अफगान सीमा से आया मौत का ड्रोन? ताजिकिस्तान में हमला, चीन के 3 नागरिक मारे गए* क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया नई अस्थिरता का साया

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/ ताजिकिस्तान/बीजिंग/इस्लामाबाद , 28 नवंबर

मध्य एशिया एक बार फिर अशांति की आग में झुलस उठा है। ताजिकिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले और गोलीबारी में चीन के कम से कम 3 नागरिकों की मौत के बाद पूरा क्षेत्र सुरक्षा तनाव की नई लहर में फंस गया है।स्थानीय अधिकारियों के अनुसार यह हमला अफगानिस्तान की ओर से नियंत्रित सीमा क्षेत्र से आया हथियारबंद ड्रोन द्वारा किया गया, जिसने ताजिक सीमा में प्रवेश कर चीन के श्रमिकों पर सीधा वार किया।ताजिकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों ने ड्रोन के मार्ग और सिग्नल ट्रैकिंग के आधार पर आरोप लगाया कि इस हमले की दिशा अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी बैडख़्शान क्षेत्र से जुड़ती है—

जहां तहरीक-ए-ताजिकिस्तान और अन्य उग्रवादी गुट सक्रिय माने जाते हैं।हमले ने खोली नई चिंता—अफगानिस्तान से आतंकवाद का ज़हर अब ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी’ के साथ ताजिकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कियह हमला केवल एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा संरचना पर एक चुनौती है।”चीन के नागरिक ताजिकिस्तान में हाइड्रोपावर और सड़क निर्माण परियोजनाओं पर कार्यरत थे।हमले में उन्नत हथियारों से लैस ड्रोन का उपयोग पहली बार देखा गया है—

जो अफगानिस्तान से निकलने वाले आतंकवादी नेटवर्क की तकनीकी क्षमताओं को लेकर चिंता बढ़ाता है।सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है :यह हमला दिखाता है कि आतंकवादी गुट अब ड्रोन टेक्नोलॉजी पर भी पकड़ बना चुके हैं, जो पाकिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान और रूस—सभी की सीमा सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।”—

डॉ. हमीद सिद्दीकी, क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ चीन में शोक, ताजिकिस्तान में हड़कंप—

‘गहन जांच’ का आदेश बीजिंग ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और ताजिकिस्तान से विस्तृत जांच की मांग की है।चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा:हमारे नागरिकों पर इस प्रकार का हमला अक्षम्य आतंकवाद है। दोषियों को कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए।”ताजिकिस्तान में चीनी निवेश सबसे ज़्यादा है, इसलिए यह हमला दोनों देशों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

पाकिस्तान ने की कड़ी निंदा—तालीबान पर साधा निशानाहमले की जानकारी के तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार ने इस घटना की तीखी निंदा की। इस्लामाबाद ने कहा कि वह चीन और ताजिकिस्तान के दर्द को अच्छी तरह समझता है क्योंकि वह स्वयं अफगानिस्तान से होने वाले आतंकवादी हमलों का लगातार शिकार रहा है।पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का बयान:यह एक कायराना हमला है। अफगानिस्तान की जमीन से चल रहे आतंकी नेटवर्क पर रोक लगनी चाहिए।तालीबान शासन की विफलता पूरे क्षेत्र को कीमत चुकवा रही है।

पाकिस्तान ने खुलकर तालीबान पर उंगली उठाई, कहा—अफगान तालिबान की शह पर आतंकियों की मौजूदगी पूरे क्षेत्र और वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर संकट है।”क्या कर रहा है अफगानिस्तान? — तालीबान की ‘चुप्पी’ पर उठे सवाल हमले के बाद तालीबान प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।विश्लेषकों के अनुसार तालीबान की चुप्पी अंतरराष्ट्रीय दबाव को बढ़ा सकती है, खासकर चीन और रूस जैसे देशों की ओर से, जिनका अफगानिस्तान की स्थिरता में बड़ा हित जुड़ा है।काबुल स्थित एक पूर्व राजनयिक ने कहा:अगर तालीबान आतंकियों को रोकने में विफल रहता है, तो मध्य एशिया में नई अस्थिरता और हिंसा फैलना तय है।”

क्षेत्रीय समीकरण—क्या अफगानिस्तान ‘नई असुरक्षा का केंद्र’ बन रहा है।

यह घटना कई बड़े प्रश्न खड़े करती है:

1. आतंकवादी गुटों के हाथ ड्रोन टेक्नोलॉजी कैसे पहुँची?यह दर्शाता है कि हथियारों और तकनीक का अवैध बाज़ार बढ़ रहा है।

2. क्या अफगानिस्तान फिर वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क का ‘हब’ बन रहा है?अमेरिका की वापसी के बाद सुरक्षा शून्य गहराता जा रहा है।

3. चीन और मध्य एशिया में बढ़ते निवेश को क्या खतरा?चीन की Belt and Road परियोजनाएँ कई बार आतंकी हमलों का निशाना बन चुकी हैं।

4. क्या ताजिकिस्तान, पाकिस्तान और चीन एक संयुक्त सुरक्षा रणनीति बनाएंगे?यह संभावना अब और मजबूत हो गई है।

विशेषज्ञों की राय—”यह घटना दक्षिण एशिया- मध्य एशिया सुरक्षा ढांचे का टर्निंग पॉइंट”ब्रिगेडियर (रि.) फरहाद खोशोवड्रोन हमले क्षेत्रीय आतंकवाद की नई रणनीति है—यह आने वाले महीनों में सुरक्षा चुनौतियों को कई गुना बढ़ा देगा।

”चीनी भू-राजनीतिक विश्लेषक लियू मिंगअगर अफगानिस्तान अपनी जमीन से चल रहे आतंकी नेटवर्क को नहीं रोकता, तो चीन और रूस इसके खिलाफ कड़े कदम उठा सकते हैं।

निष्कर्ष:

एक ड्रोन से हिली पूरी कूटनीतियह हमला केवल तीन चीनी नागरिकों की मौत का मामला नहीं है—यह अफगानिस्तान की अस्थिरता, आतंकवाद की बदलती तकनीक, और मध्य-एशियाई क्षेत्रीय भू-राजनीति के बड़े संकट की ओर इशारा है।आसियान से लेकर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) तक, सभी मंचों पर अब यह बड़ा सवाल गूंज रहा है।क्या अफगानिस्तान एक बार फिर विश्व आतंकवाद का केंद्र बन रहा है?

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