अलविदा ‘अजित दादा’… बारामती आज मौन है, महाराष्ट्र शोक में डूबा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई , राजनीति से परे एक प्रभावशाली जननेता को आख़िरी सलाम

बी के झा

NSK

बारामती/मुंबई / न ई दिल्ली, 29

महाराष्ट्र की राजनीति का एक सशक्त, निर्णायक और जुझारू अध्याय गुरुवार को समाप्त हो गया। राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज उनके गृह नगर बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जा रहा है। सुबह 9 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और 11 बजे विद्या प्रतिष्ठान के खेल मैदान में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। बुधवार सुबह बारामती हवाई पट्टी के पास हुए भीषण विमान हादसे में अजित पवार समेत पाँच लोगों की आकस्मिक मृत्यु ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है।

राज्य सरकार ने इस त्रासदी पर तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

बारामती बना शोक का केंद्र, जनसैलाब उमड़ा

आज बारामती में हर आंख नम है। ‘अजित दादा’ की अंतिम झलक पाने के लिए हज़ारों लोग तड़के से ही सड़कों पर उमड़ पड़े। विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पाँच विशाल पंडाल लगाए गए हैं, जहां देशभर से आए राजनीतिक नेता, सामाजिक प्रतिनिधि और पवार परिवार के सदस्य मौजूद रहेंगे। जगह-जगह बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं, ताकि दूर खड़े लोग भी अंतिम संस्कार में सहभागी बन सकें।अजित पवार के बेटे जय पवार और पार्थ पवार शोकाकुल परिजनों के साथ लोगों से मिलते नज़र आए। सुप्रिया सुले भी काटेवाड़ी स्थित आवास पहुंचीं और परिवार को सांत्वना दी।

केंद्र और राज्य सरकार की मौजूदगी

अंतिम संस्कार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक संवैधानिक मर्यादा और सम्मान का संदेश देती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही गहरा शोक व्यक्त कर चुके हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्रिमंडल के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,“यह केवल एक संवैधानिक पदाधिकारी का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के जनजीवन से गहराई से जुड़े नेता का अंतिम संस्कार है, इसलिए सभी व्यवस्थाएं असाधारण स्तर की की गई हैं।”

हादसे की जांच: तकनीक, कानून और निष्पक्षता की कसौटी

विमान दुर्घटना की जांच को लेकर डीजीसीए, एएआईबी और फोरेंसिक विभाग के अधिकारी लगातार क्रैश साइट पर मौजूद हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर ली है। एएआईबी के तीन सदस्य VRS वेंचर्स के कार्यालय का दौरा कर चुके हैं, जहां लगभग डेढ़ घंटे तक पूछताछ हुई।दुर्घटना में जान गंवाने वाले कैप्टन सुमित कपूर के पास 15,000 घंटे का उड़ान अनुभव था, जबकि सह-पायलट शांभवी पाठक के पास 1,500 घंटे का अनुभव था—

यह तथ्य हादसे को और भी गंभीर तकनीकी जांच के दायरे में ले आता है।

लीयरजेट की मूल कंपनी बॉम्बार्डियर ने भी बयान जारी कर जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है।

कानूनविदों की राय: ‘जांच पर भरोसा ज़रूरी’

वरिष्ठ कानूनविदों का मानना है कि इस मामले में भावनाओं के साथ-साथ कानूनी संयम भी आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता (नाम न छापने की शर्त पर) कहते हैं—“विमान दुर्घटनाओं की जांच बहु-स्तरीय होती है। जब तक अंतिम रिपोर्ट न आ जाए, साज़िश जैसे शब्दों का प्रयोग न्याय और पीड़ित—दोनों के साथ अन्याय है।”

राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अजित पवार का निधन केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता-राजनीति में एक बड़ा शून्य है।मुंबई विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर कहते हैं—“अजित पवार निर्णय लेने वाले नेता थे। वे विवादित भी रहे, लेकिन प्रशासनिक पकड़ और जनाधार—दोनों में उनका कोई विकल्प तुरंत नहीं दिखता।”

विपक्ष की प्रतिक्रिया: शोक और सवाल—दोनोंजहां एक ओर

विपक्षी दलों ने शोक व्यक्त किया, वहीं कुछ नेताओं द्वारा जांच की मांग ने सियासी बहस को जन्म दिया। हालांकि, शरद पवार द्वारा इसे ‘दुर्घटना’ बताए जाने के बाद अधिकांश विपक्षी स्वर संयमित होते दिखे।एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने कहा—“आज सवालों का नहीं, संवेदना का दिन है। जांच अपना काम करेगी।”

अजित पवार: राजनीति से आगे एक जननेता

अजित पवार को उनके समर्थक ‘सख्त लेकिन प्रभावी’ नेता के रूप में याद करते हैं। सिंचाई से लेकर वित्त तक, सत्ता के हर केंद्र में उनकी भूमिका निर्णायक रही। उनके निधन से जो खालीपन बना है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।

अंतिम विदाई, लेकिन सवालों के साथ एक विरासत

आज जब बारामती की धरती अपने सबसे प्रभावशाली पुत्र को अंतिम विदाई दे रही है, तब महाराष्ट्र भावनाओं, सवालों और स्मृतियों—

तीनों के बीच खड़ा है।

जांच अपनी राह चलेगी, राजनीति अपना समय देखेगी—लेकिन फिलहाल पूरा राज्य बस यही कह रहा है:“

अलविदा अजित दादा… आप हमेशा याद रहेंगे।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *