकलती है, वह महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की बात करने का नैतिक अधिकार खो चुकी है।”उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह बयान भाजपा सरकार की संवेदनहीनता और दोहरे चरित्र को उजागर करता है। कांग्रेस ने भाजपा नेतृत्व से स्पष्ट रुख अपनाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

आरजेडी का आक्रोश:

बिहार की महिलाओं का अपमान यह विवाद उत्तराखंड की सीमाओं से निकलकर बिहार की राजनीति तक पहुंच गया। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इसे बिहार की महिलाओं का खुला अपमान बताया।पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि—“भाजपा और संघ से जुड़े लोगों की बिहार की महिलाओं को लेकर ऐसी घृणित सोच बार-बार सामने आती रही है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का बयान नहीं, बल्कि एक पूरी विचारधारा का प्रतिबिंब है।”

आरजेडी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से इस मुद्दे पर जवाब मांगते हुए भाजपा नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अरुण सिन्हा मानते हैं—“जब सत्ता से जुड़े लोग महिलाओं को वस्तु की तरह प्रस्तुत करते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। ऐसे बयान चुनावी नहीं, बल्कि नैतिक संकट पैदा करते हैं।”उनके अनुसार, यह विवाद भाजपा की उस छवि को और नुकसान पहुंचा सकता है, जिसे वह महिला सम्मान और ‘बेटी बचाओ’ जैसे अभियानों के जरिए गढ़ने की कोशिश करती रही है।

शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया:

समाज के लिए खतरनाक सोच समाज शास्त्री डॉ. मीना पाठक कहती हैं—“लड़कियों को ‘खरीदने’ की भाषा मानव तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराई को सामान्य बनाती है। यह सोच न केवल महिलाओं, बल्कि पूरे समाज के नैतिक ढांचे को कमजोर करती है।”

हिंदू संगठनों की नाराज़गी

कुछ हिंदू संगठनों ने भी इस बयान से खुद को अलग करते हुए नाराज़गी जाहिर की है। एक संगठन के पदाधिकारी ने कहा—“स्त्री का सम्मान भारतीय संस्कृति का मूल है। ऐसे बयान किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं और इन्हें हिंदू मूल्यों से जोड़ना गलत है।”

कानूनविदों की चेतावनी:

बयान नहीं, अपराध की मानसिकता

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह,एडवोकेट संजय वर्मा का कहना है—“यदि इस तरह के बयान मानव तस्करी या महिला खरीद-बिक्री को बढ़ावा देते हैं, तो यह सिर्फ नैतिक नहीं, बल्कि कानूनी तौर पर भी गंभीर मसला है। ऐसे मामलों में जांच और जवाबदेही जरूरी है।”गिरधारी लाल साहू की सफाईबढ़ते दबाव के बीच गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो जारी कर कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।उनका दावा है कि वे अपने एक दोस्त के विवाह से जुड़ा किस्सा सुना रहे थे और कांग्रेस जानबूझकर इसे राजनीतिक रंग दे रही है ताकि उनकी पत्नी और मंत्री रेखा आर्या की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।पुराने विवादों से भी जुड़ा रहा है नाम

गौरतलब है कि गिरधारी लाल साहू का नाम इससे पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है।एक डबल मर्डर केस से जुड़ी चर्चाएं,और नौकर नरेश चंद्र गंगवार की किडनी धोखे से निकलवाकर अपनी दूसरी पत्नी के ट्रांसप्लांट कराने जैसे गंभीर आरोप।हालांकि इन मामलों में कानूनी स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे रहे हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये घटनाएं साहू की सार्वजनिक छवि को और विवादास्पद बनाती हैं।

बड़ा सवाल

यह पूरा विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है—क्या सत्ता से जुड़े लोग अपने शब्दों और सोच के प्रति उतने ही जिम्मेदार हैं, जितनी जिम्मेदारी वे जनता से उम्मीद करते हैं?फिलहाल, बयान पर सियासत जारी है और निगाहें भाजपा नेतृत्व की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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