बी के झा
NSK

मोतिहारी/मधुबनी, 25 जनवरी
बिहार में अपराध का दुस्साहस अब इस हद तक पहुंच चुका है कि न तो वर्दी सुरक्षित है, न ही कलम। सरस्वती पूजा जैसे पवित्र अवसर पर मोतिहारी में एक पुलिसकर्मी की पत्नी से छेड़छाड़ और उसके बाद जानलेवा हमला, वहीं झंझारपुर में एक वरिष्ठ पत्रकार के घर दिनदहाड़े दबंगों की घुसपैठ—ये दोनों घटनाएं राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
पूजा पंडाल से घर तक अपराधियों का तांडव
मोतिहारी जिले के छतौनी थाना क्षेत्र के छोटा बरियारपुर मोहल्ला में शुक्रवार को एक सिपाही की पत्नी सरस्वती पूजा पंडाल में दर्शन के लिए गई थीं। आरोप है कि वहां मौजूद बदमाशों ने उनके साथ बदसलूकी की। जब उन्होंने विरोध किया तो आरोपियों ने उनके पति—जो स्वयं पुलिसकर्मी हैं—के साथ मारपीट शुरू कर दी।किसी तरह दोनों जान बचाकर अपने किराए के घर पहुंचे, लेकिन अपराधियों का दुस्साहस यहीं नहीं थमा।देर रात आरोपित बदमाश फिर पहुंचे—दरवाजा खुलते ही घर में घुसपैठअलमीरा से 50 हजार रुपये नकद लूट सिपाही को छत से फेंकने का प्रयास मोबाइल छीनकर जान से मारने की धमकी घटना के बाद पीड़िता ने छतौनी थाने में प्राथमिकी के लिए आवेदन दिया है।
थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार के अनुसार, मामले की जांच जारी है और एफआईआर दर्ज की जा रही है।
झंझारपुर में पत्रकार का घर निशाने पर
इसी बीच मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडल के रुद्रपुर थाना क्षेत्र से भी कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक वरिष्ठ पत्रकार के घर दिनदहाड़े चार-पांच महिलाएं और दो-तीन पुरुष जबरन घुस आए, परिजनों के साथ अभद्रता की। पत्रकार के अनुसार,5 जनवरी को भी शाम के समय 6–7 बदमाश शराब के नशे में धुत होकर घर में घुसे थे यानी यह कोई पहली घटना नहीं, बल्कि लगातार हो रही गुंडागर्दी का सिलसिला है।
कानूनविदों की राय: यह सिर्फ अपराध नहीं, सिस्टम फेल्योर
वरिष्ठ कानूनविद एडवोकेट एस.एन. मिश्र कहते हैं—“जब पुलिसकर्मी और पत्रकार—जो लोकतंत्र के दो स्तंभ हैं—खुद असुरक्षित हों, तो यह केवल अपराध नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की विफलता है। ऐसे मामलों में त्वरित गिरफ्तारी और फास्ट-ट्रैक कार्रवाई अनिवार्य है।
”शिक्षाविदों की चेतावनी:
सामाजिक अनुशासन टूट रहा समाजशास्त्री डॉ. रीना चौधरी मानती हैं—“पूजा पंडाल, घर और दिनदहाड़े हमले—यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन से कानून का भय खत्म हो चुका है। इसका सीधा असर महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ेगा।
”राजनीतिक विश्लेषण: ‘हंटर’ बयान बनाम ज़मीनी हक़ीक़त
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. आलोक वर्मा का कहना है—“नए गृहमंत्री का ‘हंटर’ बयान प्रतीकात्मक जरूर था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अपराध नियंत्रण के ठोस संकेत नहीं दिख रहे। अपराधियों का हौसला बढ़ा हुआ है, यही सबसे बड़ा खतरा है।
”विपक्ष का हमला: सरकार से जवाब मांग
विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।एक विपक्षी नेता ने कहा—“अगर पुलिस की पत्नी और पत्रकार का परिवार सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक की सुरक्षा केवल सरकारी विज्ञापनों में ही बची है।
”बिहार सरकार का पक्ष
सरकारी स्तर पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि—मामलों की जांच जारी है दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी हालांकि अब तक राजनीतिक नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निष्कर्ष:
सवाल हंटर का नहीं, हौसले का हैं-यह सवाल अब सिर्फ अपराध का नहीं रहा—
क्या अपराधियों का हौसला इतना बढ़ गया है कि वे वर्दी और कलम—दोनों को चुनौती देने लगे हैं?
और अगर हां, तो कानून का डर लौटाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
सरस्वती पूजा जैसे पर्व पर हुई यह घटनाएं चेतावनी हैं—
अगर अभी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सामाजिक और संस्थागत भरोसा और कमजोर होगा।
