मध्य-पूर्व युद्ध: ट्रंप के दावे, ईरान का नरम रुख और रूस पर उठे सवाल “ ईरान की सेना लगभग खत्म”, अगर रूस मदद कर रहा है तो गलत कर रहा है”—अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा बयान

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/ वाशिंगटन, 8 मार्च

मध्य-पूर्व में जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच Donald Trump ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है।उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान के 44 नौसैनिक जहाज, वायुसेना के लगभग सभी विमान और बड़ी संख्या में मिसाइल सिस्टम नष्ट कर दिए गए हैं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में युद्ध की स्थिति ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक समीकरणों को अस्थिर कर दिया है।

ट्रंप का बड़ा दावा: “ईरान की सेना लगभग अस्तित्वहीन”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी और सहयोगी बलों के हमलों ने ईरान की सैन्य ताकत को गहरा झटका दिया है।उनके शब्दों में:“हमने उनके 44 नौसैनिक जहाज नष्ट कर दिए, उनकी वायुसेना के सभी विमानों को खत्म कर दिया और उनकी ज्यादातर मिसाइल क्षमता को भी नष्ट कर दिया है। अब वे ज्यादा मिसाइलें दाग नहीं पा रहे हैं।”ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास अभी भी ईरान की सैन्य संरचना पर और बड़े हमले करने का विकल्प खुला है, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है।

रूस की भूमिका पर ट्रंप का तंज

युद्ध के बीच एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या Russia ईरान की मदद कर रहा है।

इस सवाल पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें ऐसे कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। लेकिन उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा:“अगर रूस उनकी मदद कर रहा है, तो वह बहुत बुरा काम कर रहा है, क्योंकि इस समय ईरान की स्थिति बिल्कुल अच्छी नहीं है।”विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान मॉस्को को कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश भी हो सकता है।

तेल बाजार पर ट्रंप का संकेत

युद्ध के बीच तेल की कीमतों को लेकर भी वैश्विक चिंता बढ़ गई है।इस मुद्दे पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास तेल की कोई कमी नहीं है।उनके अनुसार:“हमारे देश में तेल की अपार मात्रा है। जमीन के नीचे और समुद्र में भी विशाल भंडार मौजूद है।”ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान वैश्विक बाजार को यह संकेत देने के लिए है कि अगर मध्य-पूर्व में आपूर्ति बाधित होती है तो अमेरिका उत्पादन बढ़ा सकता है।

ट्रूथ सोशल पर ट्रंप का विवादित पोस्ट

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक और तीखा संदेश साझा किया।इसमें उन्होंने दावा किया कि ईरान मध्य-पूर्व के देशों से माफी मांग चुका है और आत्मसमर्पण की स्थिति में पहुंच गया है।ट्रंप ने लिखा कि:ईरान अब “मिडिल-ईस्ट का दादा” नहीं रहा वहीं अब “मध्य-पूर्व का पराजित देश” बन चुका हैअमेरिका और Israel के लगातार हमलों ने उसे झुकने पर मजबूर किया ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ और बड़े हमलों पर विचार किया जा रहा है।

ईरान का नरम संकेत

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।उन्होंने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा कि:ईरान पड़ोसी देशों पर मिसाइल हमले नहीं करेगा जब तक उनके क्षेत्र से ईरान पर हमला नहीं होता, तब तक वह आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा यह बयान संकेत देता है कि तेहरान क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का कहना है कि ट्रंप के बयान सैन्य वास्तविकता से अधिक राजनीतिक संदेश भी हो सकते हैं।एक वैश्विक राजनीति विशेषज्ञ के अनुसार:“युद्ध के समय नेताओं के बयान अक्सर मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा होते हैं। इससे विरोधी देश की मनोबल पर असर डालने की कोशिश की जाती है।”विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का दावा ईरान की सैन्य शक्ति को कमजोर दिखाने और अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत दर्शाने की रणनीति हो सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का आकलन

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म होना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है।ईरान के पास अभी भी:क्षेत्रीय मिलिशिया नेटवर्क बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम ड्रोन तकनीक भूमिगत सैन्य ठिकाने जैसी रणनीतिक क्षमताएं मौजूद हैं।एक रक्षा विश्लेषक के मुताबिक:“ईरान पारंपरिक युद्ध में कमजोर पड़ सकता है, लेकिन असममित युद्ध और प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सकता है।”

अंतरराष्ट्रीय कानून का पहलू

अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध में नागरिक आबादी या बड़े क्षेत्रों को निशाना बनाने की धमकी दी जाती है तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के दायरे में गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।United Nations के युद्ध संबंधी सिद्धांतों के अनुसार सैन्य कार्रवाई में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

विदेश मंत्रालयों की प्रतिक्रिया

कई देशों के विदेश मंत्रालयों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है।कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार:यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है खाड़ी देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया है वैश्विक शक्तियां युद्ध के विस्तार को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की बात कर रही हैं

निष्कर्ष

मध्य-पूर्व में जारी यह संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा राजनीति और कूटनीतिक दबाव का जटिल खेल बन चुका है।एक ओर ट्रंप के तीखे बयान और सैन्य दावे हैं, तो दूसरी ओर ईरान की ओर से तनाव कम करने के संकेत भी सामने आ रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह संघर्ष कूटनीति के रास्ते शांत होगा, या फिर क्षेत्र एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है।

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