बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ पुणे ( महाराष्ट्र ) 29 नवंबर
पुणे की एमपी–एमएलए विशेष अदालत में गुरुवार को राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में ऐसा नाटकीय मोड़ आया कि अदालत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मच गई।विनायक दामोदर सावरकर के “अपमान” से जुड़े इस केस में मुख्य सबूत के रूप में पेश सीडी जब अदालत में चलाई गई, तो वह पूरी तरह खाली निकली।यह वही सीडी थी जिसके आधार पर अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ संज्ञान लिया था और समन जारी किया था। अचानक सबूत का ही गायब हो जाना अब इस केस को एक नए विवाद की ओर ले गया है।
सीलबंद सीडी निकली खाली, अदालत में सनसनीगुरुवार की दोपहर जब मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे ने सीलबंद सीडी को अदालत में चलाने का आदेश दिया, तो हर कोई नतीजे का इंतज़ार कर रहा था।पर स्क्रीन पर कुछ भी नहीं चला।सीडी में एक भी डेटा मौजूद नहीं था।शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर के वकील संग्राम कोल्हटकर भी स्तब्ध रह गए। उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि—“यही सीडी पहले चलाई गई थी तभी प्रक्रिया चली। फिर अब खाली कैसे हो गई?”अब सवाल यह है—क्या पहले अदालत में कोई दूसरी सीडी चलाई गई थी?या रिकॉर्डिंग के बाद किसी ने छेड़छाड़ की?या शुरू से ही प्रक्रिया में गंभीर खामी थी?यह सब अभी जांच के दायरे में है।
यूट्यूब लिंक देखने का प्रस्ताव भी खारिजखाली सीडी देखकर कोल्हटकर ने तुरंत अदालत से अनुरोध किया कि राहुल गांधी का कथित लंदन वाला भाषण यूट्यूब पर चलाकर देखा जाए।लेकिन राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद पवार ने इसका कड़ा विरोध किया—“ऑनलाइन कंटेंट प्रमाणित सबूत नहीं होता।”मजिस्ट्रेट शिंदे ने भी यह तर्क मान लिया और धारा 65-ब (इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रमाणीकरण) का हवाला देते हुए लिंक देखने की अनुमति खारिज कर दी।
दो और सीडी चलाने की मांग भी फेलसत्यकी सावरकर ने दो अतिरिक्त सीडी चेक करने की मांग की, लेकिन अदालत ने साफ कहा—“रिकॉर्ड में ऐसी कोई सीडी है ही नहीं।”यह बात और पेचीदा हो गई कि जिस सीडी के नाम पर प्रक्रिया चली, वह मौजूद है लेकिन डेटा नहीं है… और जिन नई सीडी का दावा है, वे रिकॉर्ड में ही नहीं हैं।
न्यायिक जांच की मांग, सुनवाई स्थगित खाली सीडी के रहस्य को लेकर अब न्यायिक जांच की मांग उठ गई है।शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा—“ये तकनीकी गलती नहीं, गंभीर चूक है।”राहुल गांधी के पक्ष ने इसका विरोध किया।अंततः अदालत ने सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी।
राजनीतिक गलियारों में बवाल
कांग्रेस का बयानकांग्रेस प्रवक्ता ने कहा—“यह केस शुरू से ही राजनीतिक बदले का हथियार है। अब तो सबूत भी हवा हो गए।”
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाभाजपा ने इसे तकनीकी त्रुटि बताया और कहा—“राहुल गांधी ने सावरकर पर जो कहा है वह सार्वजनिक है। सरकार या भाजपा का इसमें कोई हाथ नहीं।”
शिवसेना (शिंदे गुट)“सावरकर महाराष्ट्र की शान हैं। राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।”
शिवसेना (उद्धव गुट)“अगर सबूत ही मान्य नहीं तो मामला राजनीतिक प्रतीक बनाने का प्रयास है।”
राजनीतिक विश्लेषकों की रायराजनीतिक टिप्पणीकार राघव देशमुख कहते हैं—“खाली सीडी इस केस का टर्निंग पॉइंट है। अगर मूल सबूत ही संदिग्ध हो गया तो पूरा मामला कमजोर पड़ सकता है।
”वरिष्ठ विश्लेषक संदीप चौबे का कहना है—“यह घटना जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है। कोर्ट से संज्ञान तक की प्रक्रिया किस आधार पर चली?
अब सबसे बड़ा सवाल“जो सीडी पहले चली थी, वह ये नहीं थी तो कौन सी थी?”“अगर यही थी, तो खाली कैसे हो गई?”
“क्या केस की पूरी नींव ही हिल गई है?
”यह मामला अब सिर्फ एक मानहानि केस नहीं रहा, बल्कि अदालत और सबूतों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न बन गया है।
