बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 6 अक्टूबर
बिहार की सियासत में आज से चुनावी माहौल औपचारिक रूप से गर्म होने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा।सूत्रों के अनुसार, इस बार राज्य में एक या अधिकतम दो चरणों में ही मतदान संपन्न कराया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह बिहार के चुनावी इतिहास में एक बड़ा और नया प्रयोग होगा, क्योंकि अब तक राज्य में चुनाव आमतौर पर कई चरणों में कराए जाते रहे हैं।कम चरणों में चुनाव की तैयारी — सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स पर रहा फोकसमुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग की टीम ने बीते सप्ताह पटना पहुंचकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी और जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई थी। आयोग ने प्रत्येक जिले से मतदाता सूची, बूथों की स्थिति, सुरक्षा कर्मियों की संख्या, और चुनाव सामग्रियों की उपलब्धता का ब्यौरा मांगा था।अब दिल्ली से तारीखों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।सूत्रों के मुताबिक, इस बार सुरक्षा बलों की उपलब्धता और प्रशासनिक तैयारी को देखते हुए आयोग ने निर्णय लिया है कि मतदान को कम चरणों में निपटाया जाए, ताकि खर्च भी घटे और परिणाम शीघ्र घोषित किए जा सकें।मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो चुका हैनिर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया था।उसी दिन सभी जिलों में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूची की सॉफ्ट और हार्ड कॉपी सौंपी गई।इसके बाद से ही राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं।विभिन्न जिलों में चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने वाले कर्मचारियों के प्रशिक्षण सत्र भी शुरू हो चुके हैं।एनडीए बनाम महागठबंधन — सीट बंटवारे पर तेज मंथनचुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही एनडीए और महागठबंधन दोनों ही खेमों में सीट बंटवारे और उम्मीदवारों की सूची पर मंथन तेज हो गया है।एनडीए की ओर से जेडीयू, बीजेपी और HAM में तालमेल की कवायद जारी है, जबकि महागठबंधन में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के बीच सीटों के फार्मूले पर चर्चा चल रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मुकाबला विकास, बेरोजगारी, महिला सशक्तिकरण और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेगा।इतिहास में पहली बार इतनी कम चरणों में चुनाव संभवबिहार में अब तक हुए विधानसभा चुनाव आमतौर पर कई चरणों में संपन्न होते रहे हैं।2020 में तीन चरणों में मतदान हुआ था — 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर।2015 में पांच चरणों में वोटिंग कराई गई थी।2010 में छह चरणों में मतदान हुआ था।अक्टूबर 2005 में चार चरणों और फरवरी 2005 में तीन चरणों में वोटिंग हुई थी।अगर इस बार सिर्फ एक या दो चरणों में चुनाव कराया जाता है, तो यह 2005 के बाद पहली बार होगा जब बिहार में इतनी कम अवधि में विधानसभा चुनाव संपन्न होंगे। उपचुनावों का भी ऐलान संभवचुनाव आयोग की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ कई राज्यों की खाली सीटों पर उपचुनाव की घोषणा भी की जा सकती है।देशभर में जिन विधानसभा क्षेत्रों में सीटें रिक्त हैं, वहां मतदान की संभावित तारीखें आज घोषित की जाएंगी। (विश्लेषण)राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कम चरणों में चुनाव कराने का निर्णय प्रशासनिक सरलता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया जा सकता है।साथ ही, कम चरणों में मतदान से चुनावी खर्च घटेगा, सुरक्षा बलों पर दबाव कम होगा, और राजनीतिक स्थिरता जल्दी स्थापित हो सकेगी।हालांकि, विपक्ष का मानना है कि इतनी कम अवधि में चुनाव कराने से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार और पहुंच की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। निष्कर्ष:बिहार आज शाम से आधिकारिक रूप से चुनावी मोड में प्रवेश करने जा रहा है।एक ओर जनता विकास और स्थिरता की उम्मीदों के साथ नए जनादेश की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर सियासी दल रणनीतियों और नारों के सहारे मतदाताओं को लुभाने की जुगत में जुट चुके हैं।अब सभी निगाहें शाम 4 बजे की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां से बिहार की चुनावी बिसात का औपचारिक बिगुल बज जाएगा।
