बी के झा
NSK

पटना, 31 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का प्रचार अपने चरम पर है, लेकिन इस बार राजनीति नहीं, मौसम ने सबकी परीक्षा ले ली है।‘मोंथा तूफान’ से जुड़ी लगातार बारिश ने चुनाव प्रचार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जिन हेलीपैडों से एनडीए और महागठबंधन के स्टार प्रचारकों को उड़ान भरनी थी, वहां पानी और कीचड़ की परतें बिछ गईं।नतीजा — 16 में से 14 हेलीकॉप्टर हैंगर में ही खड़े रहे, और नेताओं को अपनी रैलियां रद्द करनी पड़ीं।
“हेलीपैड गीला, जनता का जोश भीगा नहीं”शुक्रवार को पूरे बिहार में रुक-रुक कर हुई बारिश ने नेताओं के उड़ान कार्यक्रम ध्वस्त कर दिए।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी — सभी अपने-अपने हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाए।फ्लाइट टेकऑफ के लिए पटना एयरपोर्ट तैयार था, लेकिन जिलों में बने अस्थायी हेलीपैड कीचड़ में बदल गए।ऐसे में कई नेताओं को मजबूरी में सड़क मार्ग से निकलना पड़ा, जहां बरसात और जाम ने उनके काफिले की गति को रेंगने पर मजबूर कर दिया।
मनोज तिवारी-तेज प्रताप ही भर सके उड़ानराजनीतिक तूफान और मौसम की मार के बीच सिर्फ दो हेलीकॉप्टर हवा में उड़ान भर पाए —एक भाजपा नेता मनोज तिवारी का, जिन्होंने खगड़िया और सिमरी बख्तियारपुर में सभाएं कीं,और दूसरा तेज प्रताप यादव का, जो सिमरी बख्तियारपुर पहुंचे।बाकी नेताओं के हेलीकॉप्टरों ने पटना एयरपोर्ट से उड़ान भरने की कोशिश भी नहीं की।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और दिल्ली से आई रेखा गुप्ता को भी मौसम ने बेबस कर दिया।मरांडी की उड़ान स्थगित रही जबकि रेखा गुप्ता को बीच सभा से ही पटना लौटना पड़ा।
“नेताओं के जोश पर पानी नहीं, मौसम की साजिश”मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को पटना की दृश्यता मात्र 2000 मीटर थी और हवा की रफ्तार 4.8 किमी प्रति घंटा।तकनीकी रूप से उड़ान भरना संभव था, लेकिन हेलीपैडों की खराब स्थिति और विज़ुअल अप्रोच की कमी के कारण लैंडिंग असंभव रही।एयरपोर्ट अधिकारियों ने साफ कहा —उड़ान सुरक्षित थी, लेकिन उतरना जोखिम भरा था। राजनीतिक कार्यक्रमों में जनता की भीड़ और खुले मैदान को देखते हुए अनुमति नहीं दी जा सकती थी।”
प्रचार थमा, चुनावी रणनीति पर असरपहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का 11 नवंबर को होना है।पहले चरण के प्रचार का आखिरी दिन 4 नवंबर, और दूसरे का 9 नवंबर तय है।
लेकिन बारिश और हवा की मार ने राजनीतिक दलों के टॉप लीडरों के रोडमैप को अस्त-व्यस्त कर दिया।जहां भाजपा और जदयू की कई सभाएं रद्द हुईं, वहीं महागठबंधन के तेजस्वी और मीसा भारती को भी सोशल मीडिया प्रचार पर शिफ्ट होना पड़ा।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अमरेश मिश्रा कहते हैं —बिहार का मौसम और राजनीति दोनों अप्रत्याशित हैं। लेकिन इस बार मौसम ने राजनीति को पछाड़ दिया है। जिन जिलों में बारिश ने जनसभाओं को रद्द करवाया, वहां अब जनसंपर्क की रणनीति बदलनी होगी।
मतदाताओं की राय — “
अब जनता नहीं रुकेगी”हालांकि, मैदानों में भले ही पानी भरा हो, लेकिन जनता का उत्साह बरकरार है।दरभंगा से आए एक किसान मतदाता बोले —नेता लोग हेलीकॉप्टर से उड़ नहीं पा रहे, लेकिन हम वोट देने जाएंगे। ये मोंथा हमारा मन नहीं रोक सकता।”
पटना विश्वविद्यालय के छात्रों ने कहा चुनाव में अब हेलीकॉप्टर नहीं, मोबाइल फोन प्रचार का हथियार बन चुका है। जो जनता के दिल तक पहुंचेगा, वही जीत का आसमान छूएगा।
निष्कर्ष:
जब मौसम बना ‘किंगमेकर’बिहार के राजनीतिक आसमान पर जहां वादों की बरसात हो रही है, वहीं ‘मोंथा तूफान’ ने नेताओं के उड़ान भरने की ताकत छीन ली है।कह सकते हैं कि इस बार बिहार के चुनाव में सिर्फ जनता नहीं, मौसम भी “किंगमेकर” बन गया है।
