बी के झा
NSK


पटना, 20 दिसंबर
हिजाब को लेकर सुर्खियों में आईं मुस्लिम महिला चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन की सरकारी सेवा में जॉइनिंग को लेकर शनिवार को दिनभर असमंजस की स्थिति बनी रही। पटना सदर प्रखंड के सबलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में नियुक्त डॉ. नुसरत के पास नौकरी ज्वाइन करने के लिए महज कुछ घंटे शेष हैं। शनिवार शाम 6 बजे के बाद जॉइनिंग स्वीकार नहीं की जाएगी, और यह उनकी नियुक्ति की अंतिम तिथि है।स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जॉइनिंग की प्रक्रिया बहु-चरणीय है। पहले मेडिकल जांच, फिर राज्य स्वास्थ्य समिति में दस्तावेज़ों का सत्यापन और अंततः संबंधित PHC में पदभार ग्रहण किया जाना है। लेकिन दोपहर तक डॉ. नुसरत के जॉइन करने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी।इस संबंध में सिविल सर्जन अविनाश कुमार सिंह ने दो टूक कहा,दोपहर 2 बजे तक डॉ. नुसरत जॉइन करने नहीं आई हैं। अगर वे आतीं, तो उनके दस्तावेज़ लेकर जॉइनिंग लेटर जारी किया जाता और वे अपने दायित्व संभाल लेतीं। आज शाम 6 बजे तक जॉइनिंग हो सकती है। इसके बाद मामला स्वास्थ्य विभाग के विवेक पर होगा कि उन्हें दोबारा अवसर दिया जाए या नहीं। हमारे स्तर से आज अंतिम दिन है।
”राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की दो टूक:
‘यह विवाद ही नहीं’
हिजाब विवाद पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भावुक और स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण को विवाद का नाम देना ही दुखद है।उन्होंने कहा,यह कोई विवाद है ही नहीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिता की तरह हैं। इसे विवाद कहना मुझे बड़ा दुख देता है। वे सबको बेटी की तरह देखते हैं। पिता-बेटी के रिश्ते में ऐसी बातों को विवाद बनाना गलत है।राज्यपाल ने डॉ. नुसरत को नौकरी जॉइन कर लेने की सलाह दी और कहा कि इस विषय पर सियासत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री का बचाव करने के लिए नहीं, बल्कि मामले को मानवीय दृष्टि से देखने की बात कर रहे हैं।
वीडियो से शुरू हुआ बवाल, सियासत ने पकड़ा जोर यह मामला 15 दिसंबर को आयोजित आयुष चिकित्सकों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के एक वीडियो के वायरल होने के बाद गरमाया। वीडियो में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नियुक्ति पत्र लेने आईं डॉ. नुसरत परवीन से हिजाब हटाने को कहते दिखाई दिए, और फिर कथित तौर पर अपने हाथ से हिजाब हटाया।इसके बाद राजद सहित कई विपक्षी दलों ने वीडियो को साझा करते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया। देखते ही देखते यह मामला बिहार से बाहर झारखंड, जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान तक चर्चा का विषय बन गया।
सेवा, संवेदनशीलता और सियासत के बीच फंसा फैसला एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग नियमों और समय-सीमा की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत गरिमा और राजनीतिक व्याख्याओं के बीच उलझता नजर आ रहा है।्
सवाल यह है कि क्या डॉ. नुसरत तय समय के भीतर जॉइनिंग कर पाती हैं, और यदि नहीं, तो क्या स्वास्थ्य विभाग उन्हें दूसरा मौका देगा?
फिलहाल, घड़ी की सुइयां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। शाम 6 बजे तक का समय ही तय करेगा कि यह मामला प्रशासनिक निर्णय पर खत्म होगा या सियासी बहसों का नया अध्याय लिखेगा।
