बी के झा
NSK

नई दिल्ली , 23 नवंबर
लाल किले के पास हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राष्ट्र की सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक गहरा और भयावह कट्टरपंथी नेटवर्क उजागर हो रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की पूछताछ में सामने आया है कि गिरफ्तार मौलवी मुफ्ती इरफान अहमद वागे सिर्फ एक आरोपी नहीं, बल्कि कश्मीर में कट्टरपंथ की एक सक्रिय फैक्ट्री चला रहा था।एनआईए के अनुसार, इरफान ने पिछले चार–पांच साल में 300 से अधिक कश्मीरियों के दिमाग में अतिवाद का जहर भरा, जिन्हें धीरे-धीरे डॉक्टर, छात्र, और यहां तक कि ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के रूप में आतंक की राह पर धकेला गया।
विदेशी कड़ियों का जाल: तुर्किए, पाकिस्तान से लेकर ब्रिटेन-कनाडा तक की गूंजजांच में जो प्रारंभिक तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं।अधिकारियों के अनुसार:तुर्किए पाकिस्तान ब्रिटेन कनाडा जैसे देशों से कुछ संदिग्धों का सीधा या अप्रत्यक्ष संपर्क मिला है।
एनआईए अब इन देशों की एजेंसियों से औपचारिक रूप से संपर्क कर रहा है ताकि विदेशी धन, ऑनलाइन कट्टरपंथ और मिशनरी मॉड्यूल के कनेक्शन की परतें खोली जा सकें।सूत्र बताते हैं कि कट्टरपंथ का यह तंत्र किसी एक देश से नहीं, बल्कि बहुस्तरीय वैश्विक नेटवर्क से संचालित हो रहा था — जिसकी जड़ें अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक जाती दिखाई दे रही हैं।
श्रीनगर से दिल्ली लाई गई टीम में डॉक्टर भी शामिल — क्या ‘स्किल्ड टेरर’ का मॉडल?
एनआईए ने श्रीनगर से जिन चार आरोपियों को दिल्ली लाया है, उनमें से तीन डॉक्टर हैं और एक मौलवी।गिरफ्तार आरोपी:डॉ. मुजम्मिल शकील गनी (पुलवामा)डॉ. आदिल अहमद राठेर (अनंतनाग)डॉ. शाहीन सईद (लखनऊ)मौलवी मुफ़्ती इरफान अहमद वागे (शोपियां)अब तक की जांच में डॉ. मुजम्मिल और मौलवी इरफान के तार सीधे विदेशी संपर्कों से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।विशेषज्ञ बताते हैं कि कुशल पेशेवरों को आतंक की गतिविधियों में शामिल करना आतंकी संगठनों की नई रणनीति है ताकि तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग किया जा सके।
300+ युवाओं का ब्रेनवॉश — इरफान का स्वीकारोक्ति भरा बयान पूछताछ में इरफान ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए:उसने 4–5 साल में 300 से अधिक कश्मीरियों को कट्टरपंथ की राह दिखाई कुछ युवाओं को ओजी डब्ल्यू बनाया डॉक्टरों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित कियाअनंतनाग की एक ईदगाह से personally पिस्टल उठाकर ‘आरिफ’ नामक युवक को दियाअक्टूबर 2023 में दो डॉक्टर — आदिल और ‘फिदायीन उमर’ — AK-47 लेकर उसी के पास एक मस्जिद पहुंचे
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक पूरी तरह योजनाबद्ध कट्टरपंथी नेटवर्क था, जिसमें धर्म, शिक्षा और तकनीक — तीनों का दुरुपयोग किया जा रहा था।
अदालत की अनुमति: जसीर बिलाल को वकील से मिलने की इजाज़त लाल किला धमाका मामले में गिरफ्तार आरोपी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को विशेष एनआईए अदालत ने एक महत्वपूर्ण राहत दी है।अदालत ने आदेश दिया है कि:जसीर अपने वकील से हर दूसरे दिनशाम 5 से 6 बजे एनआईए मुख्यालय में मुलाकात कर सकता है।जसीर पर आरोप है कि:उसने तकनीकी सपोर्ट दिया मॉडिफाइड ड्रोन मुहैया कराए और एक रॉकेट बनाने की योजना पर भी काम कर रहा था एनआईए उसे 17 नवंबर को श्रीनगर से गिरफ्तार करके लाई थी।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा सवाल: क्या यह ‘हाइब्रिड टेरर’ का नया चेहरा?
विश्लेषकों का मानना है कि यह केस सिर्फ एक धमाके की जांच नहीं, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा पर मंडरा रहे नए, अधिक खतरनाक खतरे का संकेत है।मुख्य खतरे:धार्मिक संस्थानों में कट्टरपंथी मॉड्यूल डॉक्टर और पढ़े-लिखे युवाओं का आतंक में इस्तेमाल विदेशी फंडिंग और ऑनलाइन ब्रेनवॉश नेटवर्क ड्रोन और टेक्नोलॉजी आधारित हमलों की तैयारी
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेटवर्क साइलेंट, डीप और हाई-टेक है—और इसे तोड़ना आसान नहीं होगा।अंत में : लाल किला धमाका केस अब देश की सुरक्षा का आइना बन चुका है एनआईए की जांच के हर नए कदम में ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जो बताते हैं कि आतंकवाद अब पारंपरिक नहीं रहा।कट्टरपंथ, टेक्नोलॉजी, ग्लोबल नेटवर्क और स्थानीय सहयोग—इन चारों का मिश्रण देश के लिए नई चुनौती बन रहा है।आने वाले दिनों में एनआईए किस कड़ी को किससे जोड़ती है, यह देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए निर्णायक साबित होगा।
