बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 5 दिसंबर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शिखर वार्ता ने भारत–रूस संबंधों के इतिहास में एक और निर्णायक मोड़ जोड़ दिया है। दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान जारी करते हुए न केवल द्विपक्षीय मित्रता की अमिट विरासत को रेखांकित किया, बल्कि भविष्य की दिशा और वैश्विक संकटों के प्रति साझा रणनीति को भी स्पष्ट किया।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत–रूस संबंधों को ‘ध्रुव तारे’ की तरह स्थिर, विश्वसनीय और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि पिछले आठ दशकों के भू-राजनीतिक तूफानों—शीत युद्ध, वैश्विक मंदी, आतंकवाद, महामारी और यूक्रेन संकट—के बावजूद इन संबंधों की चमक कभी फीकी नहीं पड़ी।उनके शब्दों में:“परस्पर सम्मान और गहरे विश्वास पर आधारित भारत–रूस संबंध समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं।
आतंकवाद पर सख्त संदेश — “मानवता पर प्रहार”प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त बयान में कहा कि आतंकवाद किसी देश या सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता के मूल्यों पर सीधा हमला है। उन्होंने रूस के साथ मिलकर “आतंकवाद के नेटवर्क, फंडिंग और विचारधाराओं” पर प्रहार करने का संकल्प दोहराया।वहीं राष्ट्रपति पुतिन ने भी स्पष्ट कहा कि रूस, भारत की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करता है और दोनों देश मिलकर आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ मोर्चा जारी रखेंगे।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य — विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
भू–राजनीतिक विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अशोक चतुर्वेदी का मानना है कि भारत–रूस की साझेदारी इस समय विश्व राजनीति के ध्रुवों में बदलाव का संकेत है। पश्चिमी देशों के दबावों के बावजूद रूस का भारत को ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति जारी रखने की घोषणा बेहद रणनीतिक है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति विशेषज्ञ पूर्व राजदूत विवेक कठजू कहते हैं:यह वार्ता उस समय हुई है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत–रूस संबंधों की मजबूती बताती है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को और सुदृढ़ कर रहा है।”
ऊर्जा एवं व्यापार—रूस का बड़ा आश्वासन राष्ट्रपति पुतिन ने जोर देकर कहा:“रूस बिना किसी दबाव के भारत को फ्यूल सप्लाई करता रहेगा।”यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध जारी हैं और भारत के लिए किफायती ऊर्जा सप्लाई एक निर्णायक आर्थिक कारक है।साथ ही पुतिन ने यह भी कहा कि दोनों देश 100 अरब डॉलर वार्षिक व्यापार का लक्ष्य प्राप्त करने पर विचार कर रहे हैं।
आर्थिक साझेदारी—2030 का रोडमैप भारत और रूस 2030 तक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसमें शामिल है—
यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रक्रिया तेज़ करना
द्विपक्षीय भुगतान में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग
छोटे मॉड्यूलर और ‘फ्लोटिंग’ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में सहयोग
क्रिटिकल मिनरल्स में रणनीतिक साझेदारी
फार्मा, आईटी, रक्षा और एग्री–टेक में संयुक्त निवेशकूटनीति विशेषज्ञों के अनुसार, यह नई दिशा भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करेगी।
प्रमुख समझौते — लोगों और व्यापार के लिए नए दरवाजेवार्ता के बाद जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, उनमें शामिल हैं—
प्रवासन और आसान आवाजाही समझौताभारत–रूस के बीच नौकरी, स्टार्टअप, पढ़ाई और व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाने वाला बड़ा कदम।
स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा में सहयोग दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखला संकटों को देखते हुए यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बंदरगाह और पोत परिवहन सहयोग सी–रूट्स को मजबूत करने से भारत–रूस व्यापार और तेज़, सुरक्षित और लागत–प्रभावी होगा।
नई सदी की साझेदारी — ध्रुव तारे के बाद का क्षितिज विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता केवल द्विपक्षीय संबंधों का औपचारिक चरण नहीं,
बल्कि 21वीं सदी की नई भू–राजनीतिक संरचना के निर्माण में भारत–रूस की भूमिका का संकेत भी है।भारत और रूस आने वाले वर्षों में—
ऊर्जा सुरक्षा,
न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी,
डिजिटल कनेक्टिविटी,
डिफेंस को–प्रोडक्शन,
मल्टी–पोलर वर्ल्ड ऑर्डर में महत्वपूर्ण साझेदार की भूमिका निभाने वाले हैं।
विशेष टिप्पणी
भारत–रूस संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का ‘ध्रुव तारा’ रूपक केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि उस भारतीय रणनीतिक दृष्टि का प्रतीक है जो विश्वास की परंपरा और भविष्य की संभावनाओं—दोनों पर एक साथ खड़ी है।
