अगर एनडीए हारा, तो बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं”— शरद पवार का बड़ा बयान और बिहार चुनाव पर गहरी भविष्यवाणी

बी के झा

नई दिल्ली/पटना, 8 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ मतदान के बाद अब राजनीतिक हलचल नई दिशा पकड़ चुकी है। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी–शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने दिल्ली से पटना तक सियासी तापमान बढ़ा दिया है।

पवार ने साफ शब्दों में कहा—“

अगर बिहार में एनडीए की हार हुई, तो मुझे ज़रा भी आश्चर्य नहीं होगा। बिहार बदलाव के मूड में है।”“बिहार बाकी राज्यों से अलग है… यहां की जनता बदलाव समझती और चाहती है”दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शरद पवार ने कहा कि बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति का मनोवैज्ञानिक बैरोमीटर है—जो देश की दिशा और जनभावना का संकेत देता आया है।

उन्होंने कहा,“

बिहार देश के बाकी राज्यों जैसा नहीं है। यहां के नागरिक राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक हैं। अगर एनडीए सत्ता खो देता है तो यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी।”हालांकि पवार बिहार में प्रचार करने नहीं गए, लेकिन उन्होंने दावा किया कि राज्य में उनके पुराने संपर्कों और राजनीतिक सूत्रों से जो संकेत मिल रहे हैं,

वे साफ बताते हैं—

बिहार की जनता बदलाव की प्रतीक्षा में है।इतिहास का हवाला देकर पवार ने समझाई बिहार की राजनीतिक आत्मा

शरद पवार ने बिहार के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि यह वही धरती है जहां से भारत की कई बड़ी राजनीतिक क्रांतियाँ शुरू हुईं—चंपारण आंदोलन, जहाँ महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सत्ता की नींव हिला दीजेपी आंदोलन, जिसने आपातकाल की दीवारों को तोड़ दिया बेलछी की घटना, जब विपक्ष में बैठी इंदिरा गांधी हाथी पर सवार होकर गांव पहुँचीं और राजनीतिक धारा ही बदल दीपवार ने कहा,“बिहार की जनता कभी भी राजनीतिक बदलाव करने से पीछे नहीं हटती। इतिहास इसका साक्षी है।

65.08% मतदान—बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत?बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 65.08% रिकॉर्ड मतदान हुआ है—जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है।राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मतदान न सिर्फ उत्साह, बल्कि यथास्थिति बदलने की मंशा का संकेत देता है।जहाँ एनडीए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 साल के शासन को अपनी ताकत बताते हुए सत्ता बरकरार रखने की उम्मीद कर रहा है, वहीं विपक्ष—आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट—कुशासन, बेरोज़गारी और नौकरियों के वादे को मुख्य मुद्दा बनाकर हमला कर रहा है।

राहुल गांधी की सराहना—

पवार ने चुनाव आयोग को दी नसीहत

चौंकाने वाली बात यह रही कि शरद पवार ने इस प्रेस वार्ता में राहुल गांधी की भी खुलकर तारीफ़ की।उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों की प्रशंसा करते हुए कहा—“राहुल गांधी ने मतदाता सूची में अनियमितताओं पर आवाज उठाकर जनजागृति पैदा की है। ECI को उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में कई मायनों में देखा जा रहा है—

क्या पवार राहुल गांधी के साथ विपक्ष की बड़ी रणनीतिक एकजुटता की ओर बढ़ रहे हैं?क्या यह 2026 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी खेमे में नई मजबूती का संकेत है?या फिर बिहार में संभावित सत्ता परिवर्तन के अनुमान ने विपक्ष को नैरेटिव बदलने का नया मौका दिया है?

विश्लेषण:

पवार का बयान—संयोग नहीं, संकेत हैशरद पवार भारतीय राजनीति के सबसे अनुभवी रणनीतिक मस्तिष्क माने जाते हैं।उनके बयान आमतौर पर हवा में नहीं होते।बिहार चुनाव के इस संवेदनशील मोड़ पर उनका यह कथन…“

बिहार बदलाव चाहता है”

कई तरह के राजनीतिक संदेश देता है—

1. एनडीए के भीतर तनाव बढ़ेगा

2. महागठबंधन को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी

3. न्यूट्रल मतदाता के ऊपर असर

4. बिहार चुनाव का राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव

निष्कर्ष:

बिहार फिर किसी बड़े राजनीतिक मोड़ की ओर?इतिहास गवाह है—जब-जब बिहार ने मतदान में रिकॉर्ड बनाया है, देश की राजनीति में किसी बड़े मोड़ की शुरुआत हुई है।शरद पवार का बयान उसी बदलते राजनीतिक मौसम की आहट समझा जा रहा है।अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं किक्या वाकई बिहार बदलाव के लिए तैयार है?क्या रिकॉर्ड मतदान सत्ता परिवर्तन का संकेत है?या फिर एनडीए एक बार फिर बिहार की राजनीति में अपना प्रभाव साबित करेगा?आने वाले कुछ दिन न सिर्फ बिहार, बल्कि दिल्ली की राजनीति के लिए भी बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

NSK

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