बिहार में शहरी भू-माफिया पर मार्च तक ‘फाइनल एक्शन’ का दावा, सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

बी के झा

NSK

पटना 18 जनवरी

बिहार में भूमि माफियाओं के खिलाफ नीतीश कुमार सरकार ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाने का दावा किया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ऐलान किया है कि मार्च महीने तक बिहार के शहरी भू-माफियाओं का पूरी तरह हिसाब कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरी विकास की राह में भूमि माफिया सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं और अब सरकार उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि“बालू माफिया का इलाज किया जा चुका है। शराब माफिया का इलाज उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी कर रहे हैं। अब भूमि माफिया की बारी है और इनका भी मार्च तक हिसाब कर दिया जाएगा।”उन्होंने यह भी कहा कि बिहार को पूर्वी भारत का टेक हब बनाया जाएगा। डिफेंस कॉरिडोर के साथ-साथ सेमीकंडक्टर यूनिट्स स्थापित की जाएंगी।

भविष्य के शहरों की रूपरेखा पर काम हो रहा है, क्योंकि रोजगार और बेहतर जीवनशैली की तलाश में लोग शहरों की ओर रुख करते हैं। इसी उद्देश्य से राज्य में 11 नए टाउनशिप विकसित किए जाएंगे, जिनमें नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों के साथ सोनपुर और सीतामढ़ी को भी शामिल किया गया है।

विपक्ष का तीखा हमला: ‘कागजी शेर’ है सरकार

सरकार के इन दावों पर विपक्ष ने तीखा पलटवार किया है।राजद नेता और वरिष्ठ समाजसेवी तेजस्वी यादव ने नीतीश-भाजपा गठबंधन सरकार को “कागजी शेर” बताते हुए कहा कीएक तरफ उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा मीडिया में यह दिखाते हैं कि उनकी सरकार भूमाफिया के लिए काल बन गई है, जबकि दूसरी तरफ उन्हीं के मंत्री, विधायक और उनके संरक्षण में बैठे लोग पूरे बिहार में कोहराम मचा रहे हैं।

”कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेम चन्द्र मिश्रा ने भी दोनों उपमुख्यमंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि“एक उपमुख्यमंत्री भूमाफिया पर कार्रवाई की बात कर वाहवाही लूट रहे हैं, वहीं दूसरे उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी बालू माफिया, शराब माफिया और कानून व्यवस्था पर कार्रवाई का दावा करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि आज पूरे बिहार में बालू माफिया पुलिस के साथ मिलकर नदी किनारे की जमीन को नदी बना कर खुलेआम धन उगाही कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि“पूरे बिहार में हर गली-मोहल्ले में देशी से लेकर विदेशी शराब खुलेआम बिक रही है, वह भी पुलिस के संरक्षण में। इसके बावजूद गृह मंत्री अपनी पीठ खुद थपथपाते रहते हैं।

जमीनी हकीकत: पुलिस के सामने बिकती शराब

यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि जमीनी सच्चाई सरकार के दावों से काफी अलग दिखाई देती है।स्वयं अपने वरिष्ठ सहयोगियों द्वारा की गई पड़ताल में यह सामने आया कि दरभंगा और मधुबनी जिलों में खुलेआम देशी और विदेशी शराब की बिक्री हो रही है, और यह सब पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है।

हालांकि, यह भी सच है कि सभी पुलिस अधिकारी एक जैसे नहीं हैं। कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जो अपने कर्तव्य को पूजा मानकर निभा रहे हैं।

उम्मीद की किरण: मनीगाछी के थानाध्यक्ष रंजीत सिंह

इसी क्रम में दरभंगा जिले के मनीगाछी थाना प्रभारी रंजीत सिंह का नाम विशेष रूप से सामने आता है। वे ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जो शराब माफिया और बदमाशों के लिए काल साबित हुए हैं।1 जनवरी को मनीगाछी में हुई एक महिला की हत्या की गुत्थी उन्होंने बेहद कम समय में सुलझाकर असली कातिल को जेल पहुंचाया।

कानूनविदों और शिक्षाविदों का मानना है कि“

यदि बिहार को ऐसे ईमानदार, निर्भीक और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी मिल जाएं, तो सच में बिहार की तस्वीर बदली जा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषण: दावा बनाम धरातल

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में माफिया-राज तभी खत्म हो सकता है जब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि निष्पक्ष और निरंतर कार्रवाई हो।

कानून के जानकारों के अनुसार,“जब तक राजनीतिक संरक्षण खत्म नहीं होगा, तब तक भूमाफिया, बालू माफिया और शराब माफिया पर स्थायी अंकुश लगना मुश्किल है।

निष्कर्ष

एक ओर सरकार मार्च तक भू-माफियाओं के खातमे का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष और जमीनी सच्चाई इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि मार्च के बाद बिहार में वाकई माफिया राज कमजोर होता है या यह घोषणा भी पिछली घोषणाओं की तरह केवल बयान बनकर रह जाती है।

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