बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 7 नवंबर
दुनिया भर में चल रही परमाणु रणनीति, परीक्षणों की चर्चाओं और अमेरिका–पाकिस्तान–चीन की सक्रिय कूटनीतिक हलचलों के बीच भारत ने अपना रुख अब बेहद स्पष्ट, बेहद ठोस और बिल्कुल बेख़ौफ तरीके से सामने रख दिया है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा—“भारत पर कोई दबाव नहीं डाल सकता।
न अमेरिका, न चीन, न पाकिस्तान… और न ही दुनिया का कोई दूसरा देश।”न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू में रक्षा मंत्री का यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत की बदली हुई रणनीतिक पहचान का एलान था—एक ऐसा भारत जो अपनी सुरक्षा-नीति दूसरों के इशारों पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों और आत्मविश्वास के आधार पर तय करता है।
परमाणु परीक्षणों पर भारत का रुख — “जो हमें सही लगेगा, वही करेंगे”अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद चर्चा तेज़ थी कि शायद भारत पर भी वैश्विक दबाव बढ़ाया जा रहा है।लेकिन राजनाथ सिंह ने इन आशंकाओं को उन्हीं के शब्दों में काट दिया:अमेरिका और पाकिस्तान जो चाहे करें। भारत उसी समय कदम उठाएगा जो भारत को उचित लगेगा। कोई हमें निर्देश नहीं दे सकता।यह बयान दुनिया के उन ताकतवर देशों को भी साफ संदेश देता है जो अक्सर दक्षिण एशिया की राजनीति में अपनी दखल देना अपना अधिकार समझते रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर पर खुलासा — पाकिस्तान बार-बार कॉल कर रहा था युद्धविराम के लिए रक्षा मंत्री ने पहली बार सार्वजनिक रूप से वह बात कही जिसे अब तक सिर्फ अनुमान के तौर पर जाना जाता था:पाकिस्तान के DGMO की ओर से हमें लगातार फोन आ रहे थे—युद्धविराम की गुहार लगाते हुए।”उन्होंने साफ किया कि—युद्धविराम अमेरिका के कहने पर नहीं,बल्कि भारत ने अपने लक्ष्यों की पूर्ति के बाद किया।और अगर ज़रूरत पड़ी तो ऑपरेशन सिंदूर फिर शुरू होगा।यह स्पष्ट संकेत है कि भारत अपनी सैन्य कार्रवाई अपने नियमों से चलाता है—न कि किसी महाशक्ति की मंजूरी से।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस — “हमने सिर्फ आतंकवादियों को निशाना बनाया”राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के उन दावों को भी कठोरता से खारिज किया, जिनमें पाक पक्ष नागरिक क्षेत्रों में भारतीय हमलों का आरोप लगाता रहा है।रक्षा मंत्री के शब्दों में—भारतीय सेना ने सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान के नागरिकों पर हमला करने का आरोप पूरी तरह झूठ है।”यह बयान भारत की सैन्य नैतिकता और पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा दोनों पर एक बार में निर्णायक प्रहार है।
“पाकिस्तान पर भरोसा नहीं”—राजनाथ की सीधी टिप्पणीजब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप ने युद्धविराम करवाने में भूमिका निभाई?राजनाथ सिंह का दो-टूक जवाब आया—नहीं। युद्धविराम सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच था। कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था।”और फिर आई वह टिप्पणी जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी—पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।”यह न केवल पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के लिए संदेश था, बल्कि विदेशी मध्यस्थता चाहने वालों के लिए भी एक कूटनीतिक ठप्पा।
चीन और अमेरिका को भी अप्रत्यक्ष चेतावनीराजनाथ सिंह का पूरा बयान सिर्फ पाकिस्तान को ही नहीं, बल्कि चीन और अमेरिका दोनों को संकेत देता है कि—भारत किसी भी दबाव में नहीं झुकेगाभारत अपनी परमाणु नीति खुद तय करेगाऔर भारत की संप्रभुता अस्पृश्य हैउनके शब्द स्पष्ट करते हैं कि नया भारत केवल प्रतिक्रियाशील नहीं, बल्कि रणनीतिक रुप से आत्मनिर्भर राष्ट्र है।
विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
“150 करोड़ भारतीयों का सिर ऊँचा हुआ”राजनीतिक विश्लेषकों, सुरक्षा विशेषज्ञों और राष्ट्रवादी दलों ने रक्षा मंत्री के बयान का स्वागत किया है।
उनके अनुसार—यह बयान भारत की सामरिक स्वतंत्रता का घोषणापत्र है। यह वह भारत है जो डरता नहीं—और जिसे डराया भी नहीं जा सकता।सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक, राजनाथ सिंह की दृढ़ता और पारदर्शिता की खुलकर प्रशंसा हो रही है।
निष्कर्ष
भारत अब आदेश सुनने वाला देश नहीं, विश्व-राजनीति में निर्णय लेने वाली शक्ति है राजनाथ सिंह का बयान यह संदेश पूरी दुनिया में भेजता है कि—भारत अपनी सुरक्षा नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है
भारत किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगाऔर भारत को अब समझौते कराने के लिए किसी तीसरे देश की आवश्यकता नहीं आज का भारत कह रहा है—“हम पर कोई दबाव नहीं डाल सकता।हम वही करेंगे जो भारत के हित में होगा…और सही समय पर करेंगे।
