बिहार विधानसभा को मिला नया अध्यक्ष: डॉ. प्रेम कुमार निर्विरोध चुने गए, विपक्ष ने भी जताया विश्वास

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/पटना 2 दिसंबर

,बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ गया। भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार डॉ. प्रेम कुमार को सर्वसम्मति से राज्य विधानसभा का 18वां स्पीकर चुन लिया गया। दिलचस्प बात यह रही कि उनके नाम पर न केवल एनडीए बल्कि विपक्षी दलों की ओर से भी पूरी सहमति दिखाई दी, जिससे यह चुनाव निर्विरोध संपन्न हुआ।अध्यक्ष पद पर डॉ. प्रेम कुमार के चयन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन की ओर से उन्हें बधाई दी और कहा—प्रेम कुमार जी सदन की प्रक्रियाओं के गहरे जानकार हैं। आशा है कि उनके नेतृत्व में सदन सुचारु और गरिमामय ढंग से चलेगा। मैं आग्रह करता हूं कि पूरा सदन खड़े होकर उनका सम्मान व्यक्त करे।”कौन हैं डॉ. प्रेम कुमार?बिहार भाजपा में डॉ. प्रेम कुमार एक ऐसा नाम हैं जो अनुभव, निरंतरता और संगठनात्मक पकड़—

तीनों का प्रतिनिधित्व करता है।लगातार नौ बार गया शहर से विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड अपने आप में उनकी लोकप्रियता और जमीनी पकड़ का प्रमाण है।वर्ष 1990 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के उन चंद नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और सादगी से राजनीतिक यात्रा को ऊंचाई दी।मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त डॉ. कुमार अपनी विद्वता और शालीनता के लिए भी जाने जाते हैं।राज्य सरकार में वे अब तक 10 से अधिक विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

2005 में पहली बार मंत्री पद संभालने के बाद 2010, 2017–2020 और 2020–2024 तक उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों में उल्लेखनीय जिम्मेदारियाँ निभाईं। 2015 में वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।सदन संचालन को लेकर उनकी प्राथमिकता

एँस्पीकर चुने जाने के बाद डॉ. प्रेम कुमार ने स्पष्ट किया कि उनका प्रमुख लक्ष्य विधानसभा की कार्यवाही को पारदर्शी, मर्यादित और नियम सम्मत बनाना होगा।उन्होंने कहा कि सदन केवल राजनीतिक बहस का केंद्र नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों और समस्याओं के समाधान का मार्गदर्शक मंच है। इसलिए सभी सदस्यों को प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली का कड़ाई से पालन करना होगा।100 से अधिक नए विधायकों के लिए विशेष कार्यशाला इस विधानसभा में 100 से अधिक नए चेहरे आने को देखते हुए स्पीकर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की—

नई विधायकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें संसदीय कार्यप्रणाली की बारीकियाँ सिखाई जाएँगी।प्रशिक्षण में शामिल होंगे—प्रश्नकाल शून्यकाल तारांकित व अतारांकित प्रश्नअल्पसूचना प्रश्नचर्चाओं और विधायी कार्यों की तकनीक

डॉ. कुमार ने कहा—> “विधायकों को अपने क्षेत्र, जिले और राज्य से जुड़े प्रासंगिक प्रश्न उठाने की कला सीखनी होगी। सदन तब ही सार्थक बनेगा जब जन समस्याएँ सही ढंग से प्रस्तुत हों।”सभी दलों को साथ लेकर चलने का संकल्प नई जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि वे सदन को सर्वदलीय सहयोग और लोकतांत्रिक समन्वय से आगे बढ़ाएँगे।

उनके अनुसार, स्पीकर का पद दलगत सीमाओं से परे होता है और वे इस भावना को पूरी निष्ठा से निभाएँगे।

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा को अब एक ऐसा अध्यक्ष मिला है जो तीन दशक के अनुभव, गहरी संसदीय समझ और सधी हुई राजनीतिक दृष्टि के साथ सदन का मार्गदर्शन करेंगे।डॉ. प्रेम कुमार का निर्विरोध चुना जाना इस बात का संकेत भी है कि सूबे की राजनीतिक दुनिया में उनके प्रति विश्वास और सम्मान दोनों कायम है।

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