बी के झा
नई दिल्ली, 11 नवंबर
देश की राजधानी एक बार फिर बड़े आतंकी हमले की साजिश का केंद्र बनने से बच गई। लाल किले के नज़दीक सोमवार शाम हुए धमाके की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का स्पष्ट कहना है कि यह घटना किसी “बड़ी साजिश का ट्रायल रन” या “पैनिक एक्टिवेशन” हो सकती है।
डॉक्टर मॉड्यूल पर दबाव बढ़ा, साजिशकर्ता घबरा गयासूत्र बताते हैं कि इस पूरे मॉड्यूल का मास्टरमाइंड माने जा रहे डॉ. उमर मोहम्मद को यह जानकारी मिल चुकी थी कि उसके कई साथी — जिसे जांच एजेंसियां “डॉक्टर चौकड़ी” के नाम से जोड़कर देख रही थीं — पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।
उसकी लोकेशन लगातार ट्रैक हो रही थी और उस पर तेजी से गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा था।जांच एजेंसियों का मानना है कि घबराहट में वह अपने पास मौजूद अधूरी IED को या तो कहीं और पहुंचाने या रास्ते में नष्ट करने की कोशिश कर रहा था।इसी जल्दबाज़ी में चलते वाहन में अचानक ब्लास्ट हुआ, जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई।
धमाका छोटा, साजिश बेहद बड़ी — ब्लास्ट साइट पर चौंकाने वाले सुरागजांच अधिकारियों के अनुसार, धमाके से सड़क पर कोई बड़ा गड्ढा नहीं बना, न ही कोई भारी प्रोजेक्टाइल बरामद हुआ।इससे संकेत मिलता है कि IED पूरी तरह तैयार नहीं थी, लेकिन उसमें प्रयुक्त सामग्री बेहद घातक हो सकती थी।
FSL को दो जिंदा कारतूस मिले फॉरेंसिक टीम को मौके से जो सामग्री मिली, उसने साजिश की गंभीरता को और बढ़ा दिया:दो जिंदा कारतूस दो तरह के विस्फोटक के सैंपल पहला सैंपल — संभावित अमोनियम नाइट्रेटदूसरा सैंपल — अमोनियम नाइट्रेट से भी ज्यादा घातक, जिसकी वैज्ञानिक जांच जारी जांच कर्ताओं का कहना है कि यदि यह डिवाइस पूरी तरह सक्रिय होती और मॉड्यूल अपनी योजना के अनुसार इसे किसी घनी भीड़ वाले इलाके में ले जाता, तो नुकसान का पैमाना बेहद भयावह हो सकता था।
फरीदाबाद से मिला लिंक—सख्त निगरानी से फूटी पूरी साजिशइंटेलिजेंस एजेंसियों के अनुसार, पूरे देश में चल रहे उच्च स्तरीय सतर्कता ऑपरेशन और फरीदाबाद में हालिया कार्रवाई ने इस मॉड्यूल को दबाव में ला दिया था।सख्त निगरानी के कारण ही यह हमला अपने इरादों के अनुसार बड़े पैमाने पर तबाही नहीं मचा सका।
जम्मू-कश्मीर से बड़ी गिरफ्तारी: मॉड्यूल का अहम किरदार इरफान अहमद पकड़ा गया धमाका केस के समानांतर जाँच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है।जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां निवासी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया है, जो श्रीनगर की एक मस्जिद में इमाम बताया जाता है।
इरफान पर आरोप:रेडिकलाइज़ेशन में भूमिकाटेरर फंडिंग/सपोर्ट का शक फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से कनेक्शन गिरफ्तारी के दौरान:उसके पास से 5 मोबाइल फोन बरामदउसकी पत्नी को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया हैजांच एजेंसियों की मानें तो इरफान अहमद इस मॉड्यूल का विचारधारा फैलाने वाला सेगमेंट था, जबकि तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट डॉक्टर मॉड्यूल के जिम्मे था।
क्या था असली प्लान? एजेंसियां जोड़ रही कड़ियांपुख्ता सुरागों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा के आधार पर जांचकर्ताओं को शक है कि
:यह टेस्ट ब्लास्ट हो सकता है
या पकड़े जाने के डर से स्वयं को बचाने के लिए IED को नष्ट करने की कोशिश
या फिर आगामी किसी बड़े कार्यक्रम को निशाना बनाने की योजना थीअधिकारियों का कहना है कि मॉड्यूल पूरी तरह एक्सपोज़ होने के कगार पर था, इसलिए मुख्य आरोपी ने जल्दबाजी में गलत कदम उठाया।
सतर्कता ने टाली बड़ी तबाही — दिल्ली बच गई धमाके की लो-इंटेंसिटी के बावजूद एजेंसियां इसे बेहद गंभीर मामला मान रही हैं।यदि यह IED किसी अन्य स्थान पर या भीड़भाड़ के वक्त सक्रिय होती, तो परिणाम बेहद भयावह होते।एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने कहा:यह छोटे पैमाने पर हुआ बड़ा हादसा नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर होने वाले हमले का छोटा सा पर्दाफाश है। समय रहते सतर्कता ने बड़ी चोट टाल दी।”
अगला चरण: मॉड्यूल के बाकी सदस्यों की तलाश एजेंसियों ने कई टीमों को उत्तर भारत में अलग-अलग दिशाओं में भेजा है।डिजिटल फुटप्रिंट, कॉल रिकॉर्ड, IP लोकेशन और संदिग्ध लेन-देन की जांच तेज कर दी गई है।अधिकारियों का दावा है कि—मॉड्यूल का पूरा नेटवर्क जल्द उजागर कर लिया जाएगा।
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