हिमंत बिस्वा सरमा का विवादित बयान: “सीवान में है छोटा ओसामा, रघुनाथपुर में गरजे, असम के सीएम की जुबान, शहाबुद्दीन परिवार पर सीधा हमला; विपक्ष बोला— “हिंदू-मुस्लिम कर बिहार की एकता तोड़ना चाहती BJP”

बी के झा

NSK

पटना , 4 नवंबर बिहार

विधानसभा चुनाव के पहले चरण के प्रचार के आखिरी दिन सीवान का सियासी तापमान अचानक उबल पड़ा।एनडीए के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रघुनाथपुर की चुनावी सभा में शहाबुद्दीन परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब को “छोटा ओसामा” कह डाला।

उन्होंने कहा—मैंने सोचा था रघुनाथपुर का नाम सुनकर यहां राम, लक्ष्मण और माता सीता की पवित्र धरती होगी, लेकिन यहां आकर बताया गया कि इस जगह पर एक ओसामा भी रहता है। पहले तो लगा ओसामा बिन लादेन वापस आ गया, फिर कहा गया कि यह बड़ा नहीं, छोटा ओसामा है।“

देश में जितने छोटे ओसामा बचे हैं, सबको खत्म किया जाएगा” —

हिमंत बिस्वाअपने भाषण में हिमंत ने कहा कि देश राम-सीता और श्रीकृष्ण का है, ओसामा बिन लादेन का नहीं।

उन्होंने मंच से लोगों से अपील की—रघुनाथपुर की जनता ‘छोटे ओसामा’ को जीतने न दे। अगर ऐसे लोग विधानसभा में पहुंचे तो एक दिन वे देश तक पहुंच जाएंगे। जिस तरह असम ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को गिनीज बुक में दर्ज कराया है, वैसे ही शहाबुद्दीन परिवार ने हत्या का गिनीज रिकॉर्ड बनाया है।

यह बयान आते ही सोशल मीडिया पर तूफान मच गया। राजनीतिक हलकों में इसे “ध्रुवीकरण की कोशिश” और “संवैधानिक गरिमा का अपमान” बताया जा रहा है।सीवान में कौन किससे लड़ रहा है?सीवान सीट से आरजेडी ने ओसामा शहाब (दिवंगत बाहुबली नेता शहाबुद्दीन के बेटे) को प्रत्याशी बनाया है,जबकि बीजेपी ने पूर्व मंत्री मंगल पांडेय को मैदान में उतारा है।जन सुराज की ओर से राहुल कीर्ति सिंह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले असम सीएम का यह भाषण चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है।

स्थानीय पत्रकार बोले —

“हिंदुत्व की होड़, बिहार की एकता पर खतरा”सीवान के एक वरिष्ठ स्थानीय पत्रकार ने कहा—

लगता है भाजपा नेताओं में यह प्रतिस्पर्धा चल रही है कि कौन सबसे बड़ा हिंदुत्व का पोस्टर बॉय बनेगा। लेकिन यह बिहार की सामाजिक एकता के लिए खतरनाक है। बिहार में बाहर से आए नेता जानबूझकर सांप्रदायिक फूट डालने वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि ओसामा शहाब शहाबुद्दीन का बेटा है, तो भी उसे संविधान के तहत चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है।भाजपा-जेडीयू के टिकट पर भी कई बाहुबली मैदान में हैं, तो फिर क्या वे सभी ‘देशद्रोही’ हो गए?

अगर राजनीति अपराधमुक्त करनी है, तो सभी दल मिलकर यह तय करें कि किसी अपराध छवि वाले को टिकट नहीं दिया जाएगा।

आरजेडी का पलटवार —

“हिंदू-मुसलमान कर रहे, रोजगार पर चुप”आरजेडी की प्रवक्ता कंचना यादव ने हिमंत बिस्वा के बयान की तीखी निंदा की।

उन्होंने कहा—जो लोग सत्ता में बने रहने के लिए धर्म की दीवार खड़ी करते हैं, वे असली ‘छोटे ओसामा’ हैं। हेमंत सरमा, ललन सिंह और अनंत सिंह जैसे नेता चुनाव को नफरत की प्रयोगशाला बना चुके हैं।

कंचना ने सवाल किया—

क्या आपने कभी सुना है कि ये नेता बिहार के युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा या उद्योग की बात करते हैं?

इन्हें सिर्फ हिंदू-मुसलमान में वोट चाहिए, विकास में नहीं।

विश्लेषण

बयानबाज़ी बनाम विकास का चुनावबिहार में जारी चुनावी जंग अब पूरी तरह बयानबाज़ी बनाम विकास की दिशा में मुड़ चुकी है।जहाँ एक ओर भाजपा के स्टार प्रचारक धर्म और राष्ट्रवाद के भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रहे हैं,

वहीं विपक्ष इसे “जनता का मुद्दा भटकाने की साजिश” बता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सीवान जैसी मिश्रित सामाजिक संरचना वाले क्षेत्र में इस तरह के बयान चुनावी ध्रुवीकरण को गहरा सकते हैं, जिसका असर न केवल इस सीट पर बल्कि पूरे सारण और गोपालगंज बेल्ट पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

गरिमा बनाम गणित की जंगहिमंत बिस्वा सरमा का “छोटा ओसामा” वाला बयान बिहार चुनाव में नया मोड़ ले आया है।यह अब सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक गरिमा और सांप्रदायिक गणित के बीच टकराव बन चुकी है।मतदान से पहले उठे इस तूफ़ान ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है —

क्या चुनाव अब जनता की समस्याओं पर लड़े जाएंगे, या सिर्फ धार्मिक उकसावे की भाषा में तय होंगे?

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