बी के झा
NSK


पटना , 9 जनवरी
बिहार में प्रशासनिक मशीनरी को नए सिरे से सजाने की कवायद तेज हो गई है। एक ओर 22 आईएएस और 11 बिहार प्रशासनिक सेवा (बिप्रसे) अधिकारियों का तबादला कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, तो दूसरी ओर इससे पहले ही 71 आईपीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर फेरबदल ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। सरकार इसे “प्रशासनिक मजबूती और सुशासन” की दिशा में कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव, चुनावी तैयारी और कथित धन-उगाही से जोड़कर देख रहा है।
युवा अफसरों को फील्ड की कमान इस प्रशासनिक बदलाव की सबसे अहम बात यह है कि 2019 से 2023 बैच के युवा आईएएस अधिकारियों को सीधे फील्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कृतिका मिश्रा को पटना सदर की अनुमंडलाधिकारी (SDO)शुभम कुमार को नालंदा का उप विकास आयुक्त (DDC)गरिमा लोहिया को बाढ़ (पटना)अनिरुद्ध पांडेय को दानापुरआकांक्षा आनंद को मुजफ्फरपुर (पश्चिम)रोहित कर्दम को भागलपुर के नवगछिया का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह संकेत है कि सरकार अब युवा अफसरों के जरिए फील्ड-लेवल गवर्नेंस को तेज करना चाहती है।नगर निकाय और विकास प्रशासन में बदलावसात प्रमुख नगर निगमों के आयुक्त बदले गए हैं, जिनमेंगयाजी,बिहारशरीफ (नालंदा),बेतिया,मोतिहारी,मुंगेर,भागलपुर, मुजफ्फरपुर शामिल हैं।इसके साथ ही नौ जिलों में उप विकास आयुक्त सह जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बदले गए हैं। इससे साफ है कि सरकार की नजर शहरी प्रशासन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर है।सचिवालय और नीति स्तर पर भी फेरबदल केवल फील्ड ही नहीं, बल्कि सचिवालय स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं।समीर सौरभ को कॉम्फेड, पटना का प्रबंध निदेशक दीपक कुमार मिश्र को मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिवआशीष नारायण को मुख्यमंत्री सचिवालय में विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार निराला को बिहार कर्मचारी चयन आयोग का सचिव ज्योत्स्ना कृष्ण को सामान्य प्रशासन विभाग में विशेष कार्य पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।
इससे स्पष्ट है कि सरकार नीति निर्माण और प्रशासनिक समन्वय को भी कसना चाहती है।71 IPS तबादले:
कानून-व्यवस्था का नया चेहरा IAS के बाद 71 IPS अधिकारियों के तबादले ने सबसे ज्यादा राजनीतिक तापमान बढ़ाया है।
कुंदन कृष्णन को STF का डीजी सुनील कुमार को ADG मुख्यालय कांग्रेस कुमार मिश्रा को मुजफ्फरपुर का SSP सुशील कुमार को गया जी का SSP प्रमोद कुमार यादव को भागलपुर SSP विनीत कुमार को सारण SSP सागर कुमार को पटना ट्रैफिक SP जैसी पोस्टिंग्स को सरकार अपराध नियंत्रण और सख्त कानून-व्यवस्था की दिशा में निर्णायक कदम बता रही है।
सरकार का पक्ष: “सुशासन और सुरक्षा”डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी के करीबी सूत्रों का कहना है कि“यह फेरबदल पूरी तरह प्रशासनिक है। सरकार अपराध, भ्रष्टाचार और लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस चाहती है।”सरकार का दावा है कि STF, साइबर और ट्रैफिक जैसी यूनिट्स को मजबूत कर जन-सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
विपक्ष का तीखा आरोप
वहीं विपक्षी दलों ने इस बड़े फेरबदल पर सीधा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर तबादलों के पीछे पैसे की उगाही का खेल है,और इन पैसों का इस्तेमाल आगामी बंगाल चुनाव में “धन-बल” के रूप में किया जाएगा।विपक्षी नेताओं का कहना है कि“बीजेपी कोटे से आए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने और विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए कर रहे हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह फेरबदल केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है।एक तरफ कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश,दूसरी तरफ चुनाव से पहले प्रशासन पर पकड़।उनके अनुसार, बिहार की राजनीति में प्रशासन हमेशा सत्ता का अहम औजार रहा है, और यह बदलाव उसी परंपरा का नया अध्याय हो सकता है।
कानूनविद और शिक्षाविद क्या कहते हैं
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह का कहना है कि“तबादला सरकार का अधिकार है, लेकिन उसका उद्देश्य पारदर्शी और जनहित में दिखना चाहिए।”शिक्षाविदों के अनुसार,“युवा अफसरों को मौका देना सकारात्मक कदम है, लेकिन यदि प्रशासनिक स्थिरता नहीं रही, तो इसका असर योजनाओं पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
22 IAS और 71 IPS अधिकारियों का यह व्यापक फेरबदल बिहार प्रशासन के इतिहास के बड़े बदलावों में से एक माना जा रहा है।सरकार इसे सुशासन, सुरक्षा और विकास का रास्ता बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक इंजीनियरिंग और चुनावी तैयारी करार दे रहा है।अब असली कसौटी यह होगी कि
यह प्रशासनिक रीसेट जमीन पर कानून-व्यवस्था, विकास और जनता के भरोसे में कितना बदलाव ला पाता है—
या फिर यह फेरबदल सियासत की भेंट चढ़कर केवल फाइलों तक सीमित रह जाता है।
