बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 6 अक्टूबर
बिहार की प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर अब सियासत के सुरों में कदम रख सकती हैं। भाजपा के शीर्ष नेताओं — बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से उनकी हालिया मुलाकात के बाद इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि पार्टी उन्हें आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बना सकती है।सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और विनोद तावड़े के ट्वीट ने इस संभावना को और हवा दी है। तावड़े ने लिखा,वर्ष 1995 में लालू राज आने के बाद जो परिवार बिहार छोड़कर चला गया था, उस परिवार की बिटिया, सुप्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर, अब बदलते बिहार की रफ्तार को देखकर फिर से बिहार लौटना चाहती हैं। हमने उनसे आग्रह किया कि वे बिहार के विकास और जनता की सेवा में अपनी भूमिका निभाएं।”इस बयान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा “बिहार की बेटी” मैथिली ठाकुर को इस बार चुनावी मंच पर उतारने की तैयारी में है? बेनीपट्टी से चुनाव लड़ सकती हैं मैथिली ठाकुरमधुबनी जिले के बेनीपट्टी की रहने वाली 25 वर्षीय मैथिली ठाकुर संगीत जगत का बड़ा नाम हैं। 2011 में ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ में अपनी अद्भुत गायकी से उन्होंने देशभर में पहचान बनाई थी।राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व उन्हें बेनीपट्टी विधानसभा सीट से टिकट देने पर विचार कर रही है। हालांकि यह सीट वर्तमान में भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद नारायण झा के कब्जे में है, जो दो बार विधायक और एक बार विधान पार्षद रह चुके हैं।झा की उम्र अब 68 वर्ष हो चुकी है। ऐसे में भाजपा में यह चर्चा भी तेज है कि युवा चेहरा आगे लाकर पार्टी इस सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है।ब्राह्मण समाज में उठी असहमतिहालांकि पार्टी की यह रणनीति सर्वसम्मति से स्वीकार नहीं हो रही। मैथिली ठाकुर का नाम जैसे ही सामने आया, ब्राह्मण समाज के कई प्रमुख नेताओं ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि “मैथिली ठाकुर ने अब तक अपने संगीत के अलावा समाजसेवा में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई, ऐसे में भाजपा का यह फैसला केवल ‘लोकप्रियता की राजनीति’ लगती है।”कुछ नेताओं ने तो यह तक कहा कि भाजपा को “प्रसिद्ध चेहरे के बजाय जमीनी कार्यकर्ता को मौका देना चाहिए।”एक वरिष्ठ ब्राह्मण नेता ने कहा,क्या भाजपा को लगता है कि सिर्फ एक गायिका को टिकट देने से पूरा समाज उनके साथ आ जाएगा? यह भ्रम है। ऐसे फैसले पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।”पीएम मोदी पहले ही जता चुके हैं प्रशंसागौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मैथिली ठाकुर की प्रतिभा के प्रशंसक हैं। उन्होंने कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर उनका भजन साझा करते हुए लिखा था “बिहार की बेटी मैथिली ठाकुर ने भारतीय लोकसंस्कृति की आत्मा को अपनी आवाज में साकार किया है।”पीएम की इस सार्वजनिक प्रशंसा के बाद यह कयास लगने लगे थे कि भाजपा उन्हें सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में राजनीतिक मंच पर ला सकती है।चुनाव से पहले भाजपा की रणनीतिराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार बिहार में ब्राह्मण और युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश में है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि संस्कृति और युवा ऊर्जा के मेल से “नए बिहार” की ओर अग्रसर है।हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि “अभी तक मैथिली ठाकुर को लेकर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व का रुझान सकारात्मक है।”विपक्ष ने साधा निशानावहीं, विपक्षी दलों ने इस मुलाकात पर तंज कसा है। राजद के एक प्रवक्ता ने कहा,भाजपा के पास अब जमीनी नेता नहीं बचे हैं, इसलिए वे अब कलाकारों और गायकों को टिकट देकर प्रचार करवाना चाहते हैं। बिहार की जनता अब ऐसे प्रयोगों से भ्रमित नहीं होगी।”संपादकीय टिप्पणी:मैथिली ठाकुर बिहार की लोकसंस्कृति की जीवित प्रतीक हैं। यदि वह राजनीति में उतरती हैं, तो यह एक नई शुरुआत होगी — लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी। लोकप्रियता और जनसेवा के बीच की दूरी तभी मिटेगी जब यह सफर ईमानदारी और निष्ठा से तय किया जाए।
