बी के झा
NSK

पटना, 1 दिसंबर
बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार को औपचारिक गरिमा के बीच शुरू हुआ। प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने नए चुने गए सभी 243 विधायकों को शपथ दिलाई। पहले ही दिन सदन में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल में भी लोकतांत्रिक शिष्टाचार की नई मिसाल पेश कर दी।तेजस्वी अपनी सीट से उठे, गले लगाकर दी शुभकामनाएँ
शपथ ग्रहण के दौरान तब सदन का वातावरण अचानक बदल गया जब कृषि मंत्री राम कृपाल यादव आगे बढ़े। समर्थक और शुभचिंतक उन्हें बधाई दे रहे थे, तभी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपनी सीट से उठे और सीधे उनके पास पहुँचे। कुछ ही पल बाद दोनों नेता गले मिलते नज़र आए—एक ऐसा दृश्य, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।सियासी महागठबंधन और सत्तापक्ष के बीच हाल के दिनों में बढ़ी तल्खियों के बीच यह मिलन सभी को चौंका गया। सदन में मौजूद विधायक भी एक-दूसरे से फुसफुसाते नज़र आए। कैमरे तेजी से इस क्षण को कैद करने लगे। विधानसभा के पहले ही दिन यह तस्वीर दिनभर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।
पुराने रिश्तों की झलक, नई राजनीति का संकेत?
रामकृपाल यादव और राजद का रिश्ता कभी बेहद करीबी रहा है। लालू प्रसाद यादव के “हनुमान” कहे जाने वाले रामकृपाल राजद के रणनीतिक घेरे का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। माना जाता था कि उनकी बात पार्टी सुप्रीमो टालते नहीं थे।लेकिन 2014–2019 के बीच राजनीति ने करवट ली—पाटलीपुत्र सीट पर टिकट विवाद राजद से नाराज़गी बीजेपी में प्रवेशऔर फिर उसी सीट पर मीसा भारती को हराकर बड़ा उलटफेर हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में मीसा भारती ने बदला ले लिया और रामकृपाल को पराजित किया। उसके बाद बीजेपी ने उन्हें दानापुर से विधानसभा चुनाव लड़ाया, जहाँ उन्होंने राजद प्रत्याशी रीतलाल यादव को मात दी।
तेजस्वी का यह स्नेहपूर्ण gesture केवल व्यक्तिगत संबंधों की झलक ही नहीं, बल्कि संदेश भी देता है कि राजनीति में दरवाज़े कभी पूरी तरह बंद नहीं होते।सियासी टकराव के बीच ‘सौहार्द’ की मिसाल सत्र शुरू होने के पहले दिन जहां बाहर राजनीतिक बयानबाज़ी चरम पर रही, वहीं सदन के भीतर का माहौल बिल्कुल उलटा दिखा।
तेजस्वी और रामकृपाल का यह मिलन सियासी उथल–पुथल के बीच शालीनता, परिपक्वता और लोकतांत्रिक संरचनाओं के सम्मान की ओर संकेत करता है।विधानसभा के इतिहास में यह क्षण दर्ज हो गया कि—“राजनीति में विचारधारा बदलती है, लेकिन रिश्तों की गर्माहट कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होती।”
सत्र की शुरुआत, राजनीतिक संकेत स्पष्ट 18वीं विधानसभा का यह पहला दिन न सिर्फ औपचारिक रहा, बल्कि उसने यह भी इशारा दिया कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आने वाले दिनों में मुकाबला होगा,लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर संवाद की खिड़कियाँ अभी भी खुली हैं।
तेजस्वी–रामकृपाल का यह गर्मजोशी भरा मिलन शायद आगामी सदन के राजनीतिक वातावरण को थोड़ा सहज बनाने में भूमिका निभा सकता है।
