बी के झा
NSK

पटना/मोकामा, 2 नवंबर
बिहार की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। मोकामा से जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार और बाहुबली छवि वाले नेता अनंत सिंह को पुलिस ने शनिवार देर रात जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया।
रविवार को उन्हें पटना सिविल कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।गिरफ्तारी से पहले डीआईयू सेल में उनकी मेडिकल जांच की गई, जिसके बाद उन्हें बेऊर जेल भेजा गया। इस केस में अनंत सिंह के साथ उनके करीबी मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को भी गिरफ्तार किया गया है।
30 अक्टूबर की घटना: प्रचार के बीच चली हिंसा की लपटें30 अक्टूबर को मोकामा विधानसभा क्षेत्र के भदौर और घोसवारी इलाके में हिंसा भड़क गई थी।जानकारी के मुताबिक, जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार के दौरान अनंत सिंह और दुलारचंद यादव के समर्थकों के बीच झड़प हुई, जिसमें दुलारचंद की मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दुलारचंद की मौत किसी कठोर वस्तु से लगी चोट के कारण हृदय गति रुकने से हुई, जिससे मामला हत्या का बन गया।
एसएसपी बोले – जांच में हत्या की पुष्टि, चार FIR दर्जपटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि,पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शुरुआती जांच से यह स्पष्ट है कि मामला हत्या का है। तीनों आरोपियों की घटना स्थल पर मौजूदगी की पुष्टि हुई है।”
उन्होंने बताया कि इस घटना में कुल चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं—एक आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित भी।अनंत सिंह पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला इसलिए दर्ज हुआ क्योंकि वे “बड़े काफिले” के साथ प्रचार कर रहे थे।अनंत सिंह ने सूरजभान पर ठोका ठीकरामीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने माना कि झड़प हुई थी, लेकिन हत्या की साजिश से इंकार करते हुए ‘अंडरवर्ल्ड और राजनीति के अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी सूरजभान’ पर दोष मढ़ दिया।
गौरतलब है कि सूरजभान की पत्नी वीणा देवी इस बार राजद उम्मीदवार के रूप में मोकामा से चुनाव मैदान में हैं।इस तरह, मोकामा की जंग अब एक बार फिर पुराने ‘अनंत बनाम सूरजभान’ संघर्ष का नया अध्याय बन चुकी है।
निर्वाचन आयोग का सख्त रुखघटना के बाद निर्वाचन आयोग ने तत्परता दिखाते हुए पटना के ग्रामीण एसपी का तबादला किया और तीन अन्य पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए।यह कदम तब उठाया गया जब विपक्ष ने आयोग पर निष्क्रियता का आरोप लगाया।
मीसा भारती का तंज –
‘नाक बचाने के लिए गिरफ्तारी’राजद सांसद मीसा भारती ने इस गिरफ्तारी को “चुनाव आयोग की दिखावे की कार्रवाई” बताया। उन्होंने कहा,जब चारों तरफ से छीछालेदर शुरू हुई तब आयोग अपनी नाक बचाने के लिए अनंत सिंह को गिरफ्तार किया गया है।”
भूमिहार समाज में उबाल,
मोकामा की राजनीति गरमाई मोकामा, जो भूमिहार बहुल क्षेत्र माना जाता है, वहां अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने नया राजनीतिक भूचाल पैदा कर दिया है।स्थानीय लोगों में नाराज़गी स्पष्ट है, और कई वर्गों में यह भावना है कि ‘छोटे सरकार’ को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है।हालांकि सूरजभान गुट इसे कानून का प्राकृतिक परिणाम बता रहा है।
14 नवंबर को नतीजा तय करेगा मोकामा का भविष्यअब सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह की गिरफ्तारी उनकी “छोटे सरकार” वाली छवि को और मज़बूत करेगी या इस बार भूमिहार वोटबैंक में दरार डालकर सूरजभान की पत्नी वीणा देवी राजनीतिक समीकरण पलट देंगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सूरजभान अपने ही जाल में फंस सकते हैं, क्योंकि मोकामा में अनंत सिंह का जनाधार अब भी गहरा है।
6 और 11 नवंबर को मतदान होना है, जबकि मतगणना 14 नवंबर को।
अब पूरे बिहार की नज़रें मोकामा पर टिकी हैं — जहां फैसला सिर्फ एक सीट का नहीं, ‘छोटे सरकार’ की सियासी विरासत का भी होगा।
विश्लेषण:मोकामा की राजनीति हमेशा बंदूक और बहादुरी की कहानियों से जुड़ी रही है।इस बार भी चुनावी अखाड़े में मुद्दों से ज़्यादा माफिया-राजनीति का संगम केंद्र में है।
जनता किसे चुनती है—‘सत्ता के सूरजभान’ या ‘जनता के अनंत सिंह’—यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में बढ़ेगी।”
