बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 10 नवंबर
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की एक महत्त्वपूर्ण सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ नहीं बल्कि CJI जस्टिस बी.आर. गवई अचानक सोशल मीडिया की ओर इशारा करते हुए बोले—“हां-हां, हमें पता है… हमारे खिलाफ क्या चल रहा है।”उनकी बात भरी अदालत में गूंज उठी।
CJI की यह टिप्पणी दरअसल उस मॉर्फ्ड वीडियो से जुड़ी थी, जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाया गया था। वीडियो में दावा किया गया था कि उनके कोर्ट रूम में किसी ने जूता फेंकने की कोशिश की। बाद में स्पष्ट हुआ कि वीडियो पूरी तरह फर्जी और छेड़छाड़ किया हुआ था।जस्टिस गवई ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे और अन्य जज “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकों के दुरुपयोग” से पूरी तरह वाकिफ हैं—और यह केवल न्यायपालिका नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।
एआई के अंधाधुंध उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
याचिका में कहा गया था कि अदालतों में तकनीक का तेजी से प्रवेश हो रहा है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहे हैं। याचिकाकर्ता वकील कार्तिकेय रावल ने तर्क दिया कि“न्यायिक प्रक्रियाओं में एआई टूल्स के उपयोग को लेकर स्पष्ट नीति और सुरक्षा मानक आवश्यक हैं।”उनकी बात पूरी होने से पहले ही CJI बोल पड़े—“
हमने वह वीडियो देखा है… वह भी मॉर्फ्ड था।”अदालत के भीतर मौजूद लोगों के लिए यह स्पष्ट था कि मुख्य न्यायाधीश तकनीक के दुरुपयोग से उपजे खतरे की ओर गंभीर संकेत दे रहे थे।
दो हफ्ते बाद होगी विस्तृत सुनवाई
सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह इस याचिका को इसी समय खारिज करवाना चाहते हैं या इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं।
अंततः पीठ—जिसमें जस्टिस विनोद चंद्रन भी शामिल थे—ने दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई तय कर दी।याचिका में भारत की न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थाओं में जेनरेटिव एआई (GenAI) को कानून द्वारा रेग्यूलेट करने, इसके उपयोग की एकरूपता सुनिश्चित करने और एक व्यापक नेशनल एआई फ्रेमवर्क बनाने की मांग की गई है।
क्यों बढ़ रहा है जेनरेटिव एआई को लेकर खतरा?
याचिका में दो महत्वपूर्ण आशंकाएँ दर्ज की गईं:
1. एआई और जेनएआई में मूलभूत अंतरएआई पिछले पैटर्न से निर्णय निकालता हैलेकिन जेनएआई नया डेटा गढ़ सकता है, मनगढ़ंत कानूनी मिसालें तैयार कर सकता हैयह न्यायिक रिकॉर्ड को भ्रमित कर सकता है—जो एक बेहद गंभीर मुद्दा है
2. सोशल मीडिया पर दुरुपयोग की आशंकामॉर्फ्ड वीडियोफर्जी ऑडियोगलत सूचनासंस्थानों की प्रतिष्ठा पर हमलेयाचिका में कहा गया कि जेनएआई ‘डेटाफिकेशन’ की जटिल प्रक्रिया पर काम करता है, जिसके कारण उसके द्वारा बनाए गए चित्र, टेक्स्ट या वीडियो उपयोगकर्ता को बी के झासकते हैं।
न्यायपालिका बनाम फेक टेक:
आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती?
CJI गवई की टिप्पणी केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं थी।यह चेतावनी थी—कि यदि डिजिटल तकनीकों को नियंत्रित न किया गया, तो वे न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए गहरा संकट बन सकती हैं।
अदालत में मौजूद विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद के खिलाफ हो रहे डिजिटल हमलों को खुले मंच पर स्वीकार करते हुए एआई रेग्यूलेशन की आवश्यकता पर इतना स्पष्ट संकेत दिया है।अगली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि भारत क्या एआई रेग्यूलेशन की दिशा में कोई बड़ा कदम उठाने वाला है।
