रोहिणी के आरोपों के बाद तेजस्वी के करीबी रमीज खान पर यूपी में कसा शिकंजा, क्रिमिनल हिस्ट्री खंगालने में जुटी एजेंसियाँ

बी के झा

NSK

लखनऊ/पटना, 18 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव-2025 में राजद की करारी हार के बाद जहाँ लालू परिवार में घमासान मचा है, वहीं इसी राजनीतिक तूफ़ान के बीच तेजस्वी यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले रमीज खान एकदम से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। लालू यादव को किडनी दान करने वाली बेटी रोहिणी आचार्य ने जब रमीज पर गंभीर आरोप लगाए, तो मामला बिहार से निकलकर यूपी तक पहुँच गया और अब यूपी पुलिस भी रमीज का पूरा “चार्जशीटनुमा इतिहास” खंगाल रही है।

रविवार देर रात डीजीपी कार्यालय ने कौशाम्बी पुलिस से रमीज खान की विस्तृत रिपोर्ट तलब की, जिसके बाद जिले का पुलिस अमला अचानक सक्रिय हो उठा और रमीज से जुड़े पुराने केसों की धूल झाड़ी जाने लगी।

कौन हैं रमीज खान, जिन पर अचानक बढ़ी नजर?

रमीज खान, पूर्व सांसद रिजवान जहीर के दामाद और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बेहद करीबी बताए जाते हैं। अब तक वे सियासी लाइमलाइट से दूर थे, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद रोहिणी आचार्य के बयान ने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया।

रोहिणी ने आरोप लगाया था कि—“राजद के पतन के पीछे पर्दे के पीछे कुछ ऐसे लोग हैं जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते रहे…

जिनमें रमीज भी शामिल है।”उनके इस बयान ने आग में घी का काम किया। इसके बाद यूपी पुलिस ने भी रमीज की गतिविधियों पर पैनी नजर डालनी शुरू कर दी।कोखराज थाने की फाइलें खुलीं: हत्या से लेकर फरारी तक का रिकॉर्ड

रमीज खान के खिलाफ कौशाम्बी जिले के कोखराज थाने में दो गंभीर केस दर्ज हैं। पहला और सबसे बड़ा मामला हत्या का है।हत्या का मामला –

25 लाख का सौदा और मौत‌ थाना रिकॉर्ड के मुताबिक, रमीज खान पर आरोप है कि उन्होंने प्रतापगढ़ के प्रॉपर्टी डीलर शकील की हत्या की,25 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ, हत्या के बाद शव को रोही बाईपास के किनारे फेंक दिया गया,फरार रहने के दौरान उन पर एक और केस दर्ज हुआ,वर्ष 2023 में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा।

बिहार चुनाव के दौरान भी रहा विवादों में

सूत्रों का दावा है कि रमीज खान ने बिहार चुनाव के दौरान—सनातन धर्म के खिलाफ हेट कैंपेन चलाने की रणनीति बनाई,

इसके लिए पश्चिमी यूपी के युवाओं की एक टोली को बिहार ले गया,कई राजनेताओं पर अभद्र टिप्पणी की,सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की।

इन गतिविधियों को लेकर चुनाव बाद रमीज का नाम एक “डिजिटल खलनायक” के तौर पर उछलने लगा।

रोहिणी आचार्य के आरोप से बढ़ा तूफ़ान

राजद की हार के बाद रोहिणी आचार्य के एक ट्वीट ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी। उनके शब्दों ने रमीज के खिलाफ सियासी और पुलिसिया दोनों मोर्चों पर कार्रवाई के द्वार खोल दिए।

रोहिणी के आरोप:पार्टी की छवि खराब करने का आरोप

चुनावी रणनीति में गलत भूमिका सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सामग्री का प्रसार तेजस्वी के नज़दीकी बने रहकर “गलत प्रभाव” डालने का आरोप इस बयान के बाद यूपी में अचानक रमीज की पुरानी फाइलें खंगालने की प्रक्रिया तेज हो गई।

डीजीपी कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट, पुलिस हुई सक्रिय कौशाम्बी पुलिस अधिकारी तुरंत एक्टिव मोड में आए। एएसपी राजेश कुमार ने पुष्टि की:रमीज खान के खिलाफ दर्ज केसों की रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेज दी गई है। हत्या समेत दो गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।

बिहार चुनाव में सनातन धर्म के खिलाफ हेट कैंपेन चलाने का भी आरोप है।

”राजनीति और अपराध का संगम – आगे क्या?बिहार की राजनीति में जिस तरह रमीज का नाम उभरा है और यूपी पुलिस की जो सक्रियता दिख रही है, उससे साफ संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में—

रमीज की भूमिकाओं की गहन जांच हो सकती है,पुराने केसों में नये खुलासे संभव हैं

,बिहार-यूपी की एजेंसियाँ मिलकर कार्रवाई तेज कर सकती हैं।

रमीज खान, जिन्हें कभी सिर्फ “तेजस्वी के करीबी” के रूप में जाना जाता था, अब दो राज्यों की पुलिस और राजनीति के चक्रव्यूह में फँसते दिखाई देने लगे हैं।

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