बी के झा
नई दिल्ली, 28 नवंबर
राष्ट्रीय राजधानी में जमीन कब्ज़ा और दस्तावेज़ फर्जीवाड़े का ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने सरकारी एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया है। अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन और विवादित कारोबारी जवाद अहमद सिद्दीकी, जो पहले से ही दिल्ली ब्लास्ट और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी की कस्टडी में हैं, अब मृतकों की जमीन हथियाने वाले रैकेट के मास्टरमाइंड के रूप में उभरकर सामने आए हैं।जांच में खुलासा हुआ है कि दक्षिण दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके की खसरा नंबर 792 की कीमती जमीन को एक नकली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के ज़रिए तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन ने हड़प लिया—और यह फाउंडेशन सीधे तौर पर जवाद सिद्दीकी से जुड़ा हुआ है।
लेकिन असली सनसनी इस बात से हुई कि—जिन लोगों को कागज़ों में ‘जमीन बेचने वाला’ दिखाया गया, वे तो दशकों पहले मर चुके थे!‘मरे हुए लोग 2004 में साइन कर रहे थे!’ – जांच एजेंसियों की चौंकाने वाली खोज जांच के दौरान सामने आया 7 जनवरी 2004 का वह संदेहास्पद GPA जिसके सिग्नेचर और अंगूठे के निशान उन व्यक्तियों के ‘दिखाए गए’ हैं जिनकी मृत्यु 1972 से 1998 के बीच हो चुकी थी।सूची देखें तो रोंगटे खड़े हो जाएं—नाथू – मृत्यु: 1972 (मदानपुर खादर)हरबंस सिंह – मृत्यु: 1991 (तेहखंड)हरकेश – मृत्यु: 1993 (तुगलकाबाद)शिव दयाल – मृत्यु: 1998 (तुगलकाबाद)जय राम – मृत्यु: 1998 (छुरिया मोहल्ला)कागज़ों में इन मृतकों को ऐसे दिखाया गया है मानो वे 2004 में खुद अपनी जमीन बेचने कोर्ट-कचहरी घूम रहे हों!
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:“यह दस्तावेज़ पूरी तरह फर्जी है। कोई मृत व्यक्ति GPA जारी नहीं कर सकता। यह स्पष्ट धोखाधड़ी है।”2013 में फर्जी GPA के सहारे 75 लाख की सेल डीड, मरे हुए लोगों के ‘शेयर’ तक बेच डालेफर्जी GPA का इस्तेमाल करते हुए एक और बड़ा खेल 27 जून 2013 को खेला गया।एक पंजीकृत सेल डीड बनाई गई जिसके अनुसार यह जमीन ₹75 लाख में तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के नाम ट्रांसफर की गई।
सच्चाई यह है कि—विनोद कुमार ने को-ओनर्स के “अटॉर्नी” के तौर पर साइन किए जिनमें को-ओनर्स की ओर से वह साइन कर रहा था, उनमे कई दशकों पहले मर चुके लोग शामिल थेमृतकों के बिना बांटे गए शेयरों को ऐसे बेचा गया मानो वे जिंदा हों और उन्होंने सहमति दी हो जांच टीम के एक सदस्य के शब्दों में—“यह सिर्फ फर्जी कागज़ नहीं, बल्कि एक बड़े पैमाने पर चल रहे सिंडिकेट का संकेत है।”क्या यह दिल्ली का सबसे बड़ा ‘ग्रेवयार्ड प्रॉपर्टी रैकेट’?अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला अकेला नहीं।यह संभव है कि दिल्ली में—मृतकों की संपत्ति,लापता लोगों की जमीन,और पुराने खसरा नंबरों पर कब्ज़ा—इन सब पर कब्ज़ा जमाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क कार्यरत हो।यह नेटवर्क—नकली GPA,फर्जी सिग्नेचर,मृतकों के नाम पर अंगूठे के निशान,नकली गवाहऔर दलालों–प्रॉपर्टी डीलरों की चेन—के सहारे करोड़ों की जमीन को सफेदपोश संस्थाओं के नाम ट्रांसफर कर देता था।
अल-फलाह ग्रुप और तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन पर नए आरोपों ने इस शक को और मजबूत कर दिया है।जवाद सिद्दीकी के लिए मुश्किलें बढ़ीं: मनी लॉन्ड्रिंग + जमीन घोटाला + ब्लास्ट केस जवाद पहले से ही—दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच ED की मनी लॉन्ड्रिंग प्रॉबऔर अब जमीन कब्जा और दस्तावेज़ जालसाजी—तीनों के घेरे में आ चुके हैं।हालात यह कहते हैं कि आने वाले दिनों में उनके खिलाफ कई और धाराएँ और केस जोड़े जा सकते हैं।जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई—
कौन-कौन फंसेगा?एजेंसियों के अनुसार:दस्तावेज़ तैयार करने वाले रजिस्ट्रार कर्मी स्थानीय दलाल GPA तैयार करने वाला गिरोह फाउंडेशन के ट्रस्टीऔर जमीन खरीदने–बेचने वालों की पूरी चेनअब जांच के दायरे में आ सकते हैं।यह संभावना भी जताई जा रही है कि—“दिल्ली की कई अन्य विवादित जमीनें भी इसी तरह के ‘डेड मैन साइनिंग’ मॉडल से हथियाई गई हों।”
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय राजधानी में जमीन की हो रही सबसे बड़ी लूट का पर्दाफाश?यह मामला सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि दिल्ली में जमीन कब्ज़ा माफियाओं की उस गहरी जड़ का खुलासा है जो मृतकों के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ बनाकर अरबों की संपत्ति हड़पते रहे।अब पूरा मामला एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ—
यदि जांच निष्पक्ष हुई तोकई बड़े नाम सामने आ सकते हैंऔर दिल्ली की जमीन खरीद–फरोख्त की काली दुनिया की कई परतें खुल सकती हैं।
NSK

